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किसानों के ‘भारत बंद’ से एक दिन पहले ‘आतंकवाद की एंट्री’

कृषि कानून के मुद्दे पर पिछले 12 दिन से दिल्ली की सीमा पर डेरा डाल कर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। लेकिन भारत बंद से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की अधीनस्थ दिल्ली पुलिस ने मामले में नया ट्विस्ट ला दिया है। आज सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दावा किया कि उसने शकरपुर में एक एनकाउंटर के बाद 5 आतंकवादी पकड़े हैं। इन आतंकियों के निशाने पर कई नेता थे। इसमें से तीन कश्मीर के और 2 पंजाब के हैं। दिल्ली पुलिस का ये भी कहना है कि तीन आंतकी हिजबुल के सदस्य हैं। साथ ही ये भी कि इन लोगों के पीछे आईएसआई का हाथ है। दिल्ली पुलिस ने इनके पास से 2 किलो ड्रग्स, तीन पिस्टल और 1 लाख नगदी बरामद होना दिखाया है।

 इस बाबत डीसीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुशवाहा का कहना है कि –“नार्को टेर्ररिज्म के लिए इस समूह को आईएसआई का समर्थन हासिल था।”

गिरफ्तार किए गए दोनों पंजाबियों में एक का नाम गुरजीत सिंह (19 वर्ष) और दूसरे का सुखदीप सिंह बताया जा रहा है। यह दोनों पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले बताए जाते हैं। बताया जा रहा है कि गुरजीत और सुखदीप ने शौर्य चक्र विजेता बलविंदर संधू कि 16 अक्तूबर, 2020 को पंजाब में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इन लोगों का संबंध पंजाब के गैंगस्टर सुख भिखारिवाल से भी बताया जाता है। दोनों ने कश्मीर के तीन लोगों से ड्रग कंसाइनमेंट लिया था। अभी तक की पूछताछ के आधार पर पता चला है कि इन लोगों के पीछे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित एक बड़ा नार्कोटिक ग्रुप काम कर रहा है।

किसान विरोधी मीडिया का खेल शुरू

किसान आंदोलन को बिल्कुल शुरु से ही बेपटरी करने में जुटी मेनस्ट्रीम मीडिया का किसान आंदोलन में बायकाट किया जा रहा है। किसान और किसान संगठन के नेता मेनस्ट्रीम मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं। आज तक चैनल के दो रिपोर्टरों की हूटिंग के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। लेकिन इस किसान आंदोलन को बेपटरी करने का जो मसाला मीडिया को चाहिए था वो दिल्ली पुलिस ने मुहैया करवा दिया है। सारे न्यूज चैनलों पर मोटी-मोटी हेडलाइन चल रही है- “पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये आतंकी बड़े आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।”

“आतंकी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने वाले थे, जिसे अब नाकाम कर दिया गया है।”

दिल्ली पुलिस करेगी पूछताछ, दिल्ली में मौजूद इन आतंकियों के अन्य साथियों के बारे में पता लगाया जाएगा। ”

“इनके खालिस्तानी आतंकियों के साथ कनेक्शन की भी की जा रही है जांच।”

दिल्ली पुलिस द्वारा जिन पांच आतंकियों को पकड़ने का दावा किया गया है उसमें से तीन कश्मीर और 2 पंजाब के बताए जा रहे हैं। यानि आंतकवाद के तार कश्मीर और पंजाब के बीच जोड़ा जाएगा। साथ ही दो समुदायों के बीच भी। पिछले कई आंदोलनों में जैसे कि सीएए-एनआरसी, और धारा 370 पर सिख समुदाय-मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ा हुआ है। वहीं किसानों के इस आंदोलन में शाहीन बाग़ आंदोलन का चेहरा बिल्किस बानो ने भी किसान आंदोलन का समर्थन देने सिंघु बॉर्डर पहुंची थीं जहां से उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था।

नार्को-टेर्ररिज्म और किसान आंदोलन की फंडिंग

पांचों आतंकियों को नार्को-टेररिज्म में गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 2 किलो ड्रग्स और 1 लाख नगदी की बरामदगी दिखाई गई है।

