Sunday, June 26, 2022

टीएमसी नेताओं ने चुनावी हलफनामों में नारद मामले का पूरा विवरण दिया जबकि शुवेंदु और मुकुल गोल कर गए

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हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा ने चुनाव आयोग को दिये अपने हलफनामे में नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले का विवरण दिया, जबकि भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने केवल अपने मामले की संख्या का उल्लेख किया और उनके साथी विधायक मुकुल रॉय ने मामले का संदर्भ पूरी तरह से छोड़ दिया। 

इंडियन एक्सप्रेस ने विधानसभा चुनावों के लिए उनके नामांकन पत्रों के माध्यम से उक्त जानकारी हासिल की है। गौरतलब है कि नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में कुल 13 नाम सामने आए थे और उनमें से केवल पांच ही चुनाव मैदान में उतरे थे। तीन तृणमूल कांग्रेस के और दो भाजपा के। 

नामांकन फॉर्म में जिस खंड में एक उम्मीदवार को अपने ख़िलाफ़ लंबित मामलों को सूचीबद्ध करना था, यदि कोई हो, तो तृणमूल के तीन दिग्गजों ने नारद मामले का विवरण दिया था।

केस नंबर, RC 0102017 A0010 दिनांक 16/4/2017 का उल्लेख करने के अलावा, तृणमूल नेताओं ने उन पर IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश), धारा 7 (कानूनी पारिश्रमिक के अलावा अन्य रिश्वत लेने के संबंध में) के तहत दर्ज़ की गई IPC धाराओं का भी विवरण दिया। एक आधिकारिक अधिनियम के), साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (ए), 13 (1) (डी) और 13 (2) (एक लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार)। अपराध का संक्षिप्त विवरण भी शामिल था।

हालांकि, नंदीग्राम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ चुनावी जीत दर्ज़ करने वाले और बाद में विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए शुवेंदु अधिकारी द्वारा दायर हलफनामे में न तो उन धाराओं का कोई उल्लेख था जिसके तहत उन्हें बुक किया गया था और न ही उक्त अपराध का कोई संक्षिप्त विवरण दिया गया था।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने मुख्य आरोपियों में से एक के रूप में नामित होने के बावजूद मामले का कोई जिक्र नहीं किया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस मामले में उन्हें सीबीआई ने क्लीन चिट दी थी या उन्होंने मामले का विवरण नहीं देने का विकल्प चुना था। 

गौरतलब है कि नारद स्टिंग के कथित खुलासे में, तृणमूल के कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नारद न्यूज के संपादक मैथ्यू सैमुअल से नकद धन प्राप्त करते हुए देखा गया, जिन्होंने वादा किए गए एहसान के बदले में एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में खुद को पेश किया।

बता दें कि 17 मई सोमवार को तृणमूल के चार नेताओं और कोलकाता के मेयर सोवन चटर्जी को भी गिरफ्तार किया गया है। हालांकि सीबीआई की एक विशेष अदालत ने उसी दिन शाम को चारों को जमानत दे दिया था, जबकि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने बाद में उसी रात में इस पर रोक लगा दिया।

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