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गोवा में जमीन पर कब्जे के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन हुआ तेज, मामले को लेकर सरकार में दरार

उत्तरी गोवा के सत्तारी जिले के मेलाउली में प्रस्तावित आईआईटी परियोजना के खिलाफ आदिवासियों और स्थानीय लोगों का प्रदर्शन तेज होता जा रहा है। इस परियोजना के खिलाफ आंदोलन का आज 8 वां दिन है। इस बीच गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने आदिवासियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर शेल मेलाउलीम से इस परियोजना को रद्द करने की मांग की है।

साथ ही उन्होंने गांव वालों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को भी वापस लेने की मांग की है और मेलाउली गांव में महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।

राणे ने एक वीडियो जारी कर कहा- मैं हमेशा से सत्तारी के लोगों के साथ हूँ। उन्होंने कहा कि विकास अपनी जगह पर है, किंतु स्थानीय लोग क्या चाहते हैं, उनकी क्या इच्छा है इस बात का सम्मान करना चाहिए। धरने पर बैठी महिलाओं पर जिन पुलिस वालों ने बर्बरता की है उनके खिलाफ कार्रवाई हो और ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।

राणे ने कहा कि वह IIT को अपने निर्वाचन क्षेत्र में कहीं भी स्थापित नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि “सीएम राज्य में कहीं भी आईआईटी कैंपस बना सकते हैं, लेकिन हम इसे अपने निर्वाचन क्षेत्र में नहीं चाहते हैं।”

इस बीच क्षेत्र के सभी 14 गांव के लोग इस आंदोलन के समर्थन में उतर आये हैं। इन ग्रामीणों ने कहा कि यदि यह परियोजना वापस नहीं ली गयी तो आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वे सबक सिखाएंगे।

इस आंदोलन में शामिल गांव हैं-वेलगेम, सवार्दे, करमाली, सलेली, कुदशे, तारी, कुमथोल, करनझोल, होंडा, शिरसोडे, बरजान, खडाकी, कुंभकर्ण और पोरीम। इन सभी गांव के लोगों की मांग है कि सरकार तुरंत इस परियोजना को रद्द करे। इन गांव वासियों का कहना है कि यह जंगल पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत आता है और बीजेपी सरकार द्वारा प्रस्तावित आईआईटी के लिए जिस क्षेत्र का चुनाव किया गया है उसके दोनों तरफ दो राष्ट्रीय अभयारण्य हैं।

गौरतलब है कि मेलाउली एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और यह ईएसए द्वारा घोषित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में आता है। राज्य सरकार ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को इस क्षेत्र को ईएसए से बाहर करने के लिए लिखा है ताकि आईआईटी प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके।

सोमवार, 11 जनवरी को इस परियोजना को रद्द करने अथवा स्थानांतरित करने के लिए आदिवासी नेताओं ने सरकार को दस दिन का समय दिया था। एससी नेताओं ने सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि, ऐसा नहीं होने पर वे 20 जनजातीय संगठनों के साथ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।

इन नेताओं ने अनुसूचित जाति और ओबीसी नेताओं और मंत्रियों से अपील की है कि आदिवासियों पर पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा, “क्षेत्र के विकास के एक हिस्से के रूप में गांव में IIT परिसर की योजना बनाई गई थी। लेकिन स्थानीय लोग इसका जोर-शोर से विरोध करते रहे हैं। अगर स्थानीय लोग नहीं चाहते हैं, तो मैं चाहता हूं कि राज्य सरकार इस परियोजना को आगे न बढ़ाए। ”

इससे पहले, सोमवार को गोयचो कुल मुंदकरचो अवाज (जीकेएमए), गावड़ा, कुनबी, वेलिप और धनगर फेडरेशन (GAKUVED) एसोसिएशन ने आईआईटी परियोजना के खिलाफ मेलौली ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए जोंडवाल हॉल, पोंडा में एक बैठक की और शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे मेलौली ग्रामीणों पर महिलाओं और लाठीचार्ज पर पुलिस अत्याचारों की निंदा की।

जीकेएमए के संयोजक रामकृष्ण ज़ल्मी ने कहा कि, पिछले 60 वर्षों से ग्रामीण जमीन पर खेती कर रहे हैं और आजीविका के लिए पूरी तरह से इस पर निर्भर हैं। आंदोलनकारी स्थानीय लोग पिछले छह महीनों से भूखे हैं और इसलिए भूमि को उन्हें टेनेंसी एक्ट के अनुसार सौंप दिया जाना चाहिए।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on January 12, 2021 8:38 pm

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