Monday, October 25, 2021

Add News

पर्सनल लिबर्टी पर जस्टिस चंद्रचूड़ का फैसला बना नजीर, कर्नाटक हाई कोर्ट ने दी टीवी चैनल के एमडी को जमानत

ज़रूर पढ़े

पर्सनल लिबर्टी (निजी स्वतंत्रता) पर उच्चतम न्यायालय के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ एवं जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ के फैसले का असर उच्च न्यायालयों पर दिखना शुरू हो गया है। अर्णब गोस्वामी की अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा था कि हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक ऐसे मामले हैं, जिसमें हाई कोर्ट जमानत नहीं दे रहे हैं और वे लोगों की स्वतंत्रता, निजी स्वतंत्रता की रक्षा करने में नाकाम हो रहे हैं। पीठ ने पर्सनल लिबर्टी को अत्यधिक महत्व देते हुए कहा था कि इस तरह से किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी पर बंदिश लगाया जाना न्याय का मखौल होगा, क्योंकि निजी स्वतंत्रता की रक्षा न्यायालय का कर्तव्य है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ एवं जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ के नक्शेकदम पर चलते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने राकेश शेट्टी, मैनेजिंग डायरेक्टर और संपादक, पावर टीवी को जबरन वसूली के मामले में अग्रिम जमानत देते हुए अर्णब गोस्वामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हवाला दिया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की एक सीरीज़ चलाने के बाद शेट्टी के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस ने जबरन वसूली का मामला दर्ज किया था। मामले में अग्रिम जमानत की याचिका की अनुमति देते हुए, ज‌स्टिस बीए पाटिल की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्णब गोस्वामी की रिहाई के आदेश के तहत निजी स्वतंत्रता पर की गई टिप्पणियों का हवाला दिया।

जमानत आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह किसी नागरिक की निजी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग उचित तरीके से करे। यदि न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करते हैं, तो हम विनाश के मार्ग पर बढ़ जाएंगे। कानून की यह व्यख्या उच्चतम न्यायालय द्वारा अर्णब मनोरंजन गोस्वामी बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य के मामले में हाल ही में निर्धारित किया गया है।

हाई कोर्ट ने यह कहा कि सीआरपीसी की धारा 438 में निहित अग्रिम जमानत के प्रावधानों की संकल्पना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत की गई है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है और इसकी एक उदार व्याख्या की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि कि अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देते समय, ज‌स्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मौखिक रूप से निराशा व्यक्त की थी कि हाई कोर्ट जमानत याचिका पर उचित तरीके से विचार नहीं कर रहे हैं। हाई कोर्टों के लिए एक संदेश होना चाहिए, कृपया न‌िजी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करें। हम मामला-दर-मामला देख रहे हैं। न्यायालय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने में विफल हो रहे हैं। ज‌स्टिस चंद्रचूड़ ने गोस्वामी के मामले की सुनवाई के दौरान 11 नवंबर को मौखिक टिप्पणी की थी।

उन्होंने कहा था कि अगर हम एक संवैधानिक अदालत के रूप में कानून का निर्धारण नहीं करते हैं और स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करते हैं तो कौन करेगा? सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने गोस्वामी की रिहाई के लिए आदेश पारित किया था। अर्णब को महाराष्ट्र पुलिस ने 4 नवंबर को गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह बाद में एक विस्तृत फैसला सुनाएगी।

राकेश शेट्टी के चैनल ने बेंगलुरु प्राधिकरण के एक वर्क टेंडर को देने में मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कई रिपोर्टों का प्रसारण किया था। ‌रिपोर्ट्स रामलिंगम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के एक निदेशक चंद्रकांत रामलिंगम द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित थीं। बाद में रामलिंगम ने बंगलुरू पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें शेट्टी द्वारा आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया था।

जमानत देते हुए, हाई कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता के पिछले जीवन पर भी विचार किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि यह सही है कि जमानत की अर्जी पर विचार करते समय अभियुक्तों की आत्मकथा और पूर्व जीवन को अवश्य देखा जाना चाहिए। अदालत को शिकायतकर्ता और अभियुक्त के मामले के तथ्यों को एक पैमाने पर रखना होगा और सच्चाई का पता लगाने के लिए तौलना होगा। शिकायतकर्ता जो न्यायालय के समक्ष है, वह भी साफ-सुथरा नहीं आया है और ऐसा प्रतीत होता है कि सब ठीक नहीं है। इस आलोक में कोर्ट  इस विचार का पक्षधर है कि सत्य का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हाई कोर्ट ने कहा कि कड़ी शर्तों पर जमानत दी जा सकती है। अदालत ने अभियुक्त को जांच में सहयोग करने और दो लाख रुपये का बांड दाखिल करने के आदेश दिए।

इससे पहले, हाई कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने के लिए उसकी रिट याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने सिटी क्राइम ब्रांच को निर्देश दिया था कि वह शेट्टी को उसके सोशल मीडिया अकाउंट, यूट्यूब और फेसबुक एक्सेस करने के लिए दे। न्यायालय ने शेट्टी को सीसीबी द्वारा जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, लैपटॉप और हार्ड डिस्क की वापसी की मांग करने की अनुमति भी दी थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

तो पंजाब में कांग्रेस को ‘स्थाई ग्रहण’ लग गया है?

पंजाब के सियासी गलियारों में शिद्दत से पूछा जा रहा है कि आखिर इस सूबे में कांग्रेस को कौन-सा...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -