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Monday, September 20, 2021

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नॉर्थ ईस्ट डायरी: उत्तर-पूर्व के भाजपा शासित राज्यों के सिर पर भी सवार हो रहा है लव जिहाद का भूत

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आरएसएस और भाजपा को लगता है कि मुस्लिम विद्वेष और नफरत की राजनीति को जितना प्रोत्साहित किया जाएगा कूढ़मगज हिन्दू मतदाताओं को गुलाम बनाकर रखना उतना ही आसान होगा और नफरत के खेल को जारी रखते हुए इस देश के लोकतंत्र को दफन करते हुए मध्ययुगीन बर्बर शासन को कायम करने का मार्ग भी प्रशस्त होता जाएगा। मोदी राज के तमाम फैसले इसी तरह नफरत की राजनीति पर आधारित रहे हैं। अब उसने लव जिहाद का नया शगूफा छोड़ा है और उत्तर प्रदेश के धर्मांध और निरंकुश मुख्यमंत्री योगी ने तो इसको लेकर अध्यादेश भी जारी कर दिया है। लव जिहाद का प्रहसन शुरू करने का आदेश संघ ने नागपुर से जारी किया है तो उसका पालन करने में देश के दूसरे भाजपा शासित राज्यों की तरह उत्तर पूर्व के राज्य भी जुट गए हैं।

असम की भाजपा सरकार ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ एक कानून का मसौदा तैयार किया है। इसकी पुष्टि असम के कैबिनेट मंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने एक इंटरव्यू में की है।

शर्मा ने कहा कि 2021 असम विधानसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद यह विधेयक अधिनियमित किया जाएगा।

उन्होंने उल्लेख किया कि असम सरकार को कई शिकायतें मिली हैं जब कोई लड़का लड़कियों को शादी का लालच देकर अपनी असली पहचान और धर्म को छुपाता है। विवाह दो व्यक्तियों के बीच एक स्वैच्छिक रिश्ता है–इस बात को नकारते हुए भाजपा नेता ने यह स्पष्ट किया कि रिश्ते में किसी भी तरह का धोखा शामिल नहीं होना चाहिए। प्रस्तावित विधेयक के संदर्भ में शर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी व्यक्ति शादी करने के लिए झूठी पहचान प्रदान न कर सके।

“विवाह को सबसे पवित्र कर्मों में से एक माना जाता है। यह उन परिस्थितियों में होना चाहिए जहां कोई धोखाधड़ी नहीं हो। कानून यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी व्यक्ति झूठी पहचान, धर्म की गलत जानकारी प्रदान नहीं कर सकता है। हमने एक कानून का मसौदा तैयार किया है। हमने अन्य राज्यों में भी लागू कानूनों को देखा है। लेकिन जैसा कि मैंने आपको बताया, हम अब चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इसलिए हम इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं अन्यथा लोग कहेंगे कि यह एक चुनावी एजेंडा है। लेकिन, जब हम सत्ता में वापस आएंगे, निश्चित रूप से हम इसे लागू करने जा रहे हैं,” शर्मा ने कहा।

दूसरी तरफ त्रिपुरा में हिंदू जागरण मंच देश भर में कथित ‘लव जिहाद’ पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी कानून की मांग कर रहा है और संगठन के लगभग 300 सदस्यों ने अपनी मांग के समर्थन में शुक्रवार को गोमती जिले के उदयपुर में सुभाष पुल पर राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया।

देश भर में कथित ‘लव जिहाद’ के उदाहरणों का हवाला देते हुए मंच ने दावा किया कि हाल ही में सिपाहीजला जिले के सीमावर्ती गाँव- बॉक्सानगर में एक हिंदू नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार जैसी घटना के पीछे अल्पसंख्यक समुदाय के एक युवक का हाथ था। आंदोलनकारियों ने लव जिहाद पर रोक लगाने के लिए एक कड़े कानून की मांग की।

27 अक्तूबर को युवक के खिलाफ पोस्को अधिनियम की धारा 366 (ए), 376 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था। दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान अपहरण के कुछ दिनों बाद जिले के दुर्लभनारायण क्षेत्र से नाबालिग लड़की को बरामद किया गया, लेकिन अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

“प्रदर्शनकारियों ने लव जिहाद की जाँच के लिए एक सख्त कानून की मांग की। नाबालिग के अपहरण और बलात्कार का मुख्य आरोपी फरार है और आरोपी का पता लगाने के लिए पुलिस जांच जारी है,” उदयपुर प्रखण्ड के पुलिस अधिकारी ध्रुव नाथ ने बताया।

“कोविड -19 महामारी के दौरान त्रिपुरा के विभिन्न पुलिस थानों में लव जिहाद के लगभग नौ मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से किसी भी मामले में किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है,” हिन्दू जागरण मंच के अध्यक्ष उत्तम डे ने कहा कि एक कानून इस तरह के मामलों में सुरक्षा का काम कर सकता है।

हालांकि पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि कथित ‘लव जिहाद’ से संबंधित कोई भी मामला पिछले तीन-चार महीनों में राज्य में दर्ज नहीं किया गया था।

विरोध प्रदर्शन का आयोजन उस दिन किया गया जिस दिन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जबरन या कपटपूर्ण धर्मांतरण के खिलाफ अध्यादेश को मंजूरी दी, जिसमें 10 साल तक की कैद और विभिन्न श्रेणियों के तहत 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ का कानून प्रभावी हो गया है। राज्यपाल ने गैर कानूनी तरीके से धर्मांतरण पर रोक से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दे दी। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विधानसभा उपचुनाव के दौरान ऐलान किया था कि प्रदेश में लव जिहाद को लेकर एक कानून लाया जाएगा। यूपी की कैबिनेट ने 24 नवंबर को “गैर कानूनी धर्मांतरण विधेयक” को मंजूरी दी थी। सरकार का कहना है कि इस कानून का मक़सद महिलाओं को सुरक्षा देना है।

इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार लव जिहाद पर कानून लाने की तैयारी कर चुकी है। हरियाणा, कर्नाटक और कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी लव जिहाद पर कानून लाने की कवायद चल रही है। इस प्रस्तावित कानून के तहत, धर्म छिपाकर किसी को धोखा देकर शादी करने पर 10 साल की सज़ा होगी। माना जा रहा है कि यूपी सरकार आगामी विधानसभा सत्र में लव जिहाद से जुड़े विधेयक लाकर इसे पारित कराएगी।

शादी के लिए धर्मांतरण रोकने के लिए विधेयक में प्रावधान है कि लालच, झूठ बोलकर या जबरन धर्म परिवर्तन या शादी के लिए धर्म परिवर्तन को अपराध माना जाएगा। नाबालिग, अनुसूचित जाति जनजाति की महिला के धर्मपरिवर्तन पर कड़ी सजा होगी। सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने वाले सामाजिक संगठनों के खिलाफ कार्रवाई होगी। धर्म परिवर्तन के साथ अंतर धार्मिक शादी करने वाले को सिद्ध करना होगा कि उसने इस कानून को नहीं तोड़ा है। लडक़ी का धर्म बदलकर की गई शादी को शादी नहीं माना जाएगा।

(दिनकर कुमार ‘द सेंटिनेल’ के संपादक रहे हैं।)

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