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बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद पीएम केयर्स फंड पर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पीएमओ से मांगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पीएम केयर्स फंड पर पीएमओ को नोटिस दिया है। इस सिलसिले में दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पीएमओ के अधीन कार्यरत सार्वजनिक सूचना अधिकारी को इस बात का जवाब देने का निर्देश दिया है कि पीएम केयर्स फंड कैसे आरटीआई के दायरे में नहीं आता है। याचिका में पीएमओ से जुड़े सीपीआईओ के उस फैसले को चुनौती दी गयी है जिसमें उसने कहा था कि पीएम केयर्स आरटीआई के दायरे में नहीं आता है। 

हालांकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी याचिका का विरोध किया और कहा कि याचिकाकर्ता का इस मामले में याचिका दाखिल करने का ज्यूरिडिक्शन ही नहीं बनता है। इसलिए इस मामले को नहीं सुना जाना चाहिए और कोर्ट को याचिका खारिज कर देनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने इस मामले में सेंट्रल पब्लिक इनफॉर्मेशन ऑफिसर को ज्यूरिडिक्शन और पीएम केयर्स फंड के आरटीआई के दायरे में ना आने से जुड़े दोनों मुद्दों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 8 हफ्ते का वक्त दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।

दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका सम्यक गंगवाल की तरफ से उनके वकील देवप्रिया मुलिक और आयुष श्रीवास्तव ने दाखिल की है। इससे पहले पीएम केयर्स फंड को आरटीआई के दायरे में लाने को लेकर लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल ने सुनवाई से इनकार कर दिया था।

याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय के सीपीआईओ से जवाब मांगा, जिन्होंने पीएम केयर्स के फंड को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत नहीं आने का हवाला देकर उससे जुड़ी जानकारी देने से इंकार कर दिया था। सम्यक गंगवाल द्वारा दायर याचिका में सीपीआईओ के दिनांक 02/06/20 के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी को इस आधार पर देने से इनकार कर दिया गया था कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि एक मई को उसने ऑनलाइन आरटीआई आवेदन डालकर पीएम केयर्स फंड बनाए जाने से जुड़े दस्तावेज और किसकी मंजूरी पर यह फंड बनाया गया था, की तमाम जानकारियां मांगी थी।

सेंट्रल पब्लिक इनफार्मेशन ऑफिसर की तरफ से 2 जून को जवाब आया कि यह जानकारी उनको नहीं दी जा सकती, क्योंकि पीएम केयर्स फंड पब्लिक अथॉरिटी नहीं है और इससे जुड़ी जानकारी इसकी वेबसाइट पर देखी जा सकती। इसके उलट याचिकाकर्ता का कहना था कि फंड से जुड़ी जानकारियां वेबसाइट पर मौजूद नहीं हैं और जनता का पैसा इकट्ठा करने के लिए बनाया गया पीएम केयर्स फंड आरटीआई के दायरे में आता है और इसकी जानकारी जनता के साथ साझा की जानी चाहिए।

कोर्ट ने पीएमओ के साथ-साथ पीएमओ के सीपीआईओ को वर्तमान याचिका में उठाए गए सवालों पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इसके बाद इस मामले को 28 अगस्त को उठाया जाएगा। 

इसके पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने 15 मई, 20 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह एक वकील द्वारा दायर याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे जिसमें मांग की गई है कि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा पीएम केयर्स फंड का ऑडिट करवाया जाए और इस फंड में प्राप्त धन की जानकारी की सार्वजनिक घोषणा की जाए। पीएम केयर्स फंड कोविड -19 के प्रकोप के कारण आकस्मिकताओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट फंड है।

नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति माधव जामदार ने वकील अरविंद वाघमारे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की और याचिका पर जवाब के रूप में केंद्र को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। पीएम केयर फंड का गठन 28 मार्च को किया गया था और याचिकाकर्ता वकील ने भी इसमें योगदान देने का दावा किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स फंड में पहले सप्ताह में 6500 करोड़ रुपए एकत्र किए जाने की सूचना है, बाद में अब तक एकत्र धन के बारे में डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

याचिका के अनुसार पीएम केयर्स फंड ट्रस्ट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में है और रक्षा, गृह और वित्त विभागों के मंत्री इस ट्रस्ट के सदस्य हैं। यह कोरोना वायरस प्रकोप द्वारा उत्पन्न किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ बनाया गया था। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पीएम केयर्स फंड के दिशा निर्देशों के अनुसार, चेयरपर्सन और तीन अन्य ट्रस्टियों के अलावा, चेयरपर्सन को तीन और ट्रस्टियों की नियुक्ति या नामांकन करना था। हालांकि, 28 मार्च, 2020 को ट्रस्ट के गठन के बाद से आज तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है।

याचिका में कहा गया कि “आम जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए, सरकार को आज पीएम केयर्स फंड  द्वारा एकत्र किए गए धन की घोषणा करने के लिए एक निर्देश जारी करना आवश्यक है और यह भी बताने को कहा जाए कि कोरोना वायरस द्वारा प्रभावित नागरिकों के लाभों के लिए इसका उपयोग कैसे किया जाता है?

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on June 11, 2020 6:03 pm

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