Wed. Jan 29th, 2020

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तीन साल से धूल फांक रहीं मुरथल गैंगरेप की फाइलें

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मुरथल गैंगरेप की तस्वीर।

पूरा देश रोज़ सुनता है कि न्याय में विलम्ब अन्याय है, इसके बावजूद वर्ष 2016 में जाट आन्दोलन के दौरान हरियाणा के मुरथल में हुए सामूहिक बलात्कार कांड की फ़ाइल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के गलियारों में धूल फांक रही है। अगर समाज के निचले तबके के आरोपी हों तो न फांसी की सज़ा मिलने में देरी होती है न हैदराबाद की तरह फर्जी मुठभेड़ में विलम्ब होता है। लेकिन जब मामला वोट बैंक से जुड़ा हो तो मजबूत जातियों के लोगों को पुलिस हाथ लगाने से भी डरती है। चाहे स्वामी चिन्मयानंद हों या भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर हों या फिर आसाराम,रामरहीम या सबसे ताजा भगोड़ा नित्यानंद हो पुलिस और प्रशासन भीगी बिल्ली नजर आने लगता है। 

अपराध मुक्त करने के नाम पर उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर पुलिस मुठभेड़ की घटनाएं हुईं लेकिन एक भी मुठभेड़ ऐसी नहीं हुई जिसमें मुख़्तार अंसारी, बृजेश सिंह, अतीक अहमद, विजय मिश्रा सरीखे कुख्यात लोगों के स्तर का कोई आदतन अपराधी ढेर हुआ हो? ऐसे में हरियाणा की सबसे मजबूत कौम जाटों में बलात्कारी ढूंढ कर सीखचों के पीछे पहुंचाने की इच्छा शक्ति न तो पुलिस में है न सरकार में न ही प्रतिबद्ध होने की रेस में शामिल न्याय तन्त्र में।

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गौरतलब है कि 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरुथल में हाईवे पर गैंग रेप की घटना को अंजाम दिया गया था और एक नहीं दो नहीं पूरे नो गैंग रेप हुए थे। फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन अपने चरम पर था दिल्ली से उत्तर भारत की तरफ बाहर जाने वाले रास्तों पर तथाकथित आंदोलनकारियों का कब्जा हो चुका था। रेल बन्द थी बसें बन्द थीं यानी सार्वजनिक परिवहन के सारे साधन बन्द किये जा चुके थे। ऐसे में 21 फरवरी की रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से महज 48 किमी की दूरी पर सोनीपत जिले के मुरथल में हाईवे पर रात के 10 बजे करीब 200 गाड़ियां एक साथ चल रही थीं। जैसे ही वे हाईवे पर थोड़ा आगे बढ़े सुखदेव ढाबे के करीब खेतों में पहले से छिपे जाट आंदोलनकारियों ने गाड़ियों के काफिले पर हमला बोल दिया।

वे पत्थरों और डंडों से हमला करने लगे। गाड़ियों में सवार लोग बड़ी मुश्किल से जान बचा कर भागे। गाड़ी में मौजूद महिलाएं भी भागीं। कई वाहनों को उन गुंडों ने आग लगा दी। चश्मदीदों के अनुसार इसी बीच आंदोलनकारी पीछे रह गई कुछ महिलाओं को उठा कर ले गए। महिलाओं को ले जाने वाले लोग चिल्ला रहे थे कि इनके साथ बलात्कार करेंगे, और उन्होंने बलात्कार किया भी। चश्मदीद के अनुसार वे लोग रात एक बजे से लेकर सुबह साढ़े पांच तक छिप कर बैठे रहे। उसके बाद वहां एक एसडीएम आई और उसने कहा कि सब अपनी अपनी गाड़ियां ले लो। जब हम गाड़ियों के पास गए तो अधिकतर गाड़ियां जल चुकी थीं। उनसे धुआं निकल रहा था।

पहले तो पुलिस ने ऐसी कोई घटना के होने से ही इंकार कर दिया उसके न्यायालय के हस्तक्षेप से इस गैंग रेप की घटना की जांच वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी ममता सिंह की अध्यक्षता वाला एक विशेष जांच दल को सौंपी गयी। यह एसआईटी भी मामले की जांच के दौरान कोई भी रेप पीड़िता ढूंढने में नाकाम रही थी और न्यायालय को इसकी जानकारी दे दी गई। इस पर 2017 में पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को फटकार लगाई।  

सोनीपत की तत्कालीन एडिशनल सेशन जज गगन गीत कौर ने जांच पर सवाल उठाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि एसआईटी सदस्यों में आपसी तालमेल का अभाव है। डीएसपी भारती डबास ने कोर्ट में कहा कि डीएनए रिपोर्ट के साथ कुछ सीसीटीवी फुटेज भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजी गई हैं, लेकिन सप्लीमेंटरी चालान में फुटेज का जिक्र नहीं किया गया। महिला अपराध के मामलों की सुनवाई करने वाले जज गगन जीत कौर ने कहा कि हाईकोर्ट में यह नहीं बताया गया कि ट्रायल कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया है। जांच में शामिल कुछ पुलिस अफसरों को सप्लीमेंटरी चालान में दिए दस्तावेजों की जानकारी तक नहीं है मार्च 2017 में खबर आई कि ट्रायल जज गगनजीत कौर को परेशान किया जा रहा है। हाईकोर्ट जज एसएस सरन ने कहा कि हमें बताया गया कि ट्रायल जज पर दबाव डाला जा रहा है। कृपया महिला जज पर दबाव न डालें और उन्हें काम करने दें।  

