Monday, February 6, 2023

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने 21 महीनों में मतदाताओं से किया एक भी वायदा नहीं किया पूरा

Follow us:

ज़रूर पढ़े

मध्यप्रदेश के विधानसभा के चुनाव में प्रदेश के मतदाताओं ने कांग्रेस को बहुमत दिया था। कांग्रेस की सरकार 17 दिसंबर, 2018 से 20 मार्च, 2020 तक 15 माह चली। भाजपा द्वारा की गई खरीद-फरोख्त और कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी के चलते कांग्रेस के 22 विधायकों द्वारा ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा का दामन थाम लिया। 23 मार्च 2020 को दल-बदल कानून को ठेंगा दिखाते हुए शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुआ, जिसमें 19 सीटों पर भाजपा जीत गई।

भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश के 10 लाख बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का वायदा किया था लेकिन भाजपा सरकार 21 महीनों में एक लाख रोजगार भी मुहैया नहीं करा सकी। प्रदेश में इस समय पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 32 लाख है। दो लाख से ज्यादा पद खाली हैं लेकिन उन्हें भरा नहीं जा रहा है ।

भाजपा ने हायर सेकेंडरी में 75% अंक लाने वाली छात्राओं और कॉलेज में जाने वाली छात्राओं को मुफ्त में स्कूटी देने और कॉलेज जाने के लिए मुक्त परिवहन का वायदा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ। कॉलेज की छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग और गर्ल्स हॉस्टल की क्षमता दुगनी करना भी कागजों तक ही सीमित रह गया। भाजपा ने फूड प्रोसेसिंग, टूरिज्म यूनिवर्सिटी, कारीगर यूनिवर्सिटी खोलने, नॉलेज कारपोरेशन बनाने तथा नए वेतन आयोग की स्थापना करने का वायदा किया था जिस पर अमल नहीं किया। गरीबों के चार लाख आवास प्रदेश सरकार द्वारा बजट आवंटन के अभाव में नहीं बन पा रहे हैं। भाजपा की घोषणा के अनुसार स्व सहायता समूह को ब्याज मुक्त कर्ज देने की घोषणा भी हवा में ही है।

भाजपा सरकार ने वायदा किया था कि वह किसानों को केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली किसान सम्मान निधि के साथ-साथ चार हजार रूपये (मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना) राज्य सरकार की ओर से देगी। लेकिन प्रदेश के सभी किसानों को ना तो केंद्र सरकार द्वारा घोषित 3 साल की 18,000 रूपये सम्मान निधि की राशि मिली है ना ही राज्य सरकार द्वारा 2020 में घोषित 4000 रुपये मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की राशि मिली है। किसानों को खाद के लिए लाइन में लगकर डंडे खाने पड़ रहे हैं। एमएसपी पर खरीद नहीं होने के कारण किसानों को 1960 की धान 1300 रूपये, 2738 की ज्वार 1500 रूपये,1870 का मक्का 1400 रूपये, 2250 का बाजरा 1400 रूपये प्रति क्विंटल पर बेचना पड़ा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की हालत चरमराई हुई है। जिला अस्पतालों में पांच हजार से ज्यादा डॉक्टरों और विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं। राज्य सरकार का बजट 2 लाख 41हजार करोड़ का है जबकि कर्ज 2 लाख 53 हजार करोड़ हो गया है। केंद्र सरकार ने 52 हजार करोड़ रुपया राज्यांश देने की बजाय 46 हजार करोड़ ही दिया है। राजस्व घाटा 46 फीसदी हो गया है।

मध्यप्रदेश अपराध में देशभर में चौथे नंबर पर है। 2018 में कुल 2,48,354 अपराध दर्ज हुए थे, जो बढ़कर 2020 में 2,83,881 हो गए हैं।

प्रदेश में जनजातीय आबादी 21% है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातियों के लिए रोज नई घोषणाएं करती है परंतु आदिवासियों को जंगलों से उजाड़ने का काम वन विभाग और पुलिस दमन का शिकार लगातार होना पड़ रहा है। प्रदेश में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा लगातार अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों, स्कूलों पर हमले किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर प्रदेश की जनता को विकास के नाम पर केवल भाषण और घोषणा ही हाथ लगी है।

उक्त अनुभव के आधार पर जिन पांच राज्यों में आने वाले समय में चुनाव हो रहे हैं, वहां के मतदाताओं को पार्टियों के घोषणापत्र को लागू कराने के उपाय तलाशने चाहिए। किसी भी राज्य में चुनी हुई सरकार को खरीद-फरोख्त के माध्यम से ना गिराया जाए और ना बदला जा सके। यह सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए। जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद यदि वह मतदाताओं के हितों के खिलाफ कार्य करता है तो उसे वापस बुलाने के अधिकार (राइट टू रिकाल) की लड़ाई लड़नी पड़ेगी अन्यथा मध्य प्रदेश में भाजपा की तरह पार्टियों के नेता मतदाता को ठगते रहेंगे।

(डॉ सुनीलम पूर्व विधायक और किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष हैं।)

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

जमशेदपुर में धूल के कणों में जहरीले धातुओं की मात्रा अधिक-रिपोर्ट

मेट्रो शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या आम हो गई है। लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या विभिन्न राज्यों के औद्योगिक...

More Articles Like This