Sunday, October 17, 2021

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हैदराबाद एनकाउंटर: सुप्रीमकोर्ट ने किया 3 सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने हैदराबाद एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच का आदेश देते हुए एक जांच आयोग का गठन कर दिया है। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट और मानवाधिकार आयोग  की जांच पर रोक लगा दी है। पीठ ने उच्चतम न्यायालय के रिटायर्ड जस्टिस वीए एस सिरपुरकर की अगुवाई में तीन सदस्य वाले जांच आयोग का गठन किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज रेखा बालदोता और पूर्व सीबीआई डायरेक्टर कार्तिकेन भी इस आयोग के सदस्य बनाए गए हैं। एनकाउंटर की जांच के लिए बने आयोग का दफ्तर हैदराबाद में बनाया जाएगा। इस आयोग के सभी सदस्यों को सुरक्षा भी दी जाएगी। पीठ ने कहा है कि इस तीन सदस्यीय जांच आयोग को छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। आयोग का पूरा खर्च तेलंगाना सरकार को उठाने का आदेश दिया गया है।

चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा है कि हैदराबाद एनकाउंटर मामले की जांच होनी चाहिए और यह हमारा सुविचारित विचार है। निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आपके पक्ष के कुछ पहलू हैं जिनकी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि लोगों को इस मुठभेड़ की हकीकत जानने का अधिकार है। उन्होंने तेलंगाना पुलिस का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से कहा कि हम आपको दोषी नहीं बता रहे हैं। आप जांच का विरोध मत कीजिए, बल्कि इसमें भाग लीजिए।

चीफ जस्टिस बोबडे ने रोहतगी से कहा कि अगर आप कहते हैं कि आप उनके (मुठभेड़ में शामिल पुलिसवालों को) खिलाफ क्रिमिनल कोर्ट में मुकदमा करने जा रहे हैं तो हमें कुछ नहीं करना है। लेकिन, अगर आप उन्हें निर्दोष मानते हैं तो लोगों को सचाई जानने का अधिकार है। तथ्य क्या हैं, हम अटकलें नहीं लगा सकते। पीठ ने कहा कि हमारा विचार है कि एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जांच होने दीजिए। आपको इसपर क्या आपत्ति है?

इस पर तेलंगाना सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इस तरह के पुराने मामलों की जांच का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में उच्चतम न्यायालय ने कोर्ट के रिटायर्ड जज की नियुक्ति जांच की निगरानी के लिए की थी न कि जांच करने के लिए।

सुनवाई के दौरान सीजेआई एसए बोबडे ने तेलंगाना सरकार की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी से पूछा कि किसी को भी तथ्यों का नहीं पता? इस पर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हमें पता है। चारों को टोल प्लाजा के सीसीटीवी से पहचाना गया। चारों को गिरफ्तार किया गया। थाने के बाहर लोगों की भीड़ जुटी। चारों को मोबाइल व अन्य सामान बरामद करने के लिए मौके पर ले जाना था, लेकिन लोगों की भीड़ जुटने की वजह से रात में ले जाना पड़ा।

 वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि दो रिवाल्वर उन्होंने छीन ली और लोहे की रॉड, डंडे और पत्थरों से हमला कर दिया।फिर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या उन्होंने पिस्तौल छीनी? क्या मेडिकल रिकार्ड है? फिर वकील ने कहा, जवाब में पुलिस को गोली चलानी पड़ी। चीफ जस्टिस का अगला सवाल था कि किस रैंक के अफसर मौके पर थे? जिस पर मुकुल ने कहा कि एसीपी, SI समेत दस पुलिस वाले थे।

