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Wednesday, September 29, 2021

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जज हत्या कांड: नार्को और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए मांगी गयी इजाजत

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झारखंड धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की संदिग्ध हत्या कांड में जांच की रफ्तार बढ़ रही है। पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में आवेदन देकर ऑटो चालक राहुल वर्मा एवं उसके सहयोगी लखन वर्मा का नार्को और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए इजाजत मांगी है। पुलिस तीन तरह की जांच कराना चाहती है। इस घटना में संदिग्ध आरोपी ऑटो चालक और उसके सहयोगी को जेल भेज दिया गया है।

बता दें कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश (अष्टम) उत्तम आनंद की मौत के मामले में गिरफ्तार ऑटो चालक राहुल वर्मा एवं लखन वर्मा का ब्रेन मैपिंग, नार्को और साइकोलॉजिकल टेस्ट कराया जायेगा। 02 जुलाई को पुलिस ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में आवेदन देकर तीन तरह की जांच के लिए इजाजत मांगी है। अदालत ने इस पर पुलिस को कहा कि वह जांच करने वाले संस्थान से तिथि और समय ले कर आये। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जायेगी। इधर 02 जुलाई की शाम को पुलिस ने रिमांड अवधि पूरी होने पर दोनों अभियुक्तों को सीजेएम के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद मंडल कारागार भेज दिया गया। इस बीच 03 जुलाई को इस मामले की हाइकोर्ट में सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में सुनवाई के लिए यह मामला सूचीबद्ध है।

धनबाद के प्रधान जिला जज की रिपोर्ट पर हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था। साथ ही जांच की प्रगति रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफआईआर की प्रति सीलबंद लिफाफे में मांगी थी। अदालत ने 2020 के बाद हुए अपराध का ब्यौरा भी मांगा था। इधर एसआईटी के प्रमुख एडीजी संजय आनंद लाटकर ने जोड़ापोखर में आरोपियों के परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और धनबाद रेलवे स्टेशन का भी निरीक्षण किया, जहां आरोपियों ने शराब पी थी।

ब्रेन मैपिंग ( Brain Mapping Test) और नार्को टेस्ट ( Narco Test) की अनुमति के बाबत आवेदन पर अदालत ने पुलिस से पूछा कि किस तिथि को दोनों का टेस्ट कराना चाहते हैं ? पहले संबंधित संस्थान से तिथि निर्धारित करवा लें, इसके बाद इसकी अनुमति मांगें। पुलिस ने बताया कि गुजरात के गांधीनगर लैब से ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराया जायेगा। अभियुक्तों ने भी कहा कि उन्होंने नशे की हालत में घटना की है। वे किसी भी जांच को तैयार हैं।

बता दें कि नार्को टेस्ट किसी व्यक्ति से सही जानकारी प्राप्त करने के लिए कराया जाता है। यह एक फोरेंसिक परीक्षण होता है। पुलिस आरोपियों का नार्को टेस्ट अदालत के आदेश के बाद विशेषज्ञों से करवाती है। अधिकांश मामलों में देखा गया है कि आरोपी नार्को टेस्ट में सही जानकारी देता है। लेकिन कुछ संभावना रहती है कि वह नार्को टेस्ट के दौरान पूरी सच न बोले।

नार्को टेस्ट के दौरान संबंधित शख्स को उसकी आयु, लिंग, स्वास्थ्य और शारीरिक परिस्स्थतियों के अनुसार इंजेक्शन के सहारे विशेषज्ञों द्वारा कुछ दवाएं दी जाती हैं। इससे उत्तर देने के समय वह व्यक्ति पूरी तरह से होश में नहीं होता है, इससे वह प्रश्नों के सही उत्तर देता है। क्योंकि उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह उत्तर घुमा-फिरा कर दे सके।

ब्रेन मैपिंग टेस्ट में अभियुक्त के मस्तिष्क की हलचलों की छवियों से उसके दोषी होने का पता लगाया जाता है। इसमें अभियुक्त को कई सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लैस एक हेलमेटनुमा यंत्र पहनाया जाता है, जो कंप्यूटर से जुड़ा होता है। जांच के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञ आरोपी को अपराध से जुड़ी वस्तुओं के चित्र दिखाते या कुछ ध्वनियां सुनाते हैं और उन पर आरोपी के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया का निरीक्षण करते हैं। सेंसर मस्तिष्क की गतिविधियों को मॉनिटर करता है और पी 300 तरंगों को अंकित करता है। ये तरंगे तभी पैदा होती हैं, जब आरोपी का उन चित्रों और ध्वनियों से कोई संबंध होता है। निर्दोष आरोपी अपराध से जुड़ी ध्वनियों और चित्रों को पहचान नहीं पाते, जबकि दोषी उन्हें पहचान लेते हैं।

धनबाद सिविल कोर्ट के जज उत्तम आनंद के मौत की सीबीआई जांच की अनुशंसा मुख्यमंत्री ने 31 जुलाई (शनिवार) को की थी। 02 जुलाई को गृह विभाग ने रजिस्टर्ड डाक से सीबीआई जांच का अनुशंसा संबंधी पत्र, धनबाद में दर्ज एफआईआर की कॉपी और जांच की प्रगति संबंधी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है। आगे इस मामले में अनुशंसा पर केंद्र के स्तर पर निर्णय होगा कि मामला सीबीआई जांच के लिए दिया जाये या नहीं। फिलहाल झारखंड पुलिस की एसआईटी मामले की जांच कर रही है।

