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Saturday, September 25, 2021

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देश बेचू है मोदी सरकार: राजाराम सिंह

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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, बिहार के तत्वावधान में कल 11 सितंबर को किसान संगठनों द्वारा संयुक्त किसान कन्वेंशन आयोजित किया गया। आईएमए हॉल में आयोजित इस कन्वेंशन में पूरे बिहार के अलग-अलग जिलों के सैंकड़ों किसान नेताओं ने भाग लिया।
कन्वेंशन तीनों कृषि कानून एवं बिजली विधेयक 2021 को निरस्त करने, MSP गारंटी का कानून बनाने और हर किस्म के कृषि कर्ज को माफ करने की मांग को लेकर आयोजित था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव, माले के पूर्व विधायक व अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बिहार-झारखंड के प्रभारी राजाराम सिंह ने कहा कि आज देश में खेती और किसानी के साथ-साथ बेशकीमती राष्ट्रीय उपक्रमों को मोदी-शाह की सरकार बेचने पर आमादा है। यह सिर्फ मसला केवल कृषि का ही नहीं है, बल्कि देश के संविधान, लोकतंत्र और सम्पतियों को बचाने का सवाल है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश बेचू है। यह सरकार हर चीज को बेच देगी। राजाराम सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन के साढ़े नौ माह पूरे हो गये हैं, लेकिन मोदी सरकार किसानों की मांगें मानने से भाग रही है और वह पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है। अभी तक 600 किसानों ने शहादत दे दी। इसके बावजूद किसानों ने हर परिस्थिति, दमन व सरकार की हर साजिश का मुकाबला करते हुए आन्दोलन को विभिन्न राज्यों तक फैलाया है। अब यह आंदोलन आम जनता का हो गया है। ये तीनों किसान विरोधी कानून गरीबों के साथ-साथ हर तबके को प्रभावित करने वाले हैं। मुजफ्फरनगर की ऐतिहासिक किसान महापंचायत ने समाज में एक भाईचारा का संदेश दिया है। महापंचायत ने 27 सितम्बर को ‘भारत बंद’ में जनता के हर तबके से मजबूती से समर्थन देने का आह्वान किया।

राजाराम सिंह ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26-27 अगस्त के राष्ट्रीय कन्वेंशन के अपने पारित प्रस्ताव में मंहगाई, डीजल-पेट्रोल-रसोई गैस-खाद की बढ़ी कीमतों, सरकारी संस्थानों-संसाधनों की बिक्री, श्रम कानूनों में बदलाव, नौजवानों व मजदूरों के रोजगार के खात्मे आदि के खिलाफ जनता के विभिन्न तबकों के जारी संघर्षों का समर्थन किया और 27 सितंबर के भारत बंद में सहयोग की अपील की है ।
अखिल भारतीय किसान सभा (केदार भवन) बिहार के महासचिव अशोक सिंह ने कहा कि 3 कृषि कानूनों के खिलाफ बिहार में भी मजबूत अंदोलन छेड़ा जाएगा व 27 सितंबर का भारत बंद ऐतिहासिक होगा।

अखिल भारतीय किसान सभा (जमाल रोड), बिहार के सचिव विनोद कुमार ने कहा कि किसान आन्दोलन अब देश का भविष्य तय करेगा कि देश जनता के हाथों में होगा या तानाशाह मोदी के नेतृत्व में कारपोरेट राज होगा? रोज ब रोज किसान आन्दोलन आगे बढ़ता जा रहा है।
कन्वेंशन को संबोधित करते हुए डीएम दिवाकर, पूर्व निदेशक, ए. एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट, पटना ने कहा कि किसान आम जनता की लड़ाई का भी नेतृत्व कर रहे हैं।

कंवेन्शन को किसान महासभा के नेता व विधायक सुदामा प्रसाद ने सम्बोधित करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा में भी किसानों के सवालों को मजबूती से उठा रहे हैं। बिहार राज्य गन्ना उत्पादक किसान महासभा के अध्यक्ष व विधायक वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि गन्ना की कीमतों को बढ़ाया जाय।
कंवेन्शन को किसान महासभा के नेता व विधायक महानंद, जल्ला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष शम्भू नाथ मेहता, सब्जी उत्पादक संघ के नेता मनोहर लाल, बागमती नदी तटबंध विरोधी चास वास संघर्ष समिति के जितेन्द्र यादव, कदवन डैम निर्माण समिति के विनोद कुमार कुशवाहा, रामवृक्ष राम, राम जीवन सिंह, उमेश सिंह, राजेन्द्र पटेल, अमेरिका महतो, शिवसागर शर्मा, कृष्ण देव यादव, नंदकिशोर सिंह, महेंद्र यादव, मणिलाल, अशोक प्रियदर्शी, सहीत दर्जनों किसान नेताओं ने सम्बोधित किया।

कन्वेंशन के अंत में प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें 3 कृषि काले कानून को वापस लेने, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 को रद्द करने, MSP को कानूनी दर्जा देने, किसानों की कर्जामाफी, बिहार में एपीएमसी एक्ट की पुनर्बहाली, राज्य भर में खाद की किल्लत को दूर कर कालाबाजारी को खत्म करने, बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित जिलों में 6 महीनों तक मुफ्त राशन देने और फसल क्षति का मुआवजा देने, मंहगाई के अनुसार गन्ना मूल्य तै करने आदि मांगें की गईं। कार्यक्रम का संचालन 7 सदस्यीय अध्यक्ष मंडल क्रमशः रामाघार सिंह किसान महासभा, ललन चौधरी,  मणिकान्त पाठक, रामाधार सिंह, अनिल सिंह, रामचन्द्र प्रसाद, वी. वी. सिंह ने किया। किसान आंदोलन में अब तक शहीद हुए किसानों की याद में 1 मिनट के मौन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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