Friday, December 3, 2021

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नॉर्थ-ईस्ट डायरीः केंद्र की मंजूरी के बिना ही मेघालय सरकार लागू करेगी वर्चुअल आईएलपी व्यवस्था

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मेघालय में जन संगठन लंबे समय से इनर लाइन परमिट (आईएलपी) व्यवस्था लागू करने के लिए आंदोलन करते रहे हैं। अब तक केंद्र की मोदी सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी है। इन संगठनों ने विलंब होने पर आंदोलन तेज करने की धमकी दे रखी है। इन दबाव समूहों को संतुष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने राज्य में ‘बाहरी’ लोगों के बेलगाम प्रवेश को रोकने के लिए इसी महीने से वर्चुअल आईएलपी व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

आईएलपी एक विशेष परमिट है, जिसके तहत भारत के अन्य हिस्सों के नागरिकों को तीन राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नगालैंड में प्रवेश करने से पहले अनुमति की आवश्यकता होती है। नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करते हुए मोदी सरकार ने पिछले साल मणिपुर में भी आईएलपी लागू करने का प्रावधान किया है। यह ऑनलाइन या प्रत्यक्ष रूप से आवेदन करने के बाद प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें यात्रा की तारीखों और उन क्षेत्रों को निर्दिष्ट किया जाता है जहां आईएलपी धारक यात्रा कर सकते हैं।

जब 1873 के बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट के तहत नियम लागू किया गया था, तो उद्देश्य इन क्षेत्रों के भीतर व्यापार करने से भारतीयों को रोक कर अंग्रेजों के अपने व्यावसायिक हितों की रक्षा करना था।

पिछले साल नवंबर में, मेघालय मंत्रिमंडल ने मेघालय निवासियों की सुरक्षा अधिनियम 2016 में संशोधन को मंजूरी दे दी, जिससे ऐसे कानून बनेंगे, जिनके लिए अनिवासी आगंतुकों को अपना पंजीकरण कराना होगा।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए संगमा ने कहा कि उमलिंग चेक प्वाइंट के लिए कर्मचारियों की भर्ती और प्रशिक्षण चल रहा है और क्रिसमस से पहले राज्य के बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की जांच करने के लिए एक व्यवस्था लागू की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने राज्य में प्रवेश करते समय जांच से होने वाली कठिनाई के बारे में शिकायत की है। संगमा ने कहा, “हमने उन्हें समझाया है कि राज्य को अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगंतुकों की जांच की व्यवस्था को बहाल रखना होगा।”

यह कहते हुए कि प्रवेश और निकास बिंदु पर जांच प्रणाली का कार्यान्वयन जल्द ही एक वास्तविकता होने जा रहा है, उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को राज्य में प्रवेश करने के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा और उन्हें एक सॉफ्टवेयर और ऐप के माध्यम से सरल पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना होगा।

संगमा ने कहा, “हम इस उद्देश्य की सफलता की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और साथ ही साथ लोगों के लिए इसका उपयोग करना आसान है।”

जहां तक ​​प्रवेश और निकास बिंदु का सवाल है, मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने के कगार पर है और भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मेघालय में आईएलपी की मांग पर मोदी सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों की राय है कि चूंकि पूरे मेघालय को बंगाल पूर्वी सीमांत विनियम, 1873 ने भी ब्रिटिश काल में कवर नहीं किया था, इसलिए राज्य में आईएलपी की शुरुआत का सवाल ही नहीं उठता।

यह भी तर्क दिया जा रहा है कि चूंकि मेघालय छठी अनुसूची वाला राज्य है, इसलिए इस राज्य में आईएलपी के कार्यान्वयन की आवश्यकता ‘स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा के लिए’ उत्पन्न नहीं होती है।

इसके अलावा मेघालय एक ‘पारगमन राज्य’ है, और मिज़ोरम, त्रिपुरा, मणिपुर और यहां तक ​​कि दक्षिण असम में बराक घाटी तक सड़क मार्ग से जाने वाले लोग इस राज्य से होकर गुजरते हैं और यदि मेघालय में आईएलपी को लागू किया जाता है, तो पारगमन यात्रियों के लिए बड़ी जटिलताएं होंगी।

दूसरी ओर मेघालय में जो लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हैं, वे आईएलपी को पेश करने के सरकार के फैसले से खुश नहीं हैं, क्योंकि यह पर्यटन उद्योग को तबाह करने जा रहा है।

(दिनकर कुमार ‘द सेंटिनेल’ के संपादक रहे हैं।)

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