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निषाद समाज नहीं, खनन माफियाओं के साथ है सरकार: प्रियंका गांधी

“जो पर्यावरण है, नदियां हैं, जंगल हैं उनके आसपास रहने वाले जो लोग हैं, उनकी कमाई उसके जरिये से होती है और वो उसे हानि कभी नहीं पहुंचाते हैं, क्योंकि जब आपका जीवन उससे जुड़ा हुआ है तो आप उस चीज की हानि नहीं करेंगे, लेकिन जो बड़े-बड़े उद्योगपति हैं, ठेकेदार हैं, उनका जीवन तो नदी से जुड़ा नहीं होता, जंगल से जुड़ा नहीं होता, तो जब वो काम करते हैं तो व्यापार करते हैं। उनको इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि नदी की हानि हो रही है, जानवरों की हानि हो रही है, या जंगलों की हानि हो रही है। ये समझ आप में है। आप में ये समझ इसलिए है, क्योंकि आप पुश्तों से ये काम कर रहे हैं, और इस पर आपका जीवन निर्भर है।

इस काम के बिना आपका जीवन ही मुश्किल है। ये बात जब सरकार समझती है और आपके प्रति सरकार जागरूक होती है तब ऐसे नियम-क़ानून और नीतियां बनाती है, जिससे आपका भला हो और नदी का भी भला हो, लेकिन मौजूदा सरकार आपके लिए नहीं बल्कि खनन माफिया के लिए चल रही है।” पर्यावरण और जनजातियों के बीच के सांस्कृति-आर्थिक संबंधों का सूत पकड़ते हुए उपरोक्त बातें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रयागराज के बांसवार में निषाद समुदाय के लोगों के बीच कहीं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में जिला प्रयागराज के बांसवार गांव पहुंची। बांसवार में निषाद समाज की महिलाओं के बीच बैठकर उनका दुख-दर्द पूछा-सुना। प्रियंका गांधी ने कहा कि मैं यहां आपकी समस्याओं को समझने, आपके दुखों को सुनने के लिए आई हूं। आप लोगों ने मुझे बुलाया इसके लिए आभार।

सुजीत निषाद का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जब मौनी अमावस्या पर मैं गंगा स्नान के लिए आई थी, तो इन्होंने मुझे सब बताया कि कैसे आप लोगों को पहले पट्टे मिलते थे। आपका अधिकार होता था उन पर और आपको कुछ चीजों की छूट थी और आपको तब छूट इसलिए थी, क्योंकि उस समय कि जो सरकार थी वो समझती थी कि आपके अधिकार क्या हैं। और ये बात वो समझती थी, आज ये बात पूरी दुनिया समझने लग गई है।

प्रियंका गांधी ने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आपने सुना होगा कि दिल्ली में तीन महीने से किसान आंदोलन चल रहा है। किसलिए? क्योंकि उनके भी मामलों को सरकार समझ नहीं रही है। जो तीन कृषि क़ानून बनाए गए हैं, उससे किसान का नुकसान हो रहा है और बड़े-बड़े उद्योगपतियों-खरबपतियों का फायदा हो रहा है। उसी तरह से जो क़ानून गंगा नदी, जमुना पर और बाकी नदियों पर लागू है वो क़ानून आपकी भलाई के लिए नहीं है। नदी की भलाई के लिए नहीं है। वो क़ानून इसलिए लागू किया जा रहा है, ताकि उद्योगपतियों का फायदा हो। बड़ी-बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों को गंगा में बालू खनन की इज़ाज़त है और ये क़ानून ऐसा बनाया गया है कि वो अपना कारोबार-धंधा कर सकते हैं। गंगा नदी से कमाई कर सकते हैं, लेकिन आप नहीं कर सकते हैं। ये सरकार किसानों महिलाओं, मल्लाहों की समस्याओं को समझ नहीं रही है। न ही इन लोगों की मदद करना चाहती है।

कांग्रेस नेता ने खुद को महिलाओं से रिलेट करते हुए कहा, “मैं भी आपकी तरह महिला हूं। मैं समझ सकती हूं कि आपकी पीड़ा कैसी है। अगर आपको यूपी पुलिस द्वारा मारा-पीटा गया है तो शर्म आनी चाहिए यूपी के शासन-प्रशासन को। मैंने वीडियो देखा है, जिस तरह से लोग आए हैं और आप महिलाओं को आपके बच्चों को पीटा है, वो शर्मनाक है। 

निषाद समाज को आश्वासन देते हुए प्रियंका गांधी ने आखिर में कहा कि उन्होंने आपकी नाव तोड़ी है हम ये मुद्दा उठाएंगे। पूरी तरह से आपकी लड़ाई लड़ेगें। केवट-निषाद समाज ने बहुत मदद की है सरकार की। आपके वोट से ही ये सरकार सत्ता में आई है, लेकिन ये बात ये भूल गए हैं और बार-बार मैं ये बात कहती हूं कि जब नेता भूल जाते हैं कि उनको सत्ता किसने दी है तब वो भटकने लगते हैं। इनको समझ नहीं आया है कि इनको बनाने वाले आप हैं। इनको आपके लिए काम करना चाहिए।      