जैसे-जैसे एडीजे उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत पर जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नये-नये खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच के क्रम में अब एक नये खुलासे में पता चला है कि एडीजे उत्तम आनंद को ऑटो से टक्कर लगने के बाद वे जिंदा थे, तीन युवक उन्हें घायल अवस्था में सदर अस्पताल ले गए थे। लेकिन वहां डॉक्टरों ने भर्ती लेने से इनकार कर दिया था। यह खुलासा अस्पताल ले जाने वाले युवक अभय साव ने पुलिस के सामने किया है।

धनसार की नई दिल्ली कॉलोनी निवासी अभय ने पुलिस को बताया कि वह दोस्तों के साथ रोज गोल्फ ग्राउंड में व्यायाम करने जाता है। 28 जुलाई की सुबह भी तीन दोस्तों के साथ वहां जा रहा था। रणधीर वर्मा चौक के पास देखा कि ऑटो एक व्यक्ति को टक्कर मारकर भाग गया। हम लोग उन्हें उठाकर जब सदर अस्पताल ले गए तो वहां उन्हें भर्ती लेने से इनकार कर दिया गया।

वहीं सदर अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. राजकुमार सिंह ने अभय साव के बयान को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि घायल जज को सदर अस्पताल लाए जाने की बात झूठी है। अस्पताल के पास उस दिन का सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, जिसमें देखा जा सकता है कि कोई उन्हें यहां नहीं लाया था। अस्पताल के अंदर का ही नहीं, सड़क तक का फुटेज उनके पास है। 

दूसरी तरफ जज की मौत मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ऑटो से जज को टक्कर मारने वाले सीसीटीवी फुटेज को वायरल करने के आरोप में एसएसपी संजीव कुमार ने धनबाद सदर थाना के पीएसआई (प्रशिक्षु दारोगा) आदर्श कुमार को सस्पेंड कर दिया है। वहीं जिस ऑटो से जज को टक्कर मारी गई, उसकी चोरी की एफआईआर दर्ज करने में देरी के आरोप में पाथरडीह थानेदार उमेश मांझी को भी निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई के तहत धनबाद जिले के विभिन्न थानों से 31जुलाई की रात को करीब 80 दागियों को पूछताछ के लिए उठाया। इनमें वे लोग हैं, जो ऑटो चोरी करने, नशा करने आदि में शामिल रहे हैं और उनके खिलाफ पहले भी कोई केस दर्ज हुआ है। इनसे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सवाल कर रहे हैं, ताकि जज की मौत मामले में कुछ सुराग मिल सके। इनमें से कई दागियों को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ भी दिया है।

न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 31 जुलाई की रात से विभिन्न स्थानों पर 53 होटलों की तलाशी ली। साथ ही धनबाद एडीजे उत्तम आनंद की हत्या मामले की जांच में पुलिस ने तेजी लायी है। इसे लेकर पुलिस ने पूरे धनबाद में व्यापक पैमाने पर विशेष अभियान चलाया। धनबाद एसएसपी संजीव कुमार के निर्देश पर चलाए गए इन अभियान के दौरान देर रात तक सड़क में बिना कारण घूमने वाले लोगों को पकड़ा गया। जिले के कुल 56 थाना और ओपी से कुल 243 लोगों को हिरासत में लिया गया। सभी से देर रात घूमने का कारण पूछा गया। इस दौरान 17 ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार किया गया जिन पर अलग-अलग थाना में मामले दर्ज हैं। उन्हें जेल भेज दिया गया जबकि 226 लोगों को छोड़ दिया गया। इसके अलावा रविवार को विभिन्न अनियमितता में 250 से अधिक ऑटो जब्त किये गये।

एसआईटी ने 01अगस्त को धनबाद सर्किट हाउस में एडीजी (संचालन) संजय आनंद लाटकर की अध्यक्षता में मैराथन बैठकें कीं। उन्होंने क्राइम स्पॉट का भी दौरा किया और सुराग पाने के लिए सीन रिक्रिएट करने की कोशिश की।

बता दें कि जस्टिस उत्तम आनंद की हत्या के 4 दिन बीत गए हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी ठोस फैसले पर नहीं पहुंच पाई है।

राज्य की सभी जांच एंजेसियां इस मौत के रहस्य को सुलझाने में जुटी हुई हैं। गौरतलब है कि उत्तम आनंद ने पिछले महीने ताकतवर गैंगस्टरों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके अलावा वो यौन उत्पीड़न के मामले, छात्रवृत्ति राशि का कथित रूप से हेराफेरी और फर्जी लॉटरी टिकटों की बिक्री मामले की सुनवाई की थी। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जिसने भी हमले की साजिश रची है वह जज की दिनचर्या के बारे में सब कुछ जानता था।

उल्लेखनीय है कि 28 जुलाई को धनबाद में मार्निंग वॉक के दौरान जज उत्तम आनंद को ऑटो ने कुचल दिया था, गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस घटना को जिस तरह अंजाम दिया गया है उसे साजिश बताया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि जज उत्तम आनंद सड़क किनारे धीरे-धीरे दौड़ लगा रहे हैं और पीछे से तेज रफ्तार एक ऑटो सड़क पर सीधा चल रहा है और जज के नजदीक आकर वह अपनी दिशा बदल देता है और जज को रौंदते हुए आगे निकल जाता है।

(झारखण्ड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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