Saturday, October 16, 2021

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नॉर्थ ईस्ट डायरीः नौकरी गंवाने वाले त्रिपुरा के 10 हजार शिक्षक कर रहे हैं आंदोलन

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संयुक्त आंदोलन समिति (जेएमसी) के बैनर तले तीन संगठनों का एक संयुक्त मंच त्रिपुरा में अपनी नौकरी खो चुके 10,000 से अधिक शिक्षकों की समस्या का स्थायी समाधान की मांग के समर्थन में अनिश्चितकालीन सामूहिक धरना-प्रदर्शन कर रहा है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने दो महीने पहले शिक्षकों को उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया था। जब देब ने कोई कदम नहीं उठाया तो शिक्षकों ने अपना आंदोलन शुरू कर दिया।

10,323 शिक्षकों का चयन 2002, 2006 और 2009 में जारी विज्ञापनों के अनुसार किया गया था, जिसे तन्मय नाथ और अन्य द्वारा त्रिपुरा के उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी। बाद में, उच्च न्यायालय त्रिपुरा ने 2014 में शिक्षकों के चयन को निरस्त करने की घोषणा की, जिस निर्णय को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में बरकरार रखा।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार के अन्य विभागों में 1,400 शिक्षकों को नौकरियों के लिए भर्ती किया गया। इस तरह वंचित शिक्षकों की संख्या अब 8,882 हो गई है। इन 8,882 शिक्षकों ने अपना संघर्ष जारी रखा है।

शिक्षक भी चार अलग-अलग समूहों में विभाजित हो गए। अमरा 10,323, ऑल त्रिपुरा विक्टिमाइज्ड 10,323, ऑल त्रिपुरा 10,323 एडहॉक टीचर्स इम्प्लॉईज ऑर्गनाइजेशन, और जस्टिस फॉर 10,323। ऑल त्रिपुरा विक्टिमाइज्ड को छोड़कर तीन संगठन जेएमसी बनाने के लिए एक साथ आए और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया।

जेएमसी के नेता बिमल साहा ने कहा कि भाजपा-आईपीएफएफटी की अगुवाई वाली सरकार ने राजनीतिक हित के लिए शिक्षकों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने 2 दिसंबर तक बर्खास्त किए गए 10,323 शिक्षकों के लिए एक स्थायी समाधान खोजने का आश्वासन दिया था। हमने काफी इंतजार किया और अब सीएम द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद ही आंदोलन वापस लिया जाएगा कि हमारी समस्याओं को स्थायी रूप से हल किया जाएगा।”

सैकड़ों की संख्या में बर्खास्त किए गए शिक्षक अगरतला सिटी सेंटर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के सामने बैठे हैं।

पत्रकारों के साथ बात करते हुए, अमरा 10323 संगठन के नेता दलिया दास ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सितंबर में एक स्थायी समाधान प्रदान करने का आश्वासन दिया था और बर्खास्त शिक्षकों की भर्ती का वचन दिया था। उन्होंने कहा, “हमें अपनी नौकरी खोए हुए नौ महीने से अधिक हो गए हैं। सीएम ने हमें स्थायी समाधान का आश्वासन दो महीने पहले दिया था, लेकिन उनकी तरफ से आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। हमने काफी इंतजार किया और अब परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।” दास ने कहा कि हमने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक हमें लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता है।

दास ने यह भी कहा कि जब तक मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से मिलने नहीं आएंगे और उनकी समस्याओं को हल करने का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

शिक्षकों की मांगों में उन शिक्षकों के परिवारों के लिए रोजगार की मांग भी शामिल है जो नौकरी छूटने के कारण तनाव पैदा होने और मानसिक आघात के कारण मारे गए हैं।

इससे पहले 22 सितंबर को राज्य मंत्रिमंडल ने विभिन्न सरकारी विभागों के ग्रुप सी और ग्रुप डी के रिक्त पदों में या आउटसोर्सिंग के माध्यम से 10,323 समाप्त शिक्षकों के लिए वैकल्पिक नौकरी भर्ती प्रदान करने के लिए एक नीति तैयार करने के लिए सहमति दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में त्रिपुरा सरकार को शिक्षकों के पदों के लिए चयनित होने के लिए 31 मार्च 2023 तक आयु की छूट और बर्खास्त किए गए शिक्षकों को अवसर देने की अनुमति दी है और जो इस तरह के प्रयासों में असफल होते हैं, वे अपने वैकल्पिक रोजगार को बनाए रख सकते हैं।

त्रिपुरा सरकार ने राज्य प्रारंभिक शिक्षा विभाग के तहत विभिन्न पदों की पहचान की थी। इनमें मिड-डे मील सहायकों के 6,000 पद, हॉस्टल वार्डन के 300 पद और मिड-डे मील पर्यवेक्षकों या समन्वयकों के 1,000 पद सृजित होंगे। समाज कल्याण और सामाजिक शिक्षा विभाग के तहत, अर्ली चाइल्डहुड ऑर्गनाइज़र के 4,000 पद भी अब तक खाली पड़े हैं।

त्रिपुरा में कुल 4,400 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं, जिनमें लगभग 27,000 शिक्षक राज्य भर में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नेतृत्व में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (माकपा) के प्रतिनिधिमंडल का पांच सदस्यीय दल राज्य में बर्खास्त शिक्षकों द्वारा चल रहे आंदोलन पर चर्चा करने के लिए अगरतला में सीएम बिप्लब देब से मिला है। माणिक सरकार की अगुवाई में माकपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से बर्खास्त शिक्षकों की शिकायतों को तुरंत हल करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री बिप्लब देब के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए, माणिक सरकार ने कहा कि त्रिपुरा उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने 2011, 2014 और 2017 में 10,323 सरकारी शिक्षकों की नौकरियों को समाप्त कर दिया था। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने इन शिक्षकों को वैकल्पिक रूप से समायोजित करने के लिए 13,000 पदों का सृजन किया। भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार करते समय सत्ता में आने पर इन बर्खास्त शिक्षकों की नौकरियों को नियमित करने का वादा किया था।

माणिक सरकार ने बताया कि हैरानी की बात यह रही कि सत्ता में आने के बाद बिप्लब देब सरकार ने शिक्षकों के लिए कुछ भी नहीं किया है। जानकारी के लिए बता दें कि त्रिपुरा में बर्खास्त शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन के 20 दिन हो गए हैं, लेकिन सरकार शिक्षकों की मांग पर ध्यान नहीं दे रही है।

(दिनकर कुमार द सेंटिनेल के पूर्व संपादक हैं। आजकल वह गुवाहाटी में रहते हैं।)

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