Saturday, November 27, 2021

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‘झारखंड कोरोना सहायता मोबाइल एप’ नहीं कर रहा है काम

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रांची। पूरे देश में लागू लाॅकडाउन की वजह से झारखंड से बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 16 अप्रैल को रांची के प्रोजेक्ट सभागार में ‘झारखंड कोरोना सहायता मोबाइल एप’ लांच किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के बाहर फंसे झारखंडी मजदूरों को झारखंड सरकार डीबीटी के जरिए सीधा एक हजार रूपये भेजकर आर्थिक मदद करेगी। झारखंड सरकार के अनुसार अभी भी सात लाख मजदूर झारखंड से बाहर विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं। झारखंड सरकार ने इस एप पर अपने बारे में सूचना अंकित करने के लिए अंतिम तिथि 22 अप्रैल घोषित की है।

इस एप को जारी करने के बाद से ही प्रवासी झारखंडी मजदूरों ने इस एप को डाउनलोड करने की कोशिश शुरू कर दी, लेकिन बहुत सारे मजदूरों का कहना है कि एप डाउनलोड ही नहीं हो रहा है। तो कुछ मजदूरों का कहना है कि एप बहुत ही स्लो है और सूचना अंकित करने में ही बीच में ही बंद हो जाता है। वैसे बहुत सारे मजदूरों की शिकायत यह भी है कि इस एप में झारखंड के ही बैंक के किसी ब्रांच का अकाउंट नंबर और आधार कार्ड में झारखंड का ही पता मांग रहा है, जो मजदूरों के नजर में सरासर नाइंसाफ़ी है। मजदूरों का कहना है कि जो लोग काफी दिन से झारखंड से बाहर रहते हैं, तो ऐसे मजदूर आधार कार्ड में स्थानीय पता डलवा लेते हैं और बैंक अकाउंट भी खुलवा लेते हैं। ऐसे मजदूरों को तो झारखंड सरकार की इस घोषणा से कोई फायदा नहीं होने वाला है।

दिल्ली के बुद्धा काॅलोनी, प्रह्लादपुर (बदरपुर) में झारखंड के गिरिडीह जिले के हीरोडीह थानान्तर्गत पलमो गांव के संतोष कुमार सिंह ने फोन पर बताया कि मैंने अब तक पचासों बार इस एप को डाउनलोड करने की कोशिश की है, लेकिन एप डाउनलोड ही नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि मेरे पड़ोसी आकाश सिंह, विनय सिंह, मोहित सिंह, आनंद राम आदि ने भी कोशिश की थी, लेकिन उनसे भी डाउनलोड नहीं हुआ। 

मुंबई में फंसे गिरिडीह जिले के ही सागर सिंह और रोहित सिंह ने भी फोन पर बताया कि उनका भी एप डाउनलोड नहीं हो रहा है।

झारखंड सरकार के द्वारा लांच किये गये ‘झारखंड कोरोना सहायता मोबाइल एप’ के डाउनलोड नहीं होने की बात आज ट्विटर पर भी छाया रहा, लेकिन अभी तक एप को सुविधाजनक नहीं बनाया जा सका है।

झारखंड में वैसे प्रवासी मजदूरों को आर्थिक मदद देने के लिए प्रत्येक विधायकों को भी 25 लाख खर्च करने की अनुमति दी गई है, जिन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला हो। लेकिन इसमें भी विधायकों को काफी परेशानी है। प्रवासी मजदूरों के लिए लगातार आवाज उठा रहे भाकपा (माले) लिबरेशन के बगोदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद सिंह का कहना है (17 अप्रैल को प्रभात खबर अखबार में प्रकाशित) कि बगोदर विधानसभा के काफी लोग बाहर कमाते हैं। झारखंड सरकार के अनुसार सिर्फ बगोदर के ही 22 हजार लोग बाहर हैं, अगर इसे ही सच माना जाय, तो 25 लाख रूपये में इतने लोगों को कैसे आर्थिक मदद दी जाय। फिर विधायक यह कैसे पता लगाएंगे कि किन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ मिला है या नहीं मिला है ? विनोद सिंह का कहना है कि विधायक फंड का पूरा पैसा प्रवासी मजदूरों के लिए ले लिया जाय।

विनोद सिंह ने ट्वीट कर ‘झारखंड कोरोना सहायता मोबाइल एप’ को सरल करने की मांग सरकार से की है ताकि कम पढ़े-लिखे मजदूर भी आसानी से इसे डाउनलोड कर अपनो सूचना अंकित कर सके।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अगर इस एप का यही हाल रहा, तो इसे लांच करने का कोई मतलब-मकसद नहीं रह जाता है। वैसे तो आज के समय में महज एक हजार की मदद ही ‘कोढ़ में खाज’ की तरह है, ऊपर से इस एप की जटिलता प्रवासी मजदूरों के साथ झारखंड सरकार का एक धोखा ही होगा।

(रूपेश कुमार सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल झारखंड के रामगढ़ में रहते हैं।)

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