अब पीएम ने भी माना लॉकडाउन कोरोना संकट का समाधान नहीं

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क्या यह महज संयोग है या सुविचारित नीति की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उच्चतम न्यायालय के साथ ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस सोच पर एकमत हैं कि कोरोना संकट के इस दौर को लॉकडाउन से नहीं निपटा जा सकता। वैसे भी इस बार गैरभाजपा सरकारों ने ही या तो सीमित लॉकडाउन लगाया है या लगाने की तैयारी में हैं। हकीकत में लॉकडाउन से कोरोना को समाप्त नहीं किया जा सकता है।

लॉकडाउन कोरोना का समाधान नहीं है। पिछले साल राष्ट्रीय लॉकडाउन लगाकर सरकार देख चुकी है कि कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हो सका। दरअसल उन्हें इसका अंदाज़ा ही नहीं है कि इस महामारी से कैसे निपटें? वास्तव में आपदा में अवसर की रणनीति के तहत राष्ट्रीय लॉकडाउन नहीं लगाने का फैसला किया गया है, ताकि लॉकडाउन को एकमात्र उपाय मानने वाली गैरभाजपा सरकारों को दिशाहीन साबित किया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2020 को पूरे देश में लॉकडाउन लगाने का एलान किया था, लेकिन सरकार के आंकड़ों पर यक़ीन करें, तो देश के तीस राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ये क़दम प्रधानमंत्री की घोषणा से पहले ही उठा चुके थे। राज्यों ने ये लॉकडाउन, अपने-अपने यहां कोरोना वायरस के प्रकोप का आकलन करके लगाया था। कई राज्यों में ये लॉकडाउन 31 मार्च 2020 तक प्रभावी रहना था। इसका खामियाजा पूरे देश ने भुगता और अर्थव्यवस्था माइनस में चली गयी। भुखमरी और बेरोजगारी का दौर आ गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार की शाम राष्ट्र के नाम संबोधन में राज्य सरकारों से कहा कि वे लॉकडाउन को अंतिम विकल्प मान कर चलें, ऐसे कदम उठाएं, जिससे लॉकडाउन की ज़रूरत ही न पड़े। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को कंटेनमेंट जोन पर ध्यान देना चाहिए, कोरोना दिशा निर्देशों का पालन करवाना चाहिए, पर लॉकडाउन न लगाना पड़े, यह भी ध्यान में रखना चाहिए। राज्य सरकारों को लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में ही देखना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन को अंतिम विकल्प मानने की सलाह राज्य सरकारों को ऐसे समय दी है जब कुछ जगहों पर लॉकडाउन लगाया गया है और कुछ जगहों पर लगाने की बात चल रही है। इसके पहले महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि वह लॉकडाउन पर अंतिम फ़ैसला लेने के लिए बुधवार को बैठक करेगी। दिल्ली में एक सप्ताह के लिए यानी 26 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन का एलान किया जा चुका है। झारखंड सरकार ने मंगलवार को ही एलान किया कि राज्य में 22 अप्रैल से एक सप्ताह के लिए लॉकडाउन लगाया जाएगा, हालांकि उसने इसे लॉकडाउन नाम नहीं दिया। राजस्थान में आंशिक लॉकडाउन पहले से ही है।

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर अंतिरम रोक लगा दी, जिसमें उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में लॉकडाउन लगाने का निर्देश दिया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को ही कहा था कि वह लॉकडाउन नहीं लगाएगी, क्योंकि इससे लोगों की आजीविका का मामला जुड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि कठिन स्थितियाँ हैं, कड़ी चुनौती है, लेकिन इन सब पर पार पाया जाएगा। सबको मिल कर कोरोना से लड़ना है और उस पर काबू पाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के ख़िलाफ़ देश आज फिर एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। कुछ समय पहले तक स्थितियाँ संभली हुई थीं, फिर ये कोरोना की दूसरी लहर आ गई। जो पीड़ा आपने सही है, जो आप सह रहे हैं, उसका मुझे पूरा अहसास है।

उन्होंने इसे साफ करते हुए कहा कि पिछली बार से स्थितियां इस बार अलग हैं। उस समय कोरोना टीका नहीं था, पीपीई किट्स नहीं थे, कोई इलाज नहीं था, लेकिन इस बार ये तमाम चीजें हैं। जल्द ही कोरोना पर काबू पा लिया जाएगा। इसलिए लोग कोरोना से डर कर पलायन न करें, वे जहाँ हैं, वहीं बने रहें, जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे अपने-अपने मुहल्लों में कमेटी बनाएं जो कोरोना दिशा-निर्देशों का पालन करने में लोगों की मदद करें, उन्हें समझाएं, उनसे कोरोना दिशा-निर्देश का पालन करवाएं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा करने से राज्य सरकारों को काफी सहूलत होगी, उन्हें लॉकडाउन लागू नहीं करना होगा, इसकी ज़रूरत ही नही पड़ेगी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि ये समझना होगा कि लॉकडाउन किसी भी तरह से कोरोना वायरस का स्थायी समाधान नहीं है। जब हम लॉकडाउन से बाहर आएंगे तो वायरस फिर आ सकता है। इसलिए हमें जांच पर जोर देना होगा और यह रणनीतिक रूप से करना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह आग्रह भी किया कि राज्यों और जिलों को सशक्त बनाते हुए पर्याप्त संसाधन मुहैया कराये जाएं तथा ‘न्याय’ योजना की तर्ज पर लोगों की मदद की जाए।

राहुल गांधी ने कहा कि ये समझना होगा कि लॉकडाउन एक पॉज बटन की तरह है, यह किसी भी तरह से कोरोना वायरस का समाधान नहीं है। जब हम लॉकडाउन से बाहर आएंगे तो वायरस फिर आ सकता है। इसलिए हमें जांच पर जोर देना होगा और यह रणनीतिक रूप से करना होगा। वायरस के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जांच है। जांच करने से ये जान सकते हैं कि वायरस कहां घूम रहा है और फिर उससे लड़ा जा सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि हमारे यहां प्रति 10 लाख आबादी पर सिर्फ 199 जांच हुई है। यह पर्याप्त नहीं है। मेडिकल और आर्थिक इन दोनों मोर्चे पर रणनीति के साथ लड़ना होगा।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और इलाहाबाद में रहते हैं।)

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