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माले प्रत्याशियों ने भरा चुनाव में नया रंग, कहा- रोजगार के हथियार से करेंगे सांप्रदायिकता को दफ़्न

पटना। बिहार विधानसभा के चुनाव में महागठबंधन के प्रमुख घटक दल भाकपा माले अपने 19 उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में है। इनके उम्मीदवार अपने पारंपरिक आधार और आरजेडी के सामाजिक आधार की बदौलत हर सीटों पर कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इनका मानना है कि पंद्रह साल के नीतीश के कार्यकाल के दौरान विकास के नाम पर किए गए झूठे वादे को जनता पहचान चुकी है और अब इसे बदलना चाहती है। रोजगार देने में ये सरकार सबसे अधिक नाकाम साबित हुई है। रोजी-रोटी छीनने वाली एनडीए सरकार के दिन अब लद चुके हैं। बिहार चुनाव को लेकर मौजूदा हालात पर ‘जनचौक’ ने भाकपा माले के उम्मीदवारों से बातचीत की-

भोजपुर के अगिआंव सीट से सीपीआई एमएल के उम्मीदवार मनोज मंजिल ने कहा कि रोजगार के सवाल पर नीतीश की सरकार विफल साबित हुई है। राज्य में लाखों सरकारी पद खाली पड़ी हैं। शिक्षकों के समान काम समान वेतन प्रकरण में हाई कोर्ट से जीत के बाद सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से उसकी नीयत का पता चला है। मेडिकल क्षेत्र के 10 हजार पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य उप केंद्र बंद पड़े हैं। कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षक, फर्नीचर और कमरे तक नहीं हैं। विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय का कोई इंतजाम नहीं है। हम रोजगार, शिक्षा के साथ ही महादलितों को जमीन और काम देने और गरीबों को राशन कार्ड के सवाल को लेकर हम लोगों के बीच जा रहे हैं। इंसानियत के विरोधी और जम्हूरियत के दुश्मन को सामाजिक न्याय की ताकतों ने उखाड़ फेंकने का फैसला कर लिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ कर वोटों के ध्रुवीकरण की साजिश को सफल नहीं होने देगी।

अपने संघर्षों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि हमने आपदा से प्रभावित परिवारों को 88 लाख रुपये का भुगतान कराया है।। 55 गांव में बिजली पहुंचाने, लॉकडाउन के दौरान डेढ़ लाख रुपये के खाद्यान्न वितरण समेत जनता के सहयोग से अन्य कार्यों को संपादित कराया।

डुमराव सीट से भाकपा माले के उम्मीदवार अजीत कुमार सिंह का कहना है कि इस बार महागठबंधन दो तिहाई से भी अधिक मतों से सरकार बनाएगी। शिक्षा, रोजगार, खेती किसानी के सवाल पर हमारे कार्यकर्ता लोगों के बीच जा रहे है, जिसको लेकर लोगों में बहुत अपील है। मतदाताओं से वादा है कि इन तमाम सवालों के साथ डुमराव के औद्योगिक गौरव को वापस दिलाने का हम काम करेंगे।

भोजपुर के तरारी से माले उम्मीदवार सुदामा प्रसाद का कहना है कि गरीबों के मुंह से निवाला, युवाओं से रोजगार और किसानों की खेती छीनने वाली सरकार को अब जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। भूमि सुधार, सीलिंग से अतिरिक्त भूमि को वितरित करने, बटाईदार किसानों को पहचान पत्र जारी कर उनका रजिस्ट्रेशन करने, दलित गरीबों के उत्पादन पर रोक लगाने समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर हम लोगों के बीच जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के एजेंडे पर बिहार में अब चुनाव संभव नहीं है। बिहार की जनता हर हाल में अब बदलाव चाहती है।

पालीगंज सीट से पार्टी उम्मीदवार संदीप सौरभ ने कहा कि युवाओं का आक्रोश अब सरकार को उखाड़ फेंकने में पीछे नहीं हटेगा। रोजगार के सवाल पर मोदी और नीतीश दोनों की सरकारें विफल साबित हुई हैं। कानून व्यवस्था के नाम पर नाकाम साबित हुई सरकार में सामंती उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं। सामूहिक बलात्कार जैसी घटनाओं पर भी सरकार और उनकी पुलिस खामोश है। रोजगार, शिक्षा, महादलितों को जमीन और रोजगार, गरीबों को राशन कार्ड समेत विभिन्न मांगों को लेकर हम संघर्ष के संकल्प के साथ लोगों के बीच जा रहे हैं।  सरकार रोजगार के अवसर समाप्त कर आरक्षण के अधिकार से युवाओं को वंचित करना चाहती है। सांप्रदायिक तनाव पैदा कर किसानों को उसके अधिकारों से वंचित करने की साजिश की जा रही है। हम नए कानून की बात करते हैं।

दीघा से पार्टी उम्मीदवार शशि यादव ने कहा कि गरीबों के पुनर्वास का कोई इंतजाम न कर झोपड़ियों को हटाने के खिलाफ हमने आंदोलन चलाया। क्षेत्र के औद्योगिक विकास, स्कीम वर्करों, आशा, आंगनबाड़ी  कार्यकर्ता, रसोईया समेत अन्य को सम्मानजनक वेतनमान देने, प्रवासी मजदूरों के साथ किए गए अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ और रोजगार के सवाल को लेकर हम लोगों के बीच जा रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एजेंडे पर एनडीए के मतों के ध्रुवीकरण की साजिश के विपरीत लोग विकास, रोटी, रोजगार, कानून व्यवस्था के सवाल पर बहस कर रहे हैं। इन सवालों पर सरकार की नाकामी का नतीजा है कि अब इनकी विदाई तय है।

(पटना से स्वतंत्र पत्रकार जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 23, 2020 2:15 pm

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