Sunday, October 17, 2021

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नागरिकता बिल की वजह से पंजाब के कारोबार को करोड़ों का नुकसान

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नागरिकता कानून के विरोध में असम धधक रहा है। वहां की आग में अब पंजाब के लोग भी सुलगने लगे हैं। गौरतलब है कि पंजाब के सैकड़ों व्यापारी कारोबारी दौरे पर असम गए थे और खराब हालात में वहां फंस गए। कुछ किसी तरह निकल कर आने में कामयाब हो रहे हैं। जो व्यापारी और कारोबारी असम से वापस लौट नहीं पा रहे, उनके परिजनों की सांसें फिक्र में अटकी हैं।

असम के कारोबारी दौरे पर ज्यादातर लुधियाना के लोग जाते हैं। संचार सेवाओं के अस्त-व्यस्त होने के चलते भी उनसे संपर्क में दिक्कतें आ रही हैं। असम में हालात किस कदर बिगड़े हुए हैं, किसी तरह वहां से पंजाब (लुधियाना) वापस लौटे रहे 48 वर्षीय व्यवसायी अजय कुमार ने बताया। अजय असम में फंस गए थे और उन्हें ‘बीमार’ बनकर एक एंबुलेंस में बैठकर राज्य से बाहर निकलना पड़ा। वह शुक्रवार को किसी तरह असम से न्यू जलपाईगुड़ी तक पहुंचे और अब रेल गाड़ी से पंजाब वापस आए रहे हैं। 

फोन पर अजय कुमार ने आंखों देखा हाल बताया है। उन्होंने कहा कि वह नई साइकिलें और बाईसाइकिल के कलपुर्जे बनाने का कारोबार करते हैं। इसी सिलसिले में पिछले दिनों लुधियाना से असम गए थे। साल में कई बार वह वहां जाते हैं। उन्होंने बताया कि 10 दिसंबर को वह गुवाहाटी में थे और वहां से डीलरों को मिलने जोरहाट पहुंचना था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पटरी पर टायर रखकर उन्हें जलाकर रेलगाड़ी बीच रास्ते में ही रोक दी।

प्रदर्शनकारी रेल के अंदर आ गए और यात्रियों से एनआरसी के विरोध में नारे लगाने को कहा। उन्होंने कहा कि गैरअसमिया लोग अपने-अपने राज्यों को लौट जाएं, क्योंकि जब तक केंद्र नागरिकता संशोधन बिल वापस नहीं लेता तब तक यहां विरोध बढ़ता जाएगा और हालात बद से बदतर होते जाएंगे। हम किसी भी कीमत पर असम में इसे लागू नहीं होने देंगे। अजय के मुताबिक वह किसी तरह शाम तक जोरहाट पहुंच तो गए, लेकिन वहां सारे बाजार पूरी तरह बंद थे। महज एक ढाबा खुला था, वह भी इसलिए कि प्रदर्शनकारियों ने अपने खाने-पीने के लिए ढाबा मालिक को उसे खुला रखने की हिदायत दी थी।

अजय कुमार फिर वहां से तिनसुकिया पहुंचे तो वहां भी पूरी तरह सन्नाटा था। तिनसुकिया से वह लुमडिंग पहुंचे। जो रास्ता 5 घंटे का है, उसे काटने में 18 घंटे लगे। 12 दिसंबर को उनके साइकिल डीलरों ने उन्हें पंजाब वापस लौट जाने की सलाह दी।

अजय कुमार के मुताबिक असम में रात के वक्त ही किसी तरह रेल और बसें चलाई जा रही हैं। दिन में सब बंद रहता है। वह किसी तरह हजोई शहर पहुंचे। उनके डीलरों ने उन्हें वहां से निकालने के लिए टैक्सी का बंदोबस्त करने की कोशिशें कीं, लेकिन कोई टैक्सी वाला तैयार नहीं हुआ। आखिर में एक टैक्सी चालक इसके लिए तैयार हो गया, लेकिन उसने एक एंबुलेंस में उन्हें वहां से निकालने की हामी भरी तो मरीज बनकर लौटना पड़ा।

हजोई, गुवाहाटी से करीब 135 किलोमीटर दूर है, लेकिन वहां से गुवाहाटी तक एंबुलेंस में सवार होकर आने में उन्हें 18000 रुपये देने पड़े। अजय कुमार ने 13 दिसंबर की सुबह गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से न्यू जलपाईगुड़ी के लिए रेल पकड़ी और अब रेल में हैं और पंजाब लौट रहे हैं।

वहां प्रदर्शनकारी ‘वापस जाओ’ के नारे लगा रहे हैं। उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और मानसिक तथा शारीरिक पीड़ा अलग से सहनी पड़ी। तीन दिन में एक बार खाना नसीब हुआ। वह रविवार को लुधियाना पहुंचेंगे। अजय कुमार का सवाल है कि उनके नुकसान और प्रताड़ना के लिए कौन जिम्मेदार है? अजय कुमार तो किसी तरह सुलगते असम से वापस लौट रहे हैं, लेकिन लुधियाना के एक अन्य कारोबारी मुकुल शर्मा अभी गुवाहाटी में ही फंसे हैं। बताया जाता है कि बड़ी तादाद में पंजाब के व्यापारी कारोबार के सिलसिले में हालात बिगड़ने से पहले असम गए थे, इनमें से कुछ तो लौट आए, लेकिन कुछ अभी वहीं हैं। उनके परिजन खासे फिक्रमंद हैं।

उद्योगपति मनप्रीत सिंह गुवाहाटी निवासी हैं और उनका एक कारोबारी दफ्तर लुधियाना में भी है। मनप्रीत के अनुसार, “मेरा जन्म और पालन असम में ही हुआ है। मैं 1998 में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए लुधियाना आया था। मेरा भाई गुवाहाटी में साइकिल का थोक और खुदरा स्टोर संभालता है। मैं यहां लुधियाना में काम देखता हूं, महीने में 20 दिन लुधियाना और 10 दिन असम में रहता हूं। शुक्रवार को असम के लिए निकलना था, लेकिन मुझे रेल का टिकट रद्द कराना पड़ा। मेरे भाई ने बताया है कि असम में सब कुछ ठप पड़ा है।”

लुधियाना नट बोल्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी नवजीवन सिंह कलेर ने बताया कि उनकी सूचना के मुताबिक पंजाब के लगभग 200 कारोबारी असम में फंसे हैं। कलेर कहते हैं कि केंद्र के इस फैसले ने चंद दिनों में करोड़ों रुपये का नुकसान पंजाब के कारोबारियों को दिया है। इसी तरह जालंधर के स्पोर्ट्स कारोबार से जुड़े कई व्यवसायी असम जाकर फंस गए हैं। स्पोर्ट्स कारोबारी अरुण कुमार मित्तल ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत से उत्तर भारत का व्यापार संबंध एक बारगी पूरी तरह से टूट गया है और इसका मतलब है अरबों रुपये का सीधा नुकसान!

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल जालंधर में रहते हैं।)

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