भारत में इजराइल के पूर्व राजदूत बने अडानी के इजराइल स्थित हाइफ़ा बंदरगाह के चेयरमैन

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भारत में इज़रायल के पूर्व राजदूत ‘रॉन मलका’ ने रविवार को अपने एक ट्वीट में कहा कि उन्होंने ‘हाइफा’ पोर्ट कंपनी (एचपीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है। जिसका स्वामित्व अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) और इज़राइल के गैडोट ग्रुप के पास है।

रॉन मलका ने अपने ट्वीट में कहा है कि “मैं अडानी के कंपनी की ओर से हाइफा पोर्ट कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में आज पदभार ग्रहण करने के लिए सम्मानित महसूस कर रहा हूं। अडानी और गैडोट का अनुभव और विशेषज्ञता, बंदरगाह के कर्मचारियों के समर्पण के साथ संयुक्त रूप से, हाइफ़ा बंदरगाह को समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”  

जुलाई 2022 में  भारत के अडानी के ‘APSEZ’  और इज़राइल के ‘GADOT’ ग्रुप के एक कंसोर्टियम ने इज़राइल के आधे से अधिक कंटेनर कार्गो को संभालने वाले बंदरगाह ‘हाइफा’ के निजीकरण के लिए निविदा जीती थी। यह इजराइल का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है।

अडानी-गडोट ने इसके लिए सबसे बड़ी बोली लगाई थी। यह बोली 1.18 बिलियन डॉलर की थी। दोनों ने मिलकर ‘एचपीसी’ के 100 प्रतिशत शेयर पर अधिकार कर लिया।

जिसका अधिग्रहण 10 जनवरी 23 को हुआ। अडानी के APSEZ के पास परियोजना का 70 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि इजराइली कंपनी GADOT  के पास शेष 30 प्रतिशत है। ‘हाइफा बंदरगाह’ की रियायत अवधि (grace period) 2054 तक है।

उत्तरी इज़राइल में स्थित  ‘हाइफ़ा’ यहां दो सबसे बड़े व्यापारिक बंदरगाहों में से एक है। जो यहां के कार्गो का लगभग आधा हिस्सा संभालता है। यात्रियों और क्रूज जहाजों के लिए एक प्रमुख बंदरगाह भी है।

भारत में स्थित इजराइल के दूतावास के पूर्व राजदूत ‘रॉन मलका’ ने इज़राइली बाजार में कंपनियों और संस्थानों,सार्वजनिक एवं निजी परियोजनाओं में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को वित्तीय सलाह और मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके अलावा, उन्होंने इजराइल के प्रधान मंत्री आयोग के आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्य किया था।

उनके भारत प्रवास के दौरान  ‘भारत-इजराइल मुक्त व्यापार समझौते’ और हाइफा बंदरगाह परियोजना पर चर्चा ने गति पकड़ी थी। जो कोरोना काल में धीमी रही।

कहा जाता है कि गौतम अडानी की APSEZ कंपनी को इस ठेके को दिलाने में उनके मित्र भारत के प्रधानमंत्री की बड़ी भूमिका है। इस बंदरगाह में अडानी द्वारा 70 फीसदी शेयर खरीदने से पहले प्रधानमंत्री ने कई बार इजराइल की यात्रा की थी। राहुल गांधी ने यह आरोप संसद में दिए गए भाषण में लगाया था।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस डील को भारत-इजराइल के लिए ‘मील का पत्थर’ बताया था। अमेरिकी इंवेस्टमेंट रिसर्च फ़र्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के कारण अडानी समूह मुश्किल दौर से गुज़र रहा है और गौतम अडानी का नाम एशिया के सबसे अमीर शख़्स की फ़ेहरिस्त में बहुत नीचे खिसक गया है।

ऐसे समय में अडानी का इजराइल का सबसे बड़ा टूरिस्ट क्रूज़ और शिपिंग के मामले में दूसरा सबसे बड़े ‘हाइफा’ पोर्ट के इस सौदे की चर्चा हो रही है। इजराइल के पूर्व राजदूत का अडानी की कंपनी का चेयरमैन बनना इस संदेह को और गहरा करता है कि इस सौदे में मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की पर्दे के पीछे निर्णायक भूमिका थी।

(आज़ाद शेखर जनचौक के सब एडिटर हैं।)

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