अभी भी उस खौफनाक मंजर से नहीं उबरे हैं जहांगीरपुरी के लोग

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देश में आजकल किसी भी घटना के बाद उसको कंट्रोल करने के लिए एक नया आइडिया ईजाद किया गया है वह है बुल्डोजर का। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए एक तुगलकी फरमान दिया। जहां संविधान को ताक पर रखकर अब बुल्डोजर का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि यूपी के अलावा इसका प्रयोग दूसरे राज्यों में हो रहा है। इसमें मध्य प्रदेश, और गुजरात के बाद अब दिल्ली भी शामिल हो गया है।

ईद की खरीददारी न करने पाने का दुख

शनिवार को हनुमान जयंती के दिन जहांगीरपुरी के सी ब्लॉक और जी ब्लॉक में हिंसा के बाद तनाव फैल गया। पुलिस ने इस पर कार्रवाई करते हुए अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिसमें दो नाबालिग हैं। इस हिंसा में अंसार को मुख्य आरोपी माना गया है। लेकिन इस बीच आम जनता इसमें पिस रही है। कोई कहता है कि यहां अपराधियों को पुलिस का संरक्षण है तो किसी का कबाड़ चले जाने के कारण ईद की खरीददारी न कर पाने का दुख है।

नजमा

जहांगीरपुरी हिंसा को हुए अब लगभग पांच दिन हो गए हैं। इस दौरान कई तरह की खबरें आपने सुनी होगी। जिसमें से रोहिंग्या मुसलमान से लेकर अवैध निर्माण को तोड़ने की घटना शामिल है। बुधवार को जहांगीरपुरी के कुशल सिनेमा चौराहे पर मीडिया की खचाखच भीड़ थी। हर कोई अपने कैमरे से उस दृश्य को दिखाने की कोशिश कर रहा था। जहां लोगों के रोजगार को उजाड़े जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यह अतिक्रमण जारी रहा। सी ब्लॉक की जामा मस्जिद का अगला हिस्सा तोड़ने के बाद बुलडोजर ने झा जी से लेकर शेख साहब तक हर किसी के रोजगार पर प्रहार किया। यह सभी लोग रेहड़ी पटरी लगाते थे। सिर्फ कुशल चौराहे पर गणेश कुमार गुप्ता की दो मंजिला दुकान थी।

कबाड़ चले जाने का गम

इस भीड़ में 35 वर्षीय प्रवीण आने वाली ईद को लेकर परेशान हैं। जहां एक तरफ लोग अपने घर और दुकान के लेकर परेशान थे। प्रवीण कबाड़ को लेकर परेशान थीं। जमीन पर एक पत्थर पर बैठी प्रवीण हमें बताती हैं कि उनकी कोई दुकान नहीं थी। वह तो कूड़ा बीनकर अपने बच्चों का पेट पालती हैं। प्रवीण की चार बेटियां और एक बेटा है। पति ने उन्हें छोड़ दिया।

वह बताती हैं कि इस हिंसा के बाद से वह बाहर कम निकल पा रही हैं। जिसके कारण वह कम कूड़ा इकट्ठा कर पा रही हैं। उन्होंने पहले से ही ईद के लिए कुछ कूड़ा बीनकर रखा था। ताकि ईद अच्छे से मना सकें। लेकिन अब ऐसा हो नहीं पाएगा। वह कहती हैं कि बुल्डोजर ने मेरे कूड़े वाले बोरों को फेंक दिया है। वही मेरी जमा पूंजी थी ईद के लिए। अब सोच रही हूं कि बच्चियों को ईद में कपड़े कहां से लाकर दूंगी? पहले स्थिति ऐसी थी कि आर्थिक तंगी होने पर किसी से मांग लिया जाता था। दुकानदार दे देते थे। लेकिन अब जब उनकी दुकानें भी बंद हैं तो उनसे भी किस मुंह से मांगू। प्रवीण मौजूदा हालात पर बात करते हुए कहती हैं कि मैं तो चाहती हूं जो भी दोषी है उसे सजा मिले और हम गरीबों का भला हो। यहां करता कोई और है और भरता कोई और है।

ज्यादातर युवा लोग मौजूद थे

शनिवार को हुई घटना के बाद जहांगीरपुरी पूरे देश में छाया हुआ है। हर कोई इसकी एक-एक अपडेट को जानना चाहता है। हमने भी यह जानने के लिए कि शनिवार के दिन क्या हुआ था यहां के लोगों से बात करने की कोशिश की।

जहांगीरपुरी में मुख्य रुप से निम्न मध्यवर्गीय परिवार वाले लोग रहते हैं। जिनका मुख्य पेशा मजदूरी है। जहांगीपुरी के चारों तरफ कचरा ही कचरा देखने को मिलता है। यहां कई लोगों का काम भी कूड़ा बीनना है। शनिवार वाली घटना पर लोग खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। हमने इस बारे में कई लोगों से बात करने की कोशिश की। लेकिन लोग कुछ कहने को तैयार नहीं। जी ब्लॉक के एक शख्स से हमने पूछा कि यहां शनिवार को क्या हुआ था तो उन्होंने साफ कह दिया मैंने कुछ नहीं देखा। इसके बाद हम जी ब्लॉक की तरफ आगे बढ़े जहां हनुमान जयंती के झंडे लगे हुए थे।

इसी गली में हमें परवीन नाम के शख्स मिले जिन्होंने उस दिन का जिक्र करते हुए कहा कि हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सच बात यह है कि उस भीड़ में ज्यादातर लड़के 15 से 25 साल तक के थे। जिनके हाथ में कलम किताब होनी चाहिए थी वह नंगी तलवारें लेकर घूम रहे थे। पता नहीं घर वाले अपने बच्चों पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं। वह बताते हैं कि यहां अपराध अपने चरम पर है। आम आदमी यहां शाम के बाद निकल नहीं सकता। किसी भी वक्त किसी का कोई भी सामान चोरी हो सकता है। और यह सब पुलिस के संरक्षण में हो रहा है। इन अपराधियों को पुलिस का पूरा संरक्षण है। अगर नहीं होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती।

 इसी ब्लॉक में रहने वाली एक महिला ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि उस दिन एक गाड़ी सी ब्लॉक की तरफ से आ रही थी। लोग बस चिल्ला रहे थे भागो-भागो इतने में हम लोग भी अपने बच्चों को घर लेकर चले गए। वह बताती हैं कि हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। यहां हिंदू-मुस्लिम साथ रहते हैं। लेकिन उस दिन क्या हुआ यह तो ऊपर वाला ही जाने।

बच्चे भी हुए परेशान

जहांगीरपुरी में ही रहने वाली गुड़िया उस दिन को याद करते हुए एक दम सहम जाती हैं। वह कहती हैं मेरा बच्चा बच गया बस मेरे लिए तो जैसे दोबारा जिदंगी मिल गई है। वह बताती हैं कि उस दिन हमारे यहां बाजार लगा हुआ था। मेरे बेटा वहीं ए ब्लॉक में स्कूल में पढ़ता है। बच्चे के स्कूल का समय 4 से 6 बजे का है। यह घटना भी उसी समय की है। जिस वक्त यह घटना हुई बच्चे की स्कूल से छुट्टी हो गई थी। उसी दौरान हिंसा भड़क गई। मेरा छोटा बच्चा सहम गया। उधर रोजा खोलने का समय हो रहा था इधर ये हो गया। मैं डरी सहमी रोती बिलखती अपने बच्चे के ढूंढ रही थी। बच्चे को खोजने के चक्कर में गिर भी गई। वह दिन बहुत ही डरावना था। रात में मेरा बच्चा सी ब्लॉक के कोने में मिला। तब जाकर मेरी सांस में सांस आई। वह हिंसा का जिक्र करते हुए कहती हैं कि यह बस कुछ लोगों के कारण ही होता है। हम लोगों ने ही भगवानों को बांटा है। वरना तो हम सब इंसान हमारा आपका सबका खून लाल है।

इस घटना के बाद लगातार आती खबरों में मुस्लिमों को रोहिंग्या मुसलमान बताया जा रहा है। जिसके कारण सी ब्लॉक के मुसलमानों में काफी रोष है। कोई भी मीडिया वाला जब भी इनसे मिलने जाता है। ये सब गुस्से से आग बबूला हो जाते हैं और कहते हैं कि हमारे बारे में खबरों में उल्टा सीधा दिखाया जा रहा है। यहां हमें कुछ और कहा जाता वहां टीवी पर कुछ और आता है। क्योंकि हम लोग मुस्लिम हैं। एक महिला बड़े दुखी मन से कहती है आप लोगों ने हमारा रोजगार भी छीन लिया है। अब हम लोग कूड़ा बीनने जाते हैं तो लोग हमें बांग्लादेशी कहते हैं। जबकि वोट हम भारत में देते हैं।

मीडिया को लेकर गुस्से

सी ब्लॉक में लोगों के अंदर डर का माहौल है। उनका कहना है कि अगर हम कुछ कहेंगे तो पुलिस हमें उठाकर ले जाएगी। एक महिला ने नाम न लिखने की शर्त पर बड़ी मुश्किल बात की। वह कहती है कि इस घटना में जो भी दोषी हैं पुलिस उस पर कार्रवाई करे। लेकिन सिर्फ मुसलमानों को टारगेट न करे। वह कहती है हमारे मुहल्ले में ज्यादातर लोग रोज कमाने खाने वाले हैं। रोजे के दिन चल रहे हैं। हमें कई तरह की परेशानी हो रही है। शनिवार के दिन को याद करते हुए वह कहती है कि उस दिन भी रोजा खोलने में बस कुछ ही समय बाकी रहा था। बस कुछ समय ने ही हमारा पूरा समय खराब कर दिया है। यहां पुलिस वालों ने दुकानें बंद करा रखी है। लोग कूड़ा बीनने नहीं जा पा रहे हैं। अगर लोग कमाएंगे नहीं तो खाएंगे क्या? ईद कैसे मनाएंगे?

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