हाईकोर्ट ने 2017 में मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के संकेत दिए, लेकिन अभी तक यह जांच सीबीआई को सौंपी नहीं गयी है। अब हरियाणा में जाट राजनीति की असलियत यह है कि 9 गैंगरेप कर चुके आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन दबाव इतना है कि इंसाफ़ होना तो दूर जांच भी शुरू नहीं हो पा रही है।  

हरियाणा के चर्चित कथित मुरथल गैंगरेप मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 30 अगस्त 2018 को नए आदेश जारी किए थे। बीते दिन हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा जाट आंदोलन के दौरान दर्ज 407 एफआईआर को वापस लेने की प्रक्रिया पर रोक के आदेश दिए। इसी के साथ हाईकोर्ट ने सरकार को कहा कि वह इस मामले में किसी तरह की पैरवी ना करें व ट्रायल कोर्ट केस वापस लेने के मामले में किसी तरह का फैसला ना करें।

हाईकोर्ट ने कहा कि चल रहे मामले की सुनवाई सीबीआई को ट्रांसफर की जाए या नहीं इस मामले पर अगली सुनवाई पर तय किया जाएगा। वहीं हाईकोर्ट ने इस मामले को कई स्तर में बांट कर सुनवाई करने का निर्णय लिया है जिसमें मुरथल गैंगरेप, जाट आंदोलन के दौरान हिंसा, मूनक नहर में तोड़फोड़ व पुलिस की जांच, हाईकोर्ट इन स्तर पर इस मामले की अगली सुनवाई करेगा। अब 12 दिसम्बर को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हैदराबाद जैसी हैवानियत की घटना गुरुवार को सामने आई। एक साल पहले गैंगरेप का शिकार हुई युवती को गुरुवार तड़के आरोपियों ने चाकू मारकर घायल किया, फिर उस पर तेल छिड़क कर जिंदा जलाने की कोशिश की। पीड़िता ने दिल्ली के अस्पताल में डीएम तोड़ दिया है। घटना के तत्काल बाद पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में शिवम त्रिवेदी और शुभम त्रिवेदी मुख्य आरोपी हैं जिन पर अगवा कर गैंगरेप का आरोप है। दोनों आरोपित जमानत पर छूटे थे जबकि शिवम त्रिवेदी चार दिन पहले ही जमानत पर छूटकर आया था। इनके अलावा पुलिस ने मुख्य आरोपियों की मदद करने वाले उमेश बाजपाई, हरिशंकर त्रिवेदी और राम किशोर त्रिवेदी को भी गिरफ्तार कर लिया है। अब ये पांचों पंडित हैं और बकौल प्रियंका गांधी इनका भाजपा से लिंक है, इसलिए इनके साथ पुलिस नरमी से पेश आ रही है ।

आसाराम, रामरहीम, चिन्मयानन्द और कुलदीप सेंगर के कारनामे तो सर्वविदित हैं, सबसे ताज़ा मामला नित्यानंद का है। नित्यानंद फिलवक्त फरार है। नित्यानंद के अहमदाबाद आश्रम योगिनी सर्वज्ञपीठम में दो लड़कियों के गायब होने के बाद उसके खिलाफ पिछले महीने एक एफआईआर दर्ज हुई है। उस पर बच्चों के अपहरण और उनके जरिए गलत तरीके से आश्रम के अनुयायियों से चंदा जमा करने के आरोप लगे। पुलिस उसकी तलाश कर ही रही थी कि खबर आई कि उसके इक्वाडोर के निकट एक द्वीप पर एक हिंदू राष्ट्र ‘कैलाशा’ का गठन कर लिया है, जिसका अपना झंडा और राजनीतिक व्यवस्था है। बंगलुरु के बिदादी आश्रम में ही पहली बार विवादित धर्मगुरु का पहला कारनामा 2010 में सामने आया था। एक अभिनेत्री के साथ आपत्तिजनक स्थिति में उसका एक वीडियो वायरल हो गया था और इसके बाद करीब आठ साल तक वह गुमनामी में चला गया। एक साल पहले वह अपने नए अवतार में प्रकट हुआ। इस बार वह भूरे रंग के कपड़े और शेर की खाल पहने हुए था। उसकी दाढ़ी मूंछ बढ़ी हुई थी।

गुजरात के अहमदाबाद में अपना आश्रम चलाने के लिए बच्चों को कथित तौर पर अगवा करने और उन्हें बंधक बनाकर अनुयायियों से चंदा जुटाने के काम में लगाने के आरोप में स्वयंभू बाबा स्वामी नित्यानंद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने दो महिला अनुयायियों-साध्वी प्राण प्रियानंद और प्रियातत्व रिद्धि किरण को भी गिरफ्तार किया है। दोनों पर कम से कम चार बच्चों को कथित तौर पर अगवा करने और उन्हें एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का आरोप है। आश्रम के लिए चंदा एकत्र करने के काम में इन बच्चों का इस्तेमाल बाल श्रमिक के तौर पर किया जा रहा था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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