भाजपा सरकार ने हमारी उस नाव को तोड़ा जिसकी हम पूजा करते हैं
इससे पहले केवट महिलाओं ने प्रियंका गांधी को बताया, “हमारे पास न खेती है, न कोई अन्य व्यवसाय है। हम लोग इसी काम पर टिके हुए हैं। ये हमारा पुश्तैनी धंधा है। अगर ये चला गया तो हम जिंदा नहीं रह पाएंगे। भाजपा सरकार ने हमारी उस नाव को तोड़ दिया, जिसकी हम पूजा करते हैं।”

महिलाओं ने बताया, “जब जिला प्रशासन के लोग 4 जनवरी को हमारी नाव तोड़ने आए तो हम वहां बैठ गए। हम उठ नहीं रहे थे, तो उन्होंने हमें लाठियों से मारा। हमारे साथ बदतमीजी की और हमें गंदी-गंदी गालियां दीं। हम चाहते हैं कि हमारे साथ बदतमीजी करने वाले जिला प्रशासन के लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई हो।”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, “पहले इनको (निषाद) नदी, नाले, मिट्टी पर, ज़मीन पर अधिकार था, लेकिन सरकार ने इसको निरस्त कर दिया है।”

गंगा स्नान करने आईं प्रियंका गांधी को सुजीन निषाद ने बताई थी परेशानी
आज जब बांसवार के लोगों से मिलने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर पहुंची तो उन्हें लेने के लिए सुजीत निषाद और बलराम साहनी एयरपोर्ट पर लेने पहुंचे थे। मौनी अमावस्या को सुजीत निषाद की नाव पर ही बैठी थीं प्रियंका गांधी।

बता दें कि 11 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रियंका गांधी संगम स्नान के लिए प्रयागराज आई थीं। अरैल घाट से संगम तक प्रियंका गांधी ने सुजीत निषाद नाम के नाविक की नाव से संगम पर पहुंच कर स्नान किया था। इस दौरान प्रियंका ने नाविक सुजीत से जब बात कर उसके घर परिवार और रोजी-रोटी के बारे में पूछा तो सुजीत ने खुद की तीन बेटियां होने के साथ एक भाड़े की नाव चलाने के चलते परिवार का सही से भरण-पोषण न कर पाने की बात बताई थी। इसके साथ सुजीत निषाद ने बांसवार गांव के निषादों और मछुआरों की पुलिस द्वारा नाव भी तोड़े जाने, बालू खनन से निषाद समाज को दरकिनार किए जाने की जानकारी देते हुए प्रियंका गांधी को बांसवार आने का निमंत्रण भी दिया था।

रातोंरात तोड़ी गई नावों की मरम्मत करने के लिए भेजे गए मिस्त्री
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा निषाद समुदाय से मिलने बांसवार आने की ख़बर का असर ये हुआ कि 4 जनवरी को जेसीबी लगाकार खुद जिला प्रशासन द्वारा तोड़ी गई नावों की मरम्मत के लिए खुद जिला प्रशासन ने मिस्त्रियों को भेजकर उन की मरम्मत करवाई। 

4 जनवरी गुरुवार को यूपी पुलिस ने लाठीचार्ज करके 30 मजदूरों को लहूलुहान कर दिया और जेसीबी मशीन से 16 नावें तोड़ डालीं। अत्याचार की इंतेहा यह कि पुलिस-प्रशासन ने निषाद समाज के लोगों पर ही आरोप लगा दिया कि बालू मजदूरों ने स्वयं ही अपनी नावें तोड़ी हैं। 4 फरवरी की दोपहर एडीएम प्रशासन विजय शंकर दुबे और एसपी यमुनापार, क्षेत्राधिकारी करछना के नेतृत्व में कई थानों की भारी पुलिस बल स्टीमर और कुत्ते के साथ ठाकुरी का पूरा, बांसवार घाट पर बालू मजदूरों पर हमला कर 30 लोगों को घायल कर दर्जनों बोट तोड़ डालीं। कई पुलिस स्टीमर, कुत्ते के साथ पैदल ठाकुरी का पूरा घाट पर पड़ी पुरानी बालू को जेसीबी से यमुना नदी में ढकेल दिया और बसवार घाट पर बंधी बोटों को जेसीबी से तोड़ डाला। गांव वालों ने विरोध किया तो पुलिस ने लाठी चार्ज कर 30 लोगों को घायल किया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने बालू खनन में नावों को प्रतिबंधित किया
दरअसल प्रयागराज में निषाद समाज का लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। ये लोग लगातार मांग कर रहे है कि 24 जून 2019 को उत्तर प्रदेश सरकार ने बालू खनन में नावों को प्रतिबंधित कर दिया, जिस कारण लाखों लोग बेरोजगार हो गए।इलाहाबाद हाई कोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के कई शासनादेश हैं कि नदियों में बालू का खनन बीच धारा से होना चाहिए, जिससे तटबंध और तटबंध के किनारे जीवजंतु सुरक्षित रहें। लंबे विरोध के बावजूद प्रयागराज प्रशासन समस्या को हल करने के बजाय आरएसएस-भाजपा के नेता से मिलकर बालू खनन का काम प्रारंभ कर अवैध वसूली करते रहे हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on February 21, 2021 7:08 pm

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