Subscribe for notification

पतन की सुप्रीम पराकाष्ठा! रेपिस्ट से शादी संबंधी जस्टिस बोबडे की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रियाएं, बयान वापस लेने की शुरू हुई मांग

उच्चतम न्यायालय ने क्या किसी ने लड़की से यह सवाल पूछा कि क्या वह दुष्कर्म करने वाले शख्स से शादी करना चाहती है या नहीं? क्या यह सवाल है? यही हल है या सजा? एकदम घटिया। यह टिप्पणी फिल्म अभिनेत्री तापसी पन्नू ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर की है। उधर माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने भारत के चीफ जस्टिस एस ए बोबडे को पत्र लिख कर उनसे वह टिप्पणी वापस लेने का आग्रह किया है, जिसमें उन्होंने बलात्कार के मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी से पूछा था कि क्या वह पीड़िता के साथ विवाह करने के लिये तैयार है।

दरअसल सोमवार को उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ,जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी राम सुबमनियन की पीठ ने एक दुष्कर्म मामले की सुनवाई की। सरकारी विभाग में काम करने वाले शादीशुदा शख्स पर एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के आरोप हैं। इस मामले में आरोपी ने उच्चतम न्यायालय कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने आरोपी से पूछा कि क्या वह पीड़िता से शादी करने को तैयार है ? यह बात बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू को पसंद नहीं आई और उन्होंने जज की इस टिप्पणी की आलोचना की है।

गौरतलब है कि दुष्कर्म आरोपित से पीठ ने सवाल किया कि क्या वह पीड़िता से विवाह करना चाहता है। लेकिन जब कोर्ट को बताया गया कि वह पहले से शादीशुदा है तो पीठ ने संबंधित अदालत में नियमित जमानत अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उसे चार सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण भी दे दिया। महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी में टेक्नीशियन के पद पर तैनात आरोपित ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा अपनी जमानत खारिज किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी।

इस बीच, माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने कहा कि अदालतों को यह धारणा नहीं देनी चाहिए कि वह पीछे ले जाने वाले ऐसे दृष्टिकोणों का समर्थन करती हैं। करात एक लोक सेवक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई शीर्ष अदालत की टिप्पणी का जिक्र कर रही थीं, जिस पर एक लड़की के साथ बार-बार बलात्कार करने का आरोप है और बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी।

वृंदा करात ने कहा कि इन सवालों ,शब्दों और कार्यों का नाबालिगों के साथ बलात्कार के मामलों में जमानत देने के गंभीर निहितार्थ हैं। उन्होंने कहा, ‘कृपया इस पर विचार करते हुए इन टिप्पणियों और सवालों को वापस लें। कृपया औरंगाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखें, जिसने निचली अदालत द्वारा आरोपी को दी गई जमानत को ‘जघन्य’ करार दिया था।

सुनवाई के दौरान पीठ ने आरोपी से पूछा था कि क्या तुम उससे (पीड़िता) विवाह करने के इच्छुक हो। अगर उसके साथ तुम्हारी विवाह करने की इच्छा है तो हम इस पर विचार कर सकते हैं, नहीं तो तुम्हें जेल जाना होगा। पीठ ने आरोपी से यह भी कहा, ‘हम तुम्हारे ऊपर विवाह करने का दबाव नहीं बना रहे हैं ।

इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी पीड़िता के साथ शुरूआत में विवाह करने का इच्छुक था लेकिन लड़की ने इंकार कर दिया था और अब उसकी शादी किसी और से हो गई है। आरोपी एक लोक सेवक है तो पीठ ने कहा कि लड़की के साथ बलात्कार करने से पहले तुमको यह सोचना चाहिये था । तुम जानते थे कि तुम एक सरकारी कर्मचारी हो। पीठ ने आरोपी को चार सप्ताह तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की और उसे सुनवाई अदालत में नियमित जमानत याचिका दायर करने की अनुमति दी ।

पत्र में वृंदा ने कहा, ‘इस अपराधी ने लड़की का गला दबाया और उसके साथ बलात्कार किया जब वह केवल 16 साल की थी । इसने 10-12 बार यह अपराध किया। लड़की ने आत्महत्या की कोशिश की। क्या यह सहमति प्रदर्शित करता है?

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on March 3, 2021 4:02 pm

Share