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झारखंडः प्राकृतिक संपदा की अवैध लूट के खिलाफ गांव वालों ने किया जनता कफ्यू का एलान

झारखंड में पूर्वी सिंहभूमि जिला के आदिवासी बहुल गांव नाचोसाई के लोगों ने जनता कर्फ्यू का एलान किया है। वह इसके जरिए अवैध खनन कर रही कंपनियों से लड़ना चाहते हैं। अवैध खनन और प्राकृतिक संपदा की लूट के खिलाफ ग्रामवासियों का संघर्ष पिछले साल से जारी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से लेकर राष्ट्रपति तक से गुहार लगाई लेकिन उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिला। उलटे लूट कर रही कंपनियों के इशारे पर पुलिस-प्रशासन ने आंदोलन कर रहे लोगों को बुरी तरह पीटा भी था। यहां तक कि महिलाओं के कपड़े तक फाड़ दिए गए थे। आंदोलन में शामिल कई लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए गए। इसके बावजूद जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए गांव के लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

जमशेदपुर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पूर्वी सिंहभूमि जिला अंतर्गत पोटका प्रखंड का एक आदिवासी बहुल गांव है नाचोसाई। यह नदी, नाला, डुंगरी, पहाड़, जंगल की प्राकृतिक संपदा से भरा-पूरा है। यह गांव शांति से अपना इतिहास, अपनी संस्कृति, अपना धर्म जीता आ रहा है, लेकिन इस गांव पर लुटेरे ठेकेदारों, व्यापारियों की गिद्ध नजर जब से यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ी है, तब से इस गांव की शांति छिन गई है।

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ओम मेटल और लीडिंग कंस्ट्रक्शन के संचालकों ने चंद स्थानीय दलालों की मिलीभगत से कुछ गांव वालों को बहला-फुसला कर, सादा कागज पर उनके हस्ताक्षर करा लिए और इसके आधार पर फर्जी ग्रामसभा का कागज बनाकर खनन लीज पर ले लिया है। विडंबना यह है कि जहां लीज मिली है, वहां सदन गुटू और सुंड़ी डुंगरी (छोटा पहाड़) में किरपड़ सुसुन अखड़ा, मांग बुरू बोंगा एवं मसना स्थल (आदिवासियों का पूजा स्थल एवं श्मशान स्थल) है।

जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए इस गांव के आदिवासी लंबे समय से संघर्षशील हैं। उनमें अपने अस्तित्व और पहचान बचाने का जुझारूपन है। उनकी सामाजिक व्यवस्था में पारंपरिक ग्रामसभा शामिल है। इस तरह से इन लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए गांव की पारंपरिक ग्रामसभा की ओर से 2016 से ही ओम मेटल और लीडिंग कंस्ट्रक्शन के खिलाफ संघर्ष जारी है।

नाचोसाई की पारंपरिक ग्रामसभा इस लीज और खनन का शुरुआत से विरोध कर रही है। 12 जनवरी 2019 से ग्रामीणों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था। लीडिंग कंस्ट्रक्शन के इशारे पर ग्रामीणों पर प्रशासन की ओर से दमन बढ़ाया गया। गाली-गलौच मारपीट की गई। महिलाओं के कपड़े फाड़े गए। बच्चों, बूढ़ों, लड़कियों को भी नहीं छोड़ा गया। थाने में लाकर रखा गया। ग्रामसभा के सदस्यों पर अपराध की धाराएं लगाई गई। तब से प्रतिरोध जारी है।

इस बाबत अंचल कार्यालय, डीसी कार्यालय, सचिव, झारखंड सरकार, मुख्यमंत्री झारखंड, राज्यपाल झारखंड, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रपति तक को मेमोरेंडम दिया जा चुका है। 14 फरवरी 2020 को ग्रामसभा की ओर से जन सुनवाई भी की गई। इस जन सुनवाई में लीजधारी और प्रशासनिक अधिकारियों को भी बुलाया गया था। जन सुनवाई में खनन को गलत माना गया। सरकार को जन सुनवाई के फैसले की जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद ओम मेटल और लीडिंग कंस्ट्रक्शन का अवैध खनन नहीं रुका है। इसी महीने सितंबर 2020 में हाईकोर्ट रांची में जनहित याचिका भी दायर की गई है।

इस प्रतिरोध की कड़ी में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए ग्रामसभा ने ग्राम क्षेत्र में तीन दिनों का जनता कफ्यू लगाने का निर्णय किया है। 23 सितंबर को पूर्वी सिंहभूमि के पोटका प्रखंड के 12 गांवों के ग्राम प्रधानों और विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने पोटका अंचल के प्रांगण में एक प्रेस वार्ता करके बताया कि 25 सितंबर से लेकर 27 सितंबर तक पोटका प्रखंड में जनता कर्फ्यू लागू रहेगा। इसमें क्षेत्र के तमाम ग्राम प्रधानों और विभिन्न संगठनों के नेता और आमजन इस संघर्ष में हिस्सा लेंगे।

प्रेस से बात करते हुए गोपाल सरदार ने कहा, ”हमने अंचल कार्यालय से लेकर झारखंड सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रपति तक से इस अवैध खनन को रोकने की मांग की है। ग्राम सभा की ओर से लीजधारी और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जन सुनवाई भी की गई है। जन सुनवाई में खनन को गलत माना गया। बावजूद इसके कंपनियों का अवैध खनन नहीं रुका है। न ही सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस निर्णय लिया गया है, इसलिए पारंपरिक ग्राम सभा नाचोसाई के तरफ से 25 सितंबर से 27 सितंबर तक तीन दिवसीय जनता कर्फ्यू लागू होगा और इस बीच किसी का भी बिना ग्राम प्रधान के आदेश से क्षेत्र में प्रवेश वर्जित रहेगा।”

नाचोसाई के ग्राम प्रधान रामकृष्णा सरदार ने कहा, ”ग्राम सभा इस लीज और खनन का शुरू से विरोध कर रही है। 12 जनवरी 2019 को ग्रामीणों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर प्रशासन की ओर से जो दमनात्मक कार्यवाई हुई, तभी से हमारा विरोध जारी है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक सदन गुटू और सुंडी डुंगरी में किरपड़ सुसुन अखड़ा, मांग बुरू बेंगा, मसना का स्थल अवैध खनन से मुक्त नहीं हो जाता।
(विशद कुमार झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

This post was last modified on September 24, 2020 4:48 pm

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