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नरसंहार भी हो गया पर लाट साहब को नहीं दिखा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अमनबहाली के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ की सरकार सवालों के घेरे में है। सोनभद्र में नरसंहार तक हो गया पर प्रदेश के लाट साहब राम नाईक ने कभी कोई रपट केंद्र को नहीं भेजी। पिछली सरकार के समय राज भवन चौबीस घंटे काम करता था कानून व्यवस्था को लेकर। वैसे भी कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बीजेपी की सरकार सूबे की सत्ता पर काबिज हुई थी, पर आज हर तरह का अपराध यूपी में बिना भय के किया जा रहा है। खाकी का डर कहीं नहीं दिखता। यदि खाकी का भय होता तो सोनभद्र में दिनदहाड़े 90 एकड़ भूमि पर कब्जा करने को लेकर दस आदिवासियों को मारा न गया होता।

योगी सरकार में गत 17 जुलाई को हुआ ये सोनभद्र कांड एक नरसंहार है। जिसे 32 ट्रैक्टर-ट्रालियों में भर पर पहुंचे करीब दो सौ लोगों ने बिना किसी भय के किया। और पुलिस प्रशासन को इसकी भनक दस खेतिहर आदिवासियों की मौत होने के बाद लगी। ऐसा नहीं है कि योगी सरकार के शासनकाल में खराब क़ानून व्यवस्था को लेकर हुई यह पहली बड़ी घटना है। योगी सरकार के शासनकाल में ही मुन्ना बजरंगी जैसे अपराधी को जेल के अंदर गोलियों से भून दिया गया था।

जेल में किसी अपराधी के छह-छह गोली मार कर हत्या करने की ऐसी घटना यूपी में पहले कभी नहीं हुई थी। ये घटना भी तब हुई जब मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि उसके पति की जेल में हत्या करने की साजिश हुई है। फिर भी सूबे का पुलिस और जेल प्रशासन हरकत में नहीं आया। जबकि सरकार के स्तर से यह ऐलान किया जाता रहा कि अपराधी डर कर या तो राज्य से बाहर चले गए हैं या फिर जमानत रद्द कराकर जेल में बंद हैं। इसके विपरीत सूबे में आये दिन सनसनीखेज अपराध की घटनाएं होती रहीं।

यूपी में बीते कुछ महीनों में हुई अपराध की घटनाओं की बात करें तो अलीगढ़ के टप्पल कस्बे में ढाई साल की मासूम की नृशंस हत्या, कुशीनगर में किशोरी से गैंगरेप, कानपुर मदरसे में छात्रा से दुष्कर्म, हमीरपुर और जालौन में मासूम लड़कियों की रेप के बाद हत्या, 11 जून को एटा के नयागांव में आम के पेड़ से लटकते मिले सत्यप्रकाश यादव और सपना यादव का मामला, 24 जून को मैनपुरी के गणेशपुर में अमन यादव और रेखा यादव की तेज़ाब से जले शव का मिलना, गत 01 जुलाई को कासगंज के सोरों में कुंवरपाल लोधी और उनकी प्रेमिका की हुई हत्या और 17 जुलाई को संभल में दो सिपाहियों की हत्या कर कैदियों के फरार होने का प्रकरण, राज्य में क़ानून व्यवस्था के रसातल में पहुचने का दर्शाता है।

अलीगढ़ में हुई मासूम लड़की की जघन्य हत्या के प्रकरण की तो देश भर में चर्चा हुई थी। राज्य में भी कई जगह इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कैंडल मार्च निकाले गए थे और राज्य की कानून व्यवस्था पर चिंता जताई जा रही है। हालांकि इस मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन लगातार कई शहरों में हुई ऐसी वारदातों से लोग सकते में हैं। यही वजह है कि राज्य में हो रही ताबड़तोड़ आपराधिक घटनाओं को लेकर योगी सरकार एक बार फिर न सिर्फ विपक्ष के निशाने पर आ गई है बल्कि कानून व्यवस्था को लेकर चौतरफा सवाल भी उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि राज्य में रेप, हत्या और माबलिंचिंग की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। पुलिस के अफसरों का कहना है कि यूपी की क़ानून व्यवस्था बेहतर नहीं है और हर जिले में क़ानून व्यवस्था को बेहतर करने के प्रयास हो रहे हैं।

