Subscribe for notification

रोटी-खेती की कीमत पर नहीं चाहिए राम!

“योगी जी हम सबको न्याय दो। हम गरीब किसानों को घर से बेघर मत करो। एयरपोर्ट कहीं और बनवाओ। हम सब अपने छोटे-छोटे बच्चों के लेकर कहां जाएंगे। कैसे पढ़ाए लिखाएंगे। साहेब इसी खेती-बाड़ी से हमारा परिवार चलता है। और आप हमसे वो भी छीन रहे हैं। योगी जी शर्म करो। हम पर रहम करो। जुलुम अत्याचार मत करो। बंद करो ये सब। योगी जी हमने आपको वोट दिया है। और आपने हमारे हाथ में कटोरा थमा दिया है।”- अयोध्या के लोग यह कहते हुए योगी आदित्यनाथ हाय हाय का नारा लगाने लगते हैं।

अयोध्या में विरोध के तेज होते स्वर की अनुगूंज है। हाथ में कटोरा चम्मच लेकर गंजा, कुट्ठिया और धरमपुर की किसान स्त्रियां योगी सरकार के विरोध में उतर आई हैं। उनकी एक ही मांग है कि एयरपोर्ट कहीं और बनवाया जाए। नाराज़ ग्रामीणों ने कहा कि सब कुछ राम के नाम पर नहीं चलेगा। आप राम मंदिर के लिए एयरपोर्ट बनवा रहे हो तो क्या हम बाल बच्चों समेत सरयू में कूदकर जान दे दें।

राममूर्ति के लिए आमजनों को उनकी जन्मभूमि से उजाड़ा जा रहा है

सरकार की योजना 251 मीटर की राम की भव्य मूर्ति अयोध्या से चार किमी दूर मांझा बरहटा गांव में लगाना है। मूर्ति लगाने के लