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जामिया विश्वविद्यालय की वाइस-चांसलर ने लिखा विद्यार्थियों के नाम पत्र, पुलिस की भूमिका को लेकर जताया संदेह

(जामिया मिलिया विश्वविद्यालय की कुलपति नजमा अख्तर ने छात्रों के नाम खुला पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने न केवल छात्रों और छात्राओं के संयम और धैर्य की तारीफ की है। बल्कि घायल शादाब के साहस को भी जमकर सराहा है। उन्होंने पत्र में इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दिल्ली की पुलिस की भूमिका को लेकर गहरा संदेह जाहिर किया है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि पुलिस अगर समय पर हरकत में आ जाती तो शादाब घायल नहीं होता। इसके पहले कुलपति ने एम्स स्थित ट्रौमा सेंटर पर जाकर शादाब से मुलाकात की थी और उसके स्वास्थ्य का जायजा लिया था। पेश है कुलपति का पूरा पत्र। अंग्रेजी में लिखे गए इस पत्र का हिंदी अनुवाद कुमार मुकेश ने किया है-संपादक)

मेरे प्यारे विद्यार्थियों,

आज की हृदय विदारक घटना से मैं अत्यंत व्यथित हूं, आज हमारे एक छात्र शादाब फारूक (एम.ए. मास कम्युनिकेशन) को एक बदमाश ने गोली मारकर घायल कर दिया। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि आप भारतीय संविधान के आदर्शों और अहिंसा के गांधीवादी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। किसी तरह की जवाबी कार्यवाही से बचना, हमेशा की तरह, आप सब की बुद्धिमत्ता की गवाही  है। मुझे बताया गया है कि आप शांतिपूर्वक जामिया सीमा की निकटस्थ सड़क पर विरोध करने के अपने अधिकार का शांतिपूर्ण इस्तेमाल कर रहे थे औऱ उस दौरान होली फैमिली अस्पताल के पास एक विशाल पुलिस बल भी तैनात था।

अचानक एक बदमाश उत्तेजक नारों के साथ हवा में पिस्तोल  लहराता कहीं से  से प्रकट हुआ। अफसोस की बात है कि उसने आप पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे शादाब फारूक घायल हो गया। मैं, पूरी जामिया बिरादरी की ओर से इस जानलेवा और क्रूर कृत्य की निंदा करती हूं। मैं पुलिस की चुप्पी की भी निंदा करती हूं जो इस बदमाश से सिर्फ कुछ ही कदम दूर खड़ी थी। पुलिस की चुप्पी वहां तैनात फोर्स के बारे में बहुत कुछ बताती है।

हम, जामिया बिरादरी, शादाब फारूक और उनके परिवार के साथ खड़े हैं। अगर बदमाश को पुलिस ने समय रहते काबू कर लिया होता, तो इस अप्रिय घटना को टाला जा सकता था। मुझे आप सब पर गर्व है। मेरे प्यारे विद्यार्थियों, आप सबने  बहुत समझदारी का परिचय दिया और प्रतिक्रिया और प्रतिशोध के स्वाभाविक आग्रह से दूरी बनाए रखी। गांधीजी की शहादत के दिन आपका बुद्धिमानीपूर्ण कृत्य उनके प्रति और उनके अदम्य नैतिक साहस के प्रति एक महान और श्रद्धेय श्रद्धांजलि है।

हम शादाब फारूक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम सर्वशक्तिमान ईश्वर  का भी दिल से शुक्रिया  व्यक्त करते हैं कि शादाब फारूक सुरक्षित हैं।

प्रोफेसर नजमा अख्तर

वाइस-चांसलर

जामिया मिलिया इस्लामिया

This post was last modified on January 31, 2020 4:03 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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