यही वजह है कि अब योगी सरकार सनसनीखेज अपराध की शर्मनाक घटनाओं पर हो रहे हंगामे में उलझ गई है। इसकी वजह भी है। वास्तव में अपराध की हर घटना इसी बात की ओर इशारा करती है कि देश का सबसे बड़ा राज्य मारपीट, जमीन कब्जे, हिन्दू-मुस्लिम विवाद और रेप जैसे अपराधों पर राजनीति के भंवर में उलझकर एक बार फिर आदिमकाल में जा पहुंचा है। लेकिन प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो मानते हैं कि “यूपी बड़ा और शक्तिशाली राज्य है। विकास की ओर तेजी से चल पड़ा है, इसलिए कुछ लोग नहीं चेहते हैं कि नई सोच के साथ कामयाब हो. बवाल इसी कारण है।

फ़िलहाल सरकार का यह दावा लोगों को हजम नहीं हो रहा है। इसकी वजह है, सोनभद्र जैसा नरसंहार और संभल में कैदियों के हाथों दो सिपाहियों की हत्या होना है। ये अपराधिक घटनाएं सूबे की क़ानून व्यवस्था के लुंजपुंज होने का इशारा करने के लिए काफी हैं। चंद माह पहले ही राजनीति में आयी प्रियंका गांधी ने सोनभद्र की घटना पर सूबे की क़ानून व्यवस्था पर था। और कहा था कि यूपी में कानून के बजाय गुंडा राज है। प्रियंका जब कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल सोनभद्र और 19जुलाई को वह खुद सोनभद्र पहुंच गईं तो प्रशासन ने उन्हें घटनास्थल पर जाने नहीं दिया। यही नहीं खुद मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर सोनभद्र की घटना के लिए कांग्रेस को दोषी बताने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस जमीन पर कब्जा करने को लेकर दुखद घटना हुई वह जमीन कांग्रेस के शासनकाल में हड़पी गई थी। अब मुख्यमंत्री के इस कथन से 17 जुलाई को मारे गए 10 खेतिहर आदिवासियों की मौत का क्या लेना देना है? यह मुख्यमंत्री स्पष्ट नहीं करते।
फिलहाल अब इस समूचे प्रकरण को लेकर सपा और कांग्रेस योगी सरकार पर हमलावर हैं। राज्य की विधानसभा में सोनभद्र नरसंहार को लेकर हंगामा हुआ। सपा नेताओं ने कहा कि यूपी में हत्या, लूट, बलात्कार, छेड़खानी, चोरी, डकैती जैसे सभी अपराध बढ़े हैं और योगी सरकार अपराध के आंकड़े उजागर नहीं कर रही है। केंद्र सरकार भी एनसीआरबी के आंकड़े जारी नहीं होने दे रही है।

अपराध के आंकड़े छिपाकर क़ानून व्यवस्था के बेहतर बताने का नाटक किया जा रहा है पर सोनभद्र जैसी घटनाएं खराब क़ानून व्यवस्था को उजागर कर दे रही हैं। लेकिन यूपी की खराब क़ानून व्यवस्था को लेकर बसपा योगी सरकार को घेरने में उत्साह नहीं दिखा रही है। जबकि अखिलेश सरकार में मायावती कानून-व्यवस्था के मसले को लेकर आंकड़े सहित हमलावर होती थीं। बसपा का योगी सरकार के प्रति नरमी का ये रुख भी तब है जबकि सूबे की कानून व्यवस्था के सवाल पर बीजेपी ने फरवरी 2011 में 19 पृष्ठों की “मायाराज का कच्चा-चिट्ठा” बांटी थी, जिसमें 7,800 रेप और 6.6 लाख अपराध के मामले दर्ज होने की बात कही गई थी।

तब बीजेपी का आरोप था कि एक तरफ लगातार रेप हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मायावती नीरो की तरह चैन की बांसुरी बजा रही थीं। आज ऐसे आरोप लगाने वाली बीजेपी के पास सूबे की खराब क़ानून-व्यवस्था को लेकर कोई समुचित जवाब नहीं है। बीजेपी के इस रुख के चलते ही यह कहा जा रहा है कि राजनीति की केमिस्ट्री की एक खासियत है कि जो चीज जितनी तेजी से बदलती है, वह उतनी ही तेजी से अपने मूल की ओर लौट भी जाती है। जाहिर है कि उत्तर प्रदेश भी दूसरे राज्यों की तरह हर बार जितनी तेजी से बदलता है, उतनी ही तेजी से अराजकता के अपने मूल की ओर लौट भी जाता है।

(यह लेख राजेंद्र कुमार ने लिखा है।)

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This post was last modified on July 20, 2019 3:35 pm

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