झारंखड: जमीन लूट के खिलाफ गोलबंद हुए आदिवासी, मानव श्रृंखला बना कर किया विरोध

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जंगल आंदोलन के नेता शहीद देबेन्द्र मांझी के शहादत दिवस 14 अक्तूबर को मानव श्रृंखला बनाई गई। झारखंड जनतांत्रिक महासभा के आह्वान पर जमीन संबंधी मामलों में गड़बड़ियों और उसके सुधार के लिए झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला के सभी 12 अंचल कार्यालयों करनडीह, मानगो, पटमदा, बोड़ाम, पोटका, मुसाबनी, बहरागोड़ा, चाकुलिया, धालभूमगढ़, डुमुरिया, घाटशिला एवं गुड़ाबांधा में इसका आयोजन किया कया। प्रदर्शनकारियों ने इसके जरिए जमीन लूट के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर पिछली भाजपा सरकार की नीतियों को दुरुस्त करने की भी मांग उठाई।

वक्ताओं ने बताया कि रघुवर सरकार के समय जमीन के कागजातों को ऑनलाइन किया गया। इसमें कई गड़बड़ियां हैं,  जिसे सुधरवाने के लिए राज्य की लाखों जनता सीओ ऑफिस का चक्कर लगा-लगा कर बेहाल है। ऐसे में राज्य की वर्तमान हेमंत सरकार को ऑनलाइन संबंधी इन सारी गड़बड़ियों को सुधारने के लिए जल्द से जल्द पहलकदमी करना चाहिए, जिससे झारखंडी जनता राहत महसूस कर सके। इस मानव श्रृंखला कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम से सभी 12 अंचल कार्यालयों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।

इसमें मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा गया है, पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों एवं झारखंड जनतांत्रिक महासभा अति महत्वपूर्ण विषय पर आपका ध्यान आकर्षण करने के लिए यह स्मरण पत्र समर्पित करती है। आप ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत हैं कि झारखंडी राजा-महाराजाओं एवं ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जल, जंगल और जमीन की लूट एवं दमन के खिलाफ लड़ते रहे हैं। जरूरत पड़ी तो अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटे हैं। हमारे पूर्वजों के बलिदान एवं संघर्ष का परिणाम ही था कि ब्रिटिश सरकार को मजबूरन शेड्यूल जिला अधिनियम 1874 पारित करना पड़ा था।

आगे चलकर या अधिनियम भारत के संविधान में पांचवी अनुसूची के रूप में अंगीकृत किया गया। इसके अनुच्छेद 244 (5) (2) (A) के द्वारा राज्यपाल को संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में शांति एवं सुशासन के लिए अधिसूचना के माध्यम से आदिवासियों की जमीन हस्तांतरण को विनियमित कर प्रतिबंध कराने का संवैधानिक अधिकार है।

बिरसा मुंडा की अगुवाई में आदिवासियों एवं मूलवासियों ने उलगुलान के दम पर ब्रिटिश सरकार को छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 को पारित करने को मजबूर किया था। 1837 में कैप्टन विलकिंग्सन ने कोल्हान क्षेत्र के नागरिक न्याय सिविल जस्टिस प्रशासन के लिए विलकिंग्सन रूल बनाकर आदिवासी सामुदायों के लिए पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मान्यता दी।

तत्कालीन बिहार सरकार में आदिवासियों की जमीन लूटी जा रही थी, तब बिरसा सेवादल के बैनर तले रांची जिला एवं जमशेदपुर पूर्वी सिंहभूम में जोरदार आंदोलन हुआ, जिसके कारण बिहार सरकार को आदिवासियों की जमीन के अवैध हस्तांतरण को रोकने एवं त्वरित न्याय दिलाने के लिए शेड्यूल एरिया रेगुलेशन कोर्ट गठित करना पड़ा, परंतु सरकार ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 की धारा 46 के प्रावधानों को ताख पर रख कर मुआवजा का प्रावधान कर दिया।

झारखंड जनतांत्रिक महासभा अपने लड़ाका पूर्वजों के बलिदान एवं संघर्ष को स्मरण करते हुए कोल्हान कमिश्नरी के पूर्वी सिंहभूम जिला के सभी 12 अंचलों पर कार्यालयों के समक्ष छोटनागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 के प्रावधानों का उल्लंघन कर अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अवैध जमीन, अवैध हस्तांतरण को रोकने के लिए एवं धारा 71 के प्रावधान के अनुसार अदालत द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार जितने भी मूल रैयत हैं, की जमीन वापसी अविलंब हो, इसके लिए महासभा कृत संकल्प एवं संघर्षरत है।

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम,1908 एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 एवं अन्य भूमि संबंधी अधिनियमों के सख़्ती से लागू होने से आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन की लूट नहीं होगी, इसलिए जमीन का अवैध हस्तांतरण के यथाशीघ्र रोकथाम के लिए झारखंड जनतांत्रिक महासभा निम्नलिखित मांग करती है,
● झारखंड सरकार छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के प्रावधानों का उल्लंघन कर गैरकानूनी तरीके से हड़पी गई जमीनों का हस्तांतरण को रोकने के लिए राज्य स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए।
● छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 को सख्ती से लागू करवाने के लिए एक स्थायी प्राधिकरण का गठन हो तथा एक विशेष पुलिस फोर्स गठित हो, ताकि भू-वापसी सुनिश्चित हो।
● जमीन संबंधी ऑनलाइन गड़बड़ियों का कैंप लगाकर जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए।
● टाटा कंपनी के द्वारा रैयतों से औद्योगिक इस्तेमाल के लिए ली गई जमीनों का औद्योगिक इस्तेमाल न कर सबलीज में दिया जाने का हमलोग विरोध करते हैं। साथ ही मांग करते हैं कि औद्योगिक इस्तेमाल में न आने वाली जमीनों को मूल रैयतों को वापस किया जाए।
● छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 एवं 1949 एवं झारखंड लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम 1956 के उल्लंघन कर अवैध हस्तांतरण एवं अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को चिन्हित कर श्वेत पत्र जारी किया जाए एवं दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
● झारखंड बिहार शेड्यूल एरिया रेगुलेशन 1969 के तहत जिला के उपायुक्त को नैतिक एवं वैधानिक जिम्मेदारी है कि जमीन की अवैध हस्तांतरण (लीज बिक्री, बंधक, इकरारनामा, संविदा एवं दान) रोकें।
● झारखंड सरकार द्वारा 2016 जमीन की खतौनियों की ऑनलाइन डाटा बेस में हेराफेरी एवं गड़बड़ियों को अंचल अधिकारी पंचायत या गांव में कैंप लगाकर जल्द से जल्द दुरुस्त करें।

बता दें कि मांग पत्र देते हुए विभिन्न ग्राम सभा, झारखंड जनाधिकार मंच, झारखण्ड ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर सोशल हार्मोनी, जागो संगठन, एसटी-एससी वेलफ़ेयर समिति, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी, अंबेडकर विचार मंच, बिरसा सेना, भीम आर्मी ने हेमंत सरकार से उपर्युक्त मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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