चीफ जस्टिस ने पूछा कि उन्होंने पिस्तौल से पुलिस पर फायर किया? क्या पुलिस वाले को गोली लगी? इस पर वकील ने कहा कि नहीं दो पुलिस वाले पत्थर डंडे से जख्मी हुए। चीफ जस्टिस ने आगे पूछा कि क्या पिस्तौल की गोली बरामद हुई? इस पर वकील ने जवाब हां में दिया। उन्होंने कहा कि एक दूधवाले ने अपराध देखा था, उसने लड़की को जलते हुए देखा। पुलिस को सूचना दी। कोई भी कह सकता है कि ये फर्जी मुठभेड़ है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि हम मुठभेड़ की जांच कराने की राय रखते हैं। इस मामले में कुछ तथ्यों की जांच जरूरी है। फिर वकील मुकुल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइन के मुताबिक जांच हो रही है। पुलिस कमिश्नर जो आईपीएस अफसर हैं व अन्य अफसरों की एसआईटी जांच कर रही है। चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमे का कोई नतीजा नहीं निकलेगा क्योंकि चारों अब मर चुके हैं। वे अपना मामला बिल्कुल भी प्रस्तुत नहीं कर सकते। केवल पुलिसकर्मी ही अपने सबूत देंगे। आप और अधिक निष्पक्ष रहें। ट्रायल मजाक बन जाएगा। चीफ जस्टिस  ने कहा कि हम पुलिस कार्रवाई की जांच कराना चाहते हैं, लेकिन हम उन लड़कों की तरफ से आंख नहीं मूंद सकते जो मारे गए हैं।

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि आखिर सुबह-शाम मीडिया को सबूतों के हिस्से क्यों दिखाए जा रहे हैं? इस पर वकील मुकुल ने कहा कि मीडिया को नोटिस किया जाए। कोर्ट भी मीडिया रिपोर्ट देखकर संज्ञान लेता है। फिर चीफ जस्टिस ने कहा कि पहली नजर में हम मीडिया पर गैग लगाने के लिए सहमत नहीं हैं। अयोध्या मध्यस्थता में हमने ये किया था, लेकिन ये एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। इसमें मीडिया प्रभाव डाल सकता है।

पीठ ने कहा कि एक जवान वेटनरी महिला डॉक्टर का रेप किया गया और हत्या कर दी गई। परिणाम में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वो हिरासत में लिए गए। ऐसा लगता है कि पुलिस को उन्हें अपनी हिरासत में रखना मुश्किल हो गया था क्योंकि भारी संख्या में लोग थाने के बाहर जमा हो गए थे। बताया जा रहा है कि पुलिस सुबह अंधेरे में क्राइम सीन को रिकंस्ट्रक्ट करने और सामान रिकवरी के लिए उन्हें मौके पर ले गई। पीठ ने कहा कि आगे क्या हुआ ये इन याचिकाओं का विषय है?

संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच कराने के लिए उच्चतम न्यायालय  में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। पहली याचिका अधिवक्ता जी एस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने दायर की थी जबकि दूसरी याचिका अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की थी। मणि और यादव की जनहित याचिका में दावा किया गया है कथित मुठभेड़ फर्जी है और इस घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दायर की जानी चाहिए।

मणि और यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि कोई भी निर्दोष महिला से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में संलिप्त आरोपियों का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन जांच एजेंसी और पुलिस आयुक्त जैसे उच्चस्तरीय अधिकारियों द्वारा इन आरोपियों को अदालत से सजा मिले बगैर ही कानून अपने हाथ में लेकर मुठभेड़ में मारा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने अपनी याचिका में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से इस मुठभेड़ की जांच कराने का अनुरोध किया है।

इस मामले में पीठ ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पीठ ने कहा कि मीडिया की वजह से फेयर ट्रायल में परेशानी आ सकती है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने मीडिया पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है।इस बीच कोर्ट में रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को नोटिस भी जारी किया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि इस तरह की रिपोर्टिंग में मीडिया से सहयोग की जरूरत है।

घटनास्‍थल पर आरोपियों के साथ सीन रिक्रिएट करने गई पुलिस ने शुक्रवार सुबह एनकाउंटर में चारों आरोपियों को मार गिराया।इसके बाद पुलिस बताया कि आरोपियों ने पहले पुलिस पर पत्‍थरबाजी की और बाद में पुलिसकर्मियों के हथियार छीन लिए। हथियार छीनने के बाद आरोपी फायरिंग करके भाग रहे थे, तभी पुलिस ने एनकाउंटर में उन्‍हें मार गिराया।

 (जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ कानूनी मामलों के जानकार भी हैं।)

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