वहीं इससे पहले लगातार किसान आंदोलन की फंडिंग को लेकर भी सत्ता पक्ष द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं। क्या नार्को-टेर्ररिज्म में इस सवाल का जवाब मैनिपुलेट किया जाएगा। इसका जवाब तो आने वाले कुछ दिनों में ही मिलेगा।

बता दें कि बिहार चुनाव के बाद बिहार की जमीन से उखाड़ दिये गए बाजपा नेता सुशील मोदी ने किसान आंदोलन पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगाकर आंदोलन की छवि को नुकसान पहुंचाने की भरसक कोशिश की थी। सुशील मोदी ने कहा था- “किसान आंदोलन को भारत-विरोध की गलत दिशा में ले जाने के लिए विदेशी फंडिंग से चलने वाले लगभग 100 छोटे-बड़े संगठनों की संलिप्तता पूरे देश के लिए चिंता का विषय है।”    

इस तरह देखें तो अपने इस अभियान से दिल्ली पुलिस ने खट्टर के खालिस्तानी समर्थक आंदोलन और सुशील मोदी के ‘फंडिंग’ के सवाल को हल करने की कोशिश की है।

खट्टर का ‘ खालिस्तानी’ बयान और दो पंजाबी आतंकियों की गिरफ्तारी

दिल्ली में पिछले 15 दिनों से किसानों का प्रदर्शन जारी है। कहा जा रहा है कि किसानों के इस आंदोलन पर खुफिया एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं। इसी दौरान खुफिया एजेंसियों को लगातार दिल्ली में आतंकियों के एक्टिव होने की जानकारी मिल रही थी। जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है।

कुल मिलाकर बहुत रणनीतिक विसात बिछाई गई है। क्योंकि किसान आंदोलन में ज़्यादातर किसान पंजाब से हैं। या यूं कहें कि पंजाब के किसानों ने ही आंदोलन की शुरुआत किया। आंदोलन के बिल्कुल शुरुआत से ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और भाजपा के तमाम नेता किसान आंदोलन को खालिस्तान समर्थक करार देते आये हैं। गोदी मीडिया बहुत कोशिशों के बाद भी ये साबित नहीं कर पाई थी तो जिम्मेदारी दी गई दिल्ली पुलिस को। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के कथित दंगों में किस तरह से पीड़ित समुदाय को ही साजिशकर्ता बनाकर असली साजिशकर्ताओं को बाईपास कर दिया ये किसी से नहीं छुपा।

अतः पीड़ित किसानों के आंदोलन को अब खालिस्तान के समर्थन और फॉरेन फंडिंग से चलाए जाने का एक नैरेटिव सेट करके पहले इस आंदोलन को मिलने वाले जनसमर्थन को खत्म किया जाएगा और फिर इस आंदोलन का दमन किया जा सकता है।

5 दिसंबर को विज्ञान भवन में मीटिंग के दौरान ही कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसान संगठन के नेताओं से कहा था कि वो आंदोलन स्थल से स्त्रियों और बच्चों को हटाएं।

हाथरस केस आंदोलन को भी ऐसे ही खत्म किया गया था

हाथरस में दलित लड़की के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले में यूपी पुलिस और सरकार की संदिग्ध भूमिका के खिलाफ़ आंदोलन को ऐसे ही खत्म किया गया था। उसमें एक पत्रकार समेत चार लोगों को पीएफआई सदस्य बताकर गिरफ्तार किया गया था। और हिंसा फैलाने की साजिश में जेल भेजकर तमाम आंदोलनकारियों में भय पैदा करके आंदोलन को खत्म कर दिया गया था। उस केस में भी हिंसा फैलाने की साजिश रचने और उसकी फंडिंग का प्रोपागैंडा रचा गया था। इससे पहले दिल्ली दंगों में भी फंडिंग का एंगल मैनिपुलेट किया गया था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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This post was last modified on December 7, 2020 5:50 pm

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