Wednesday, December 7, 2022

इविवि: फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन के समर्थन में उतरे बुद्धिजीवी और पुरा छात्र, विधानसभा में भी गूंजी आवाज

Follow us:

ज़रूर पढ़े

प्रयागराज। 400 फासदी फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ इलाहबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में ज़ारी छात्र आंदोलन आज 19वें दिन में प्रवेश कर गया। छात्र आंदोलन के 19वें दिन यानि आज प्रख्यात बुद्धिजीवी प्रोफ़ेसर शम्सुल इस्लाम एवम् PSO (AISA) से इलाहाबाद यूनीवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कमल कृष्ण राय फीस वृद्धि के ख़िलाफ़ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जारी आंदोलन को समर्थन देने धरना स्थल पर पहुँचे।

कमल कृष्ण राय ने छात्रों को संबोधित कर कहा कि अस्तित्व के एक सौ छत्तीसवें पायदान पर खड़ा हमारा विश्वविद्यालय वायलिन पर बजते किसी शोक गीत को सर झुकाए सुन रहा है। खामोश खड़ा विजयनगरम हाल का गुम्बद, चुप्पी साधे पत्थरों की ऊंची-ऊंची दीवारें देख रही हैं कि आज इसके इतिहास का ऐसा पहला स्थापना दिवस है जिसमें कैंपस में विद्यार्थियों के कई गुना ज्यादा पुलिस हैं! आतंक से सब कुछ सहमा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि आज हमारे हज़ारों छात्र-छात्रायें नई शिक्षा नीति, शिक्षा पर कारपोरेट कंट्रोल और केंद्र सरकार का सबसे क्रूर हमला झेल रहे हैं।

उन्होंने कुलपति को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अज़ान से परेशान हो जाने वाली हमारी माननीया कुलपति महोदया शायद इस बात से अंजान हैं कि पुलिस की लाठियां जिन नौजवानों के छाती का लहू चाट रही हैं। उन्हें यह पता हो गया है कि कुर्बानी की किसी भी कीमत पर अगर यह लड़ाई नहीं जीती गयी तो गरीब , मध्यम वर्गीय, ग्रामीण, कस्बाई परिवारों के बच्चों का यह आखिरी शैक्षणिक सत्र होगा! कुलपति महोदया इस यूनिवर्सिटी की चाभी अडानी-अम्बानी को सौप देंगी।

इविवि के मुद्दे पर सपा का सदन से वॉकआउट

यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी के सदस्यों को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भारी शुल्क वृद्धि को लेकर छात्रों के आंदोलन का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे नाराज़ होकर सपा ने कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया। कल सुबह जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, सपा सुप्रीमो व नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव खड़े हो गए और इस मुद्दे पर बोलने की कोशिश की लेकिन अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी। अध्यक्ष के दोषपूर्ण रवैये से आहत, आक्रोशित सपा सदस्य नारेबाजी की फिर सदन से वॉकआउट कर गये।

alld fee2

कुलपति की शवयात्रा के बाद छात्रों ने करवाया सामूहिक मुंडन

फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ इलाहबाद यूनिवर्सिटी में ज़ारी छात्र आंदोलन के कल 18 वें दिन छात्रों ने कुलपति के ख़िलाफ़ सामूहिक मुंडन करवाया। गौरतलब है कि परसों छात्रों ने कुलपति की शवयात्रा निकाली थी। बता दें कि यह पितृपक्ष चल रहा है। जिसमें पूरे 15 दिन के पाख में लोग अपने परिवार के मरे हुए लोगों को यादकर श्राद्ध, मुंडन आदि करवाते हैं। चूंकि कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिवार की मुखिया हैं और मुखिया अपने परिवार के बच्चों की बातें और दुख दर्द सुनता है। लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के ख़िलाफ़ छात्र विगत 18 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और कुलपति मुखिया होने के बावजूद न सिर्फ़ निष्ठुर बनी हुई हैं बल्कि पुलिस प्रशासन को कैंपस में बुलाकर छात्रों का दमन करवा रही हैं और पूरे यूनिवर्सिटी में भय का माहौल क़ायम कर रखा है। पुलिस द्वारा अब तक छात्रों के ख़िलाफ़ कई मामले में एफआईआर दर्ज़ की गई है।

alld fee3

राष्ट्रपति के नाम छात्रों का पत्र

वहीं आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में व फीस वृद्धि वापस लेने के बाबत महामहिम द्रौपदी मुर्मू के नाम इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र-छात्राओं ने पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है। छात्रों का आरोप है कि केंद्र में बैठी मोदी सरकार नहीं चाहती कि ग्रामीण परिवेश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों , अल्पसंख्यकों के बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण करें। इसीलिये नई शिक्षा नीति के तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे केंद्रीय सार्वजनिक शिक्षण संस्थान को फ़ीस वृद्धि के रास्ते निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है।

alld fee6

इविवि के छात्र सूरज ने कहा कि जिस विश्वविद्यालय में सामान्य परिवार के बच्चे अपने सपने पूरा करने आते हैं तो कोई बाप अपनी इच्छाओं को मारकर अपनी ज़रूरतों को दबाकर और भूल के उसको पढ़ाता है इविवि प्रशासन व सरकार ने 400 प्रतिशत फीस नहीं तमाम मज़लूम, मज़दूर, मेहनतकश वर्ग के परिवारों के सपनों को मारने का काम किया है।

आइसा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रणविजय ने कहा है कि विश्वविद्यालय शॉपिंग मॉल नहीं है कि जिसके पास पैसा है वो Nike, Woodland, Adidas का जूता पहने और जिसके पास नहीं वो नंगे पांव बाहर खड़ा रहे। यह देश के नागरिकों के टैक्स (GST के साथ) से चलने वाले संस्थान हैं जिसके लिए हर व्यक्ति रोज़ क़ीमत चुकाता है। शैक्षणिक संस्थाओं को कॉरपोरेट मॉल बनाने की मंशा नहीं चलेगी।

alld fee4

छात्रों के मकानों पर बुल्डोजर चलाने की धमकी

समाजवादी छात्र सभा के नेता अजय यादव ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन डिग्री निरस्त करने की लगातार धमकी दे रहा है। वहीं फीस वृद्धि के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय के छात्र संघ भवन के सामने धरना दे रहे छात्र नेता और छात्र संघ के उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि आंदोलन को खत्म कराने के लिए जिला प्रशासन, प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की टीम भेजकर मकान पर बुल्डोजर चलाने की धमकी दे रहा है। अखिलेश यादव ने आगे कहा है कि इस आंदोलन को हमने गांधीवादी तरीके से आगे बढ़ाया और कुलपति से लेकर राष्ट्रपति तक हमने ज्ञापन दिया। लेकिन हमारी बात नहीं सुने जाने पर हम आमरण अनशन पर बैठे। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से सीधे संवाद करने के बजाय पुलिस और जिला प्रशासन के माध्यम से संवाद करता है।

छात्रों के समर्थन में आये देश के अन्य विश्वविद्यालय के छात्र

देश के तमाम प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र भी इविवि के छात्रों के समर्थन में उतरने लगे हैं। आज आइसा BHU द्वारा वाराणसी में विरोध-प्रदर्शन किया गया। बीएचयू में प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक स्वर में केंद्र सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों की आलोचना की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुई फीसवृद्धि को वापस लेने की माँग की।

इससे पहले जेएनयू में भी आइसा और अन्य छात्र संगठनों के छात्रों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुई फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ जारी छात्र आंदोलन के समर्थन में कार्यक्रम किया था।

वहीं कुलपति संगीता श्रीवास्तव ने बयान ज़ारी करके कहा है कि छात्रों द्वारा यह बात फैलाई जा रही है कि फीस में 400 गुना वृद्धि की गई है जोकि सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 30-40 विद्यार्थी झूठ के सहारे विश्वविद्यालय का अकादमिक वातावरण बर्बाद करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशक से प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष शुल्क 975 रुपये था, जो लगभग 81 रुपये प्रति माह बैठता है। वहीं, शुल्क वृद्धि कर इसे 4,151 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है जो प्रति माह लगभग 333 रुपये बैठता है।

(प्रयागराज से जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

क्यों ज़रूरी है शाहीन बाग़ पर लिखी इस किताब को पढ़ना?

पत्रकार व लेखक भाषा सिंह की किताब ‘शाहीन बाग़: लोकतंत्र की नई करवट’, को पढ़ते हुए मेरे ज़हन में...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -