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झारखंड: अब आदिवासियों पर फूटा भगवा गैंग का कहर, गोमांस के झूठे आरोप लगाकर पीटा और मुड़वाया सिर

झारखंड के सिग्डेमा जिले के एक गांव में भगवा गैंग ने आदिवासियों पर कहर बरपाया है। उन्होंने न सिर्फ उनके बाल मुड़ाकर और जूतों की माला पहनाकर अपमानित किया बल्कि पिटाई भी की। उनसे ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगवाए।  यहां का भगवा गैंग काफी दिनों से इलाके के आदिवासियों को महज इसलिए निशाना बनाते आए हैं, क्योंकि उन्होंने बरसों-बरस पहले ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। अहम बात यह है कि यहां से बीजेपी की सरकार जाने के बावजूद अभी भी आदिवासियों का उत्पीड़न नहीं रुका है।

झारखंड की राजधानी रांची से 160 किमी दूर सिमडेगा जिला है। जिला मुख्यालय से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर मेन रोड पर ही झुलन चौक है। यह चौक गेरुवे रंग के झंडों से पटा पड़ा है। इस इलाके से 10 किमी की दूरी पर भेड़ीकुदर गांव है। यहां खड़िया और उरांव जनजाति के लोग रहते हैं। उन्होंने काफी पहले से ईसाई धर्म अपनाया हुआ है। बावजूद इनमें आदिवासियत आज भी उनमें बरकरार है।

इन आदिवासियों पर भगवा गैंग की बहुत पहले से टेढ़ी नजर रही है। ये लोग हमेशा से इनके खिलाफ बराबर कुछ न कुछ प्रोपगंडा करते रहे हैं या किसी न किसी बहाने इनको प्रताड़ित करते रहे हैं। पिछली 16 सितंबर को सुबह छह बजे लगभग 60-70 की संख्या में भगवा गैंग के लोगों ने गांव के सात आदिवासियों पर गौ मांस खाने और गौ तस्करी का आरोप लगाकर उनका सिर मुड़वा दिया। उन्हें जूते-चप्पल की माला पहनाई गई। जय श्रीराम का नारा लगवाया, पिटाई की और पूरे क्षेत्र में घुमाया।

कुछ लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी, जब पुलिस आई तब हमलावरों ने उन्हें पुलिस के हवाले भी कर दिया। इस आरोप के साथ कि ये लोग गौ तस्करी करते हैं। पुलिस ने जांच के क्रम में आरोप गलत पाया और उन्हें छोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे गांव में ही दहशत है।

16 सितंबर की इस घटना की जानकारी जब पूर्व जिला परिषद सदस्य निल जस्टिन बेक को हुई तो उन्होंने उसी दिन पीड़ितों द्वारा हमलावरों के खिलाफ सिमडेगा थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई और पुन: 17 सितंबर को एससी-एसटी थाने में जातीय उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया।

सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि 16 सितंबर की इस घटना की जानकारी आठ दिनों तक किसी स्थानीय अखबार, सोशल मीडिया या किसी वेब न्यूज पर नहीं देखी गई। इसकी जनकारी तब हुई जब 25 सितंबर को झारखंड से ही प्रसारित एक यूट्यूब चैनल ने इस खबर को दिखाया। इस बाबत निल जस्टिन बेक बताते हैं कि इन गुंडों के डर से कोई स्थानीय अखबार या पत्रकार ऐसी खबरों को लिखने की हिम्मत नहीं करता है। उन्होंने ही बाद में इस खबर को वेब पोर्टल को बताया था। 25 सितंबर को इस खबर के आने के बाद 26 सितंबर को टेलिग्राफ ने भी इसे कवर किया है।

प्राथमिकी पीड़ित राज सिंह की पत्नी रोजलीन कुल्लू ने दर्ज कराई है, जिन्हें भी नहीं बख्शा गया था। उनके साथ भी मारपीट की गई। कुल नौ लोगों पर नामजद और तीन दर्जन से भी अधिक लोगों पर अज्ञात नाम से प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है। नामजद आरोपियों में नयन केशरी, सोनू सिंह, सोनू नायक, तुलसी साहू, श्रीकांत प्रसाद, दीपक प्रसाद, अमन केशरी, नकुल पातर और राजेन्द्र प्रसाद का नाम शामिल है।

घटना के बारे में सिमडेगा थाना प्रभारी रवींद्र सिंह ने बताया कि गौकशी की सूचना पुलिस को दी गई थी। इसके बाद पुलिस गांव में पहुंची और जांच की, लेकिन गांव के किसी भी घर से गौकशी या गौ मांस होने का कोई सबूत नहीं मिला। इसके बाद सभी भुक्तभोगियों को थाने में हुई पुछताछ के बाद छोड़ दिया गया। रोजलीन कुल्लू ने जो प्राथमिकी दर्ज करवाई है, उस पर कार्रवाई करते हुए नौ में से चार नामजद आरोपियों सोनू सिंह, सोनू नायक, नयन केशरी और राजेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

भगवा गैंग ने भेड़ीकुदर गांव के रहने वाले राज सिंह, दीपक कुल्लू, इमानुएल टेटे, सुगड़ डांग, सुलिन बारला, सोसन डांग और सेम किडो का सिर मुड़वाकर, जूता-चप्पल की माला पहनाकर, जय श्रीराम का नारा लगवाया। इसके बाद उनकी पिटाई की और पूरे क्षेत्र में घुमाया गया। भेड़ीकुदर गांव में ही स्थित एक बगीचे में लेकर पहुंचे। इस बीच कुछ लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी। थोड़ी देर में पुलिस पहुंची। जब पुलिस आई तब हमलावरों ने युवकों पर गौ तस्करी का आरोप लगाया और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।

पीड़ित राज सिंह ने बताया कि 16 सितंबर की सुबह छह बजे 60 से 70 की संख्या में लोग मेरे घर पहुंचे और गाली देते हुए मुझे लाठी-डंडे से मारना शुरू कर दिया। इस दौरान मेरी पत्नी रोजलीन कुल्लू मुझे बचाने के लिए बीच-बचाव करने लगीं, तब भीड़ में मौजूद युवकों ने जाति सूचक शब्द और अपशब्द बोलते हुए उनके साथ भी धक्का-मुक्की की। इसके बाद मेरी पत्नी ने बचाव के लिए हल्ला करना शुरू किया। इसके बाद आसपास के लोग वहां पहुंचे और मारपीट कर रहे युवकों को मना करने लगे, लेकिन युवकों ने उनके साथ भी गाली गलौच की और उनके साथ भी मारपीट करना शुरू कर दिया।

राज सिंह की पत्नी और घटना में पीड़ित रोजलीन कुल्लू ने बताया कि गांव पहुंचे बजरंग दल के युवकों ने मेरे पति राज सिंह समेत गांव के सात युवकों को एक जगह कटहल पेड़ के नीचे खड़ा कर दिया और सभी को कुदाल की मूंठ से पीटा। इसके बाद दूसरे टोले में ले जाकर सभी का मुंडन किया। उन लोगों की संख्या काफी अधिक थी, जिसके कारण गांव वाले डर गए और चुपचाप पूरी घटना को देखते रहे। किसी ने हिम्मत करके जब उन्हें ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने उनके साथ भी गाली गलौच की और मारपीट पर उतारू हो गए।

26 वर्षीय भुक्तभोगी युवक दीपक कुल्लू ने घटना के बारे में बताया कि सुबह छह बजे मैं दूसरे गांव से दूध लेकर अपने गांव पहुंचा, तो मैंने देखा की कुछ बाहरी लोग मेरे गांव में पहुंच कर लाठी-डंडे से राज सिंह की पिटाई कर रहे हैं। जब मैंने उनसे पूछा कि आप लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उन लोगों ने मुझे गाली बकते हुए कहा कि गौकशी करते हो और पूछते हो कि क्यों मार रहे हैं। फिर उन लोगों ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें एक बुजुर्ग आदमी ये कह रहा है कि गांव में गौकशी हुई थी, उसी वीडियो के आधार पर वे लोग गांव पहुंचे थे और इस तरह की हरकत कर रहे थे। फिर उन लोगों ने मुझे भी बहुत मारा। दूसरे गांव में ले जाकर भी हम सभी को बहुत पीटा।

जब मुझे मुंडन करने के बाद जूते की माला पहनाया गया और जय श्रीराम का नारा लगाने के लिए कहा गया तो मैंने नहीं लगाया, तब उन लोगों ने थेथर (आईपोमिया) के डंडे से मुझे बहुत मारा। उसके बाद मैंने डर से जय श्रीराम का नारा लगाया। घटना के दो दिनों बाद मैंने जब उस आदमी से बात की, जिसने वीडियो में कहा था कि गांव में गौकशी हुई है। तब उस आदमी ने कहा कि मुझे मारने की धमकी देकर जबरन उन लोगों ने मुझे ऐसा कहने के लिए कहा था। इस घटना के बाद से गांव के लोग काफी डरे सहमे हैं।

क्षेत्र के पूर्व विधायक और मंत्री रहे थियोडोर किडो बताते हैं कि जब भाजपा सत्ता से बाहर होती है, तो वह समाज को जहरीला बनाने की तैयारी में जुट जाती है। इस घटना में भी भाजपा का ही हाथ है। वे बताते हैं कि इस क्षेत्र में बहुतायत में खड़िया समुदाय के लोग बसते हैं जो गौ मांस खाना तो दूर अगर उनके गोशाला में गाय या बैल मर जाए तो उसे खुद छूते तक नहीं है, बल्कि अन्य जातियों से उसे फेंकवाते हैं। खड़िया समुदाय के जो लोग ईसाई बने हैं उनका भी वही हाल है।

ताजा खबर के वरिष्ठ पत्रकार संजय वर्मा बताते हैं कि जब हमने घटना के बारे में बजरंग दल के प्रदेश संयोजक दीपक ठाकुर से बात की कि क्या इस घटना में बजरंग दल की भूमिका है? तो उन्होंने बताया कि इस घटना में मेरे संगठन के सदस्यों का कोई हाथ नहीं है, बल्कि इस घटना को क्षेत्रीय स्तर पर संचालित ‘जय भवानी संगठन’ के लोगों ने अंजाम दिया है। ‘जय भवानी संगठन’ के नाम से जिले में एक वाट्सऐप ग्रुप संचालित है। दीपक ठाकुर ने ये भी कहा कि बीरु पंचायत में बजरंग दल के लोग सक्रिय नहीं हैं।

गौकशी के नाम पर भेड़ीकुदर गांव में घटना को अंजाम देने के लिए जो 60-70 की संख्या में युवक पहुंचे थे, वे किसी एक गांव के नहीं, बल्कि कई गांव के युवक थे। इससे पता चलता है कि यह किसी निजी दुश्मनी से नहीं, बल्कि संगठनात्मक बैठक करके इस घटना को अंजाम दिया गया है, क्योंकि विभिन्न गांव के युवक अगर एक साथ निर्धारित गांव में सुबह के छह बजे पहुंचे हैं, तो इसका मतलब ये हुआ कि घटना को अंजाम देने के लिए पूर्व में ही तैयारी कर ली गई थी और वाट्सऐप के माध्यम से ही रणनीति तैयार कर ली गई थी।

यह भविष्य के लिए काफी खतरनाक संकेत हैं। कहीं न कहीं यह घटना हेमंत सरकार पर भी सवाल खड़ा करती है। इस मामले को लेकर झारखंड के आदिवासी समुदाय में भगवा गैंग के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है, जो भविष्य में किसी बड़े संघर्ष का संकेत है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

This post was last modified on October 4, 2020 12:11 pm

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