Tuesday, November 29, 2022

उत्तराखंड: विवादों में विधायक

Follow us:
Janchowkhttps://janchowk.com/
Janchowk Official Journalists in Delhi

ज़रूर पढ़े

उत्तराखंड के विधायक उमेश कुमार फिर से विवादों में घिर गये हैं। राज्य में यदि विवादों में रहने वाले लोगों की फेहरिस्त तैयार की जाए तो पत्रकार से नेता बने और स्टिंग करने में नाम कमा चुके उमेश कुमार का नाम सबसे आगे होगा। उत्तर प्रदेश से एक पत्रकार के रूप में उत्तराखंड आये उमेश कुमार ने बहुत कम समय में अपार संपत्ति अर्जित की। कई नेताओं का स्टिंग किया। उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंततः विधायक बन गए।

उत्तराखंड विधानसभा में खानपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे उमेश कुमार लगातार विवादों में रहे। चाहे पत्रकार के रूप में हो, सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में या फिर विधायक के रूप में, उन पर हमेशा उंगलियां उठती रही हैं। ऐसा नहीं है कि उमेश कुमार ने सामाजिक कार्य न किये हों। उत्तराखंड के तमाम जन संघर्षों के मुद्दे पर उन्होंने अपनी सक्रियता दिखाने का प्रयास किया। कोविड काल में बीमारों तक दवाइयां और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने में उमेश कुमार सक्रिय रहे। इस दौरान वे कई लोगों तक राहत और दवाइयां पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर से पहाड़ों तक पहुंचे और बीमारों तक मदद पहुंचाने से ज्यादा उनके हेलीकॉप्टर दौरे चर्चाओं में रहे।

पहाड़ों के प्रति प्रेम दिखाने में उमेश कुमार कभी पीछे नहीं रहे। 2 अक्टूबर उत्तराखंड के लिए काला दिवस होता है। इस दिन वर्ष 1994 में उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर दिल्ली कूच कर रहे पहाड़ के लोगों पर मुजफ्फरनगर में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चला दी थी। कई लोगों की मौत हुई थी और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। उत्तराखंड में आज भी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के साथ ही काला दिवस मनाया जाता है। शहीदों की याद में हर वर्ष 2 अक्टूबर को उत्तराखंड में कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। शहीद स्मारकों पर श्रद्धांजलि सभाएं होती हैं।

इन सबसे अलग उमेश कुमार हर वर्ष 2 अक्टूबर को अपनी टीम के साथ मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पहुंचते हैं और उत्तराखंड के शहीदों की याद में यज्ञ का आयोजन करते हैं। उत्तराखंड के तमाम जन सरोकारों के मुद्दों पर भी उमेश कुमार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। चाहे घाट का सड़क आंदोलन हो या फिर पेड़ों को बचाने का आंदोलन, उमेश कुमार की टीम वहां अपने भारी-भरकम साजो-सामान ओबी वैन और एक बड़ी स्क्रीन के साथ पहुंच जाती है। ये टीम आंदोलन स्थल पर अपनी स्क्रीन लगाती है और सीधे ऑनलाइन उमेश कुमार से वीडियो कॉल करती है। घाट में ऐसा ही हुआ, हालांकि इससे पहले कि उमेश कुमार आंदोलन का श्रेय लूट ले जाते, स्थानीय आंदोलनकारियों ने बिजली की लाइन काट दी और उमेश कुमार का ताम-झाम धरा रह गया। सहस्रधारा रोड पर पेड़ों को बचाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे तो वहां भी उमेश कुमार की स्क्रीन पहुंच गई। हालांकि ये घटनाएं उमेश कुमार के विधायक बनने से पहले की हैं।

हाल के महीनों में हेलंग में महिलाओं का अपमान हुआ और पहाड़ के तमाम जागरूक लोगों ने हेलंग कूच का आह्वान किया तो उमेश कुमार भी अपनी तरफ से सक्रिय हो गए। उनकी टीम हेलंग पहुंचती, उससे पहले ही उत्तराखंड के तमाम जागरूक नागरिकों ने अलग-अलग माध्यमों से उमेश कुमार तक संदेश पहुंचा दिया कि वे हेलंग आकर राजनीति न करें। उमेश कुमार या उनकी टीम हेलंग तो नहीं पहुंची, लेकिन पहाड़ के अन्य कई मसलों में उमेश कुमार की सक्रियता बनी रही।

उमेश कुमार के बारे में कहा जाता है कि उनके पास पहाड़ के युवाओं की एक टीम है। यह टीम जब भी कोई आंदोलन होता है वहां पहुंचती है। बड़ी स्क्रीन लगाई जाती है और उमेश कुमार वीडियो कॉलिंग के जरिये अपनी बात रखते हैं। कहा जाता है कि उमेश कुमार अपनी इस टीम की हर जरूरत पूरी करते हैं। जेब खर्च से लेकर घर की जरूरतों, बहन की शादी, मां का इलाज आदि हर तरह की मदद वे अपनी टीम के सदस्यों की करते हैं। यह भी माना जाता है कि उमेश कुमार राज्य के उन कुछ लोगों में शामिल हैं जिनके पास बाकायदा एक गाली ब्रिगेड है। सोशल मीडिया पर उमेश कुमार की टीम के लोग सैकड़ों फर्जी आईडी के साथ मौजूद हैं, ऐसा आरोप अक्सर लगाया जाता है। उमेश कुमार के खिलाफ जब भी कोई टिप्पणी होती है तो यह ब्रिगेड फर्जी आईडी एक साथ टिप्पणी करने वाले को ट्रोल करती हैं और गंदी गालियां दी जाती हैं।

उमेश कुमार को लेकर हालिया विवाद अंकिता हत्याकांड को लेकर सामने आया है। दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब इस हत्याकांड से प्रकाश में आए अंकिता के दोस्त पुष्प ने एक वीडियो जारी किया। वीडियो में पुष्प कहता हुआ सुनाई दे रहा है कि वह 16 सितम्बर को पुलकित आर्य के रिसोर्ट में गया तो वहां उसने एक वीआईपी देखा था। वीडियो में पुष्प ने वीआईपी के कद काठी और हुलिए का भी जिक्र किया है। इस वीडियो में आगे कहा गया है कि उसने यह सारी बातें एसआईटी को उस समय बताई थी जब एसआईटी ने उसे बयान दर्ज करवाने के लिए बुलाया था।

पुष्प ने वीडियो में कहा है कि बाद में एसआईटी ने कुछ तथाकथित वीआईपी के फोटो शिनाख्त करवाने के लिए उनके पास भेजे थे। एक फोटो उन्होंने आइडेंटिफाई किया था, जो खानपुर विधायक का था। लेकिन जो वीआईपी उसने देखा था, वह खानपुर विधायक नहीं थे। पुष्प के बयान के अनुसार, रिजॉर्ट में उसने उमेश कुमार को नहीं देखा था। लेकिन यह वीडियो सामने आते ही उमेश कुमार का नाम फिर से विवादों में आ गया। कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि उमेश कुमार ने डरा धमकाकर पुष्प से यह वीडियो जारी करवाया है। इस वीडियो को लेकर कई तरह के सवाल उठाये जा रहे हैं। पहला यह कि इस वीडियो की क्या जरूरत थी। दूसरा यह कि जम्मू का रहने वाला पुष्प खानपुर विधायक को कैसे और कब से जानता है। इस वीडियो में उसने सिर्फ खानपुर विधायक का जिक्र क्यों किया। क्या दबाव डालकर उससे यह वीडियो बनवाया गया और यह दबाव किसका था?

इस मामले में सबसे प्रमुखता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भावना पांडे सामने आई हैं। भावना पांडे ने भी एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने उमेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। भावना पांडे उस वीडियो में साफ कहती हुई सुनाई दे रही हैं कि अंकिता मर्डर का वीआईपी सौ प्रतिशत उमेश कुमार ही हो सकता है। वीडियो में भावना पांडे ने कई दूसरे गंभीर आरोप खानपुर विधायक पर लगाए हैं।

उन्होंने कहा है कि इस बात की जांच की जानी चाहिए कि फटेहाल देहरादून आए उमेश कुमार ने इतनी संपत्ति कहां से अर्जित की। भावना पांडे का यहां तक आरोप है कि उत्तराखंड से लापता हुई कई लड़कियों के मामले में उमेश कुमार का हाथ हो सकता है। इसकी जांच की जानी चाहिए। भावना पांडे ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी आरोप लगाए हैं और कहा है कि वे उमेश कुमार को संरक्षण दे रहे हैं।

इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इससे उमेश कुमार एक बार फिर से विवादों में आ गये हैं। इससे पहले उमेश कुमार और भावना पांडे तब आमने-सामने आए थे, जब देहरादून में एक रेस्टोरेंट के नाम को लेकर विवाद हुआ था। प्यारी पहाड़न नाम के इस रेस्टोरेंट के नाम पर भावना पांडे ने सवाल उठाए थे। भावना पांडे का कहना था कि यह रेस्टोरेंट पहाड़ की कोई लड़की नहीं, बल्कि कोई बाहरी व्यक्ति चला रहा है।

उन्होंने इस नाम को पहाड़ की महिलाओं का अपमान बताया था। उमेश कुमार रेस्टोरेंट के समर्थन में उतरे थे और कहा था कि कुछ लोग पहाड़ की बेटी को परेशान कर रहे हैं। इस मामले में भी दोनों पक्षों में न सिर्फ गरमा-गरम बहस, बल्कि गाली गलौज तक हुआ था। दोनों एक बार फिर आमने-सामने हैं। अब देखना यह है कि उत्तराखंड की पुलिस इन आरोपों की जांच किस तरह करती है और सबसे बड़ी बात यह है कि अंकिता मर्डर केस में जिस वीआईपी का जिक्र पहले दिन से ही किया जा रहा है उसका खुलासा कब किया जाएगा?

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है

जब भी हमारे देश में जाति, जातिगत हिंसा और जातिगत भेदभाव की बात शुरू होती है तो यह आरक्षण...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -