Sunday, October 17, 2021

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देश भर में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने ली एकता और संविधान बचाने की शपथ

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वाम दलों के संयुक्त आह्वान पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर संविधान की रक्षा और देश की आजादी को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। सीपीआई, सीपीएम और भाकपा माले के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने  संकल्प लिया। जगह-जगह झंडोतोलन किया गया।

पटना में भाकपा-माले विधायक दल कार्यालय में पार्टी के पूर्व राज्य सचिव कॉ. पवन शर्मा ने झंडोतोलन किया। राज्य कमेटी सदस्य उमेश सिंह, संतोष झा, प्रकाश कुमार आदि मौजूद रहे। झंडोतोलन के बाद माले नेताओं ने कहा कि बड़ी कुर्बानियों के बाद हमने आजादी हासिल की है, लेकिन हम देख रहे हैं कि देश की आजादी और संविधान को भाजपा-आरएसएस लगातार कमजोर कर रही है। अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला किया जा रहा है और देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को भाजपा ने कुचल दिया है। ऐसे लोगों से देश की आजादी की रक्षा करना हर देशभक्त नागरिक का कर्तव्य है।

राज्य कार्यलय में सरोज चौबे ने संकल्प दिवस का कार्यक्रम अयोजित किया। पटना में जगह-जगह संकल्प लिए गए और झंडा फहराया गया। आरा के क्रांति पार्क में माले विधायक सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में झंडोतोलन किया गया।

अपने संकल्प में भाकपा-माले ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई केंद्रित करने और आम लोगों को राहत पहुंचाने के बजाय RSS के नेतृत्व वाली भाजपा की केंद्र सरकार आक्रामक रूप से भारतीय संविधान के सिद्धांतों को कमजोर कर रही है। यह देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करने और मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने से जुड़ा हुआ है।

हरेक संवैधानिक संस्था आज सरकार के निशाने पर है और उसकी स्वयात्तता कमजोर की जा रही है। संसद, न्यायालय, चुनाव आयोग से लेकर CBI, ED आदि तमाम संस्थाओं की स्वायत्तता पर हमला किया जा रहा है। लोकत्रांतिक और नागरिक अधिकारों पर हमले हो रहे हैं। सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ विरोध की हर आवाज को ‘एंटी नेशनल’ करार दिया जा रहा है। जनता, एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवी समुदाय को UAPA और राजद्रोह जैसे काले कानूनों के तहत फंसाया जा रहा है।

सारी सत्ता केंद्र सरकार के हाथों संकेंद्रित करने के प्रयास हो रहे हैं, जो संघवाद और देश के संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। इन स्थितियों में यह जरूरी है कि देश की जनता संविधान की रक्षा और इसके तहत आने वाले जनाधिकारों की गारंटी के लिए एकजुट हो और इस प्रकार देश की आजादी को मजबूती प्रदान करे।

छत्तीसगढ़ में भी तीनों वामपंथी पार्टियों, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा और भाकपा (माले) लिबरेशन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने देश की एकता, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने की और संविधान तथा देश के संघीय ढांचे को बचाने के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने की शपथ ली।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के छत्तीसगढ़ राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि आरएसएस के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार जिन जन विरोधी और कॉरपोरेट परस्त नीतियों को लागू कर रही है, उसके कारण आम जनता में जबरदस्त असंतोष है। इस असंतोष को दबाने के लिए वह जिन फासीवादी और तानाशाहीपूर्ण तरीकों का उपयोग कर रही है, उसके कारण देश की एकता और संविधान खतरे में पड़ गया है।

उन्होंने कहा कि आज भाजपा सरकार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करने के साथ ही संविधान के बुनियादी मूल्यों, देश के संघीय ढांचे, धर्मनिरपेक्षता और आम जनता के लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों पर ही बड़े पैमाने पर हमले कर रही है। पूरे प्रदेश में वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने आज इस हमले का मुकाबला करने की शपथ लेते हुए आम जनता को लामबंद करने का संकल्प व्यक्त किया।

विभिन्न जगहों पर हुए शपथ ग्रहण कार्यक्रमों में वाम कार्यकर्ता लाल झंडे के साथ ही तिरंगा झंडा भी लिए हुए थे। इन कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए माकपा नेताओं ने इस बात की आलोचना की कि सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ किसी भी असंतोष को ‘राष्ट्र विरोधी’ करार दिया जा रहा है और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को यूएपीए और राष्ट्रद्रोह जैसे काले कानूनों के तहत गिरफ्तार करके जेल भेजा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संसद, न्यायपालिका, चुनाव आयोग, सीबीआई समेत देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर जिस तरह हमला किया जा रहा है और केंद्र सरकार जिस तरह अपने हाथों में शक्तियों का केंद्रीकरण कर रही है, वह संविधान में उल्लेखित देश के संघीय ढांचे के ही खिलाफ है।

वाम नेताओं का आरोप है कि कॉरपोरेट के हितों को आगे बढ़ाने के लिए आज भाजपा संविधान को दरकिनार और निष्प्रभावी कर रही है और समता पर आधारित एक आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टि संपन्न समाज निर्माण की जगह मनु आधारित हिंदू वर्णवादी व्यवस्था को लागू करना चाहती है। उसकी यह मुहिम हमारे देश के संविधान में निहित समता, भाईचारे, सामाजिक-आर्थिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के ही खिलाफ है। इसलिए केंद्र सरकार की कॉरपोरेट परस्ती, संविधान को दफ्न करने की उसकी कोशिशों और नागरिक अधिकारों और उसकी आजीविका पर हो रहे हमलों के खिलाफ आम जनता को संगठित करने की शपथ वाम कार्यकर्ताओं ने आज ली है।

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