Subscribe for notification

मिट्टी सत्याग्रह के लिए गुजरात गए लोगों का पीछा कर रही है इंटेलिजेंस और गुजरात की पुलिस

जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय NAPM द्वारा किसान आंदोलन के समर्थन में मिट्टी सत्याग्रह आयोजित किया जा रहा है। जिसमें देश भर के तमाम समाजसेवी, नागरिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, किसान नेता हिस्सा ले रहे हैं।

‘मिट्टी सत्याग्रह’ के सिलसिले में गुजरात मिट्टी लेने गये एक्टिविस्ट समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों के पीछे राज्य सरकार ने इंटेलिजेंस और गुजरात पुलिस को लगा दिया है। जो कि चाबीसों घंटे साये की तरह उनके पीछे लगकर उनके पल-पल की गतिविधियों और क्रिया कलापों पर नज़र रख रहे हैं।

जानी मानी एक्टिविस्ट शबनम हाशमी कहती हैं मिट्टी सत्याग्रह का जो कार्यक्रम है उसके तहत हम ऐसी जगहों पर जा रहे हैं जहां या तो कोई बड़ा स्वतंत्रता संग्राम के नेता रहे, वहां रहकर संघर्ष किया, या फिर जहां से हमें ‘मिट्टी सत्याग्रह’ के लिए प्रेरणा मिल सके। इसमें बहुत ज़रूरी बात ये है कि हम जहाँ-जहाँ जा रहे हैं वहां से गुजरात की इंटेलिजेंस एजेंसी और पुलिस हमारा पीछा कर रहे हैं, इस तरह से जैसे हम कोई अपराधी हों। इतने बड़े-बड़े हादसे हो जाते हैं पुलिस कभी समय पर नहीं पहुंचती। लेकिन पुलिस हमारा पीछा कर रही है।

शबनम आगे कहती हैं, “आज सुबह 8 बजे एक संस्थान में प्रार्थना सभा बुलाई गई थी वहां भी इंटेलिजेंस के लोग मौजूद थे। ये समझना बहुत ज़रूरी है कि किस तरह से इस पूरे राज्य और देश को ‘पुलिस स्टेट’ में बदला जा रहा है जो इस देश से हमारे लोकतांत्रिक अधिकार को खत्म करने के लिए किया जा रहा है। अपनी इच्छा से इस देश में कहीं भी जाने के अधिकार को डरा धमकाकर रोकने की कोशिश की जा रही है।

लाइव प्रेस कांफ्रेंस के बीच गिरफ्तारी

इससे पहले 26 मार्च को किसान आंदोलन के समर्थन में और गुजरात में किसान महापंचायत आयोजित करवाने के संदर्भ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के बीच से ही मीडिया के कैमरों के सामने गुजरात पुलिस ने किसानों को जबरन गिरफ्तार कर लिया था। बता दें कि ये संवाददाता सम्मेलन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रवक्ता राकेश टिकैत के गुजरात कार्यक्रम की घोषणा  के लिए बुलाया गया था। संवाददाता सम्मेलन को रोकने के लिए किसानों को गिरफ्तार करना उनके संवैधानिक अधिकारों पर स्टेट का सीधा हमला था।

मिट्टी सत्याग्रह

दो दिन पहले किसान मोर्चा ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करके बताया था कि अब तक, 320 से ज्यादा किसानों ने इस आंदोलन में शहादत दी है इसके बावजूद भी यह आंदोलन अहिंसक सत्याग्रह के साथ सरकार की आक्रामकता और दमन का सामना कर रहा है व आंदोलन का विस्तार जारी है। इस आंदोलन की जड़ें भारत के स्वतंत्रता संग्राम के साथ जुड़ी हैं। 1919 में आए रॉलेट एक्ट को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हजारों बेकसूरों पर जालियांवाला बाग में ब्रिटिश हुकूमत ने गोलियाँ चलाई। पूरा देश आक्रोश से भर गया। इसी दौर में गांधी जी ने “असहयोग आंदोलन” का नारा देकर इस बेरहम हुकूमत के कानूनों का सहयोग ना करने का आह्वान किया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान में आधे कहा था कि “असहयोग आंदोलन में सत्याग्रह की प्रेरणा हमें ऊर्जा प्रदान कर रही है। कृषि, किसानों, खाद्य सुरक्षा को बचाने के लिए आज नमक नहीं, मिट्टी की ज़रूरत  है। इस उद्देश्य से युवाओं ने शिद्दत के साथ “मिट्टी सत्याग्रह’ का आयोजन किया है। इस सत्याग्रह के माध्यम से गाँव की सड़कों पर पहुँचना देश के जल, जंगल, ज़मीन, प्राकृतिक संसाधनों और साथ ही आजीविका को बचाने की कोशिश की जा रही है। यह माँग लोकतंत्र और संविधान के मूल्यवान ढांचे को बचाने के लिए भी है। जाति-धर्म-दुर्भाव के माध्यम से भी हो रहे अत्याचारों को नकार कर समानता का आह्वान करना आवश्यक है। विभिन्न राज्यों में विभिन्न संगठन – विभिन्न रूप से कार्यक्रमों का समन्वय कर रहे हैं। वे गाँव के प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों, आज़ादी के नायकों की प्रतिमाओं और संघर्ष के प्रतीकों से एक मुट्ठी मिट्टी कलश में इकट्ठा करेंगे और लोगों से संवाद करेंगे।

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा विकेन्द्रित रूप में 12 मार्च से 28 मार्च तक देश के कई राज्यों में जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, असम और पंजाब में जन संवाद अभियान चला रही है। मिट्टी सत्याग्रह यात्रा 30 मार्च को दांडी से शुरू होकर गुजरात के अन्य जिलों से होकर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कई जिलों से होकर 5 अप्रैल की सुबह 9 बजे शाहजहाँपुर बॉर्डर पहुँचेंगी। यात्रा के आखिरी दौर में पूरे देश की विकेन्द्रित यात्राएँ किसान बॉर्डर पर अपने राज्य के मिट्टी कलश के साथ यात्रा में शामिल होंगी। शाहजहाँपुर बॉर्डर से किसान टिकरी बॉर्डर जाएँगे। अप्रैल 6 की सुबह 9 बजे हम सिंघु बॉर्डर और शाम 4 बजे किसान ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पहुँचेंगे। बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के सभी वरिष्ठ किसान साथी इस मिट्टी सत्याग्रह यात्रा का हिस्सा रहेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि पूरे देश से आई मिट्टी किसान आंदोलन के शहीदों को समर्पित की जाएगी। बॉर्डर पर शहीद स्मारक बनाए जाएंगे। स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों की पुनर्स्थापित करने के विचार को आगे बढ़ाने के लिए हम संकल्पित हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on March 31, 2021 6:20 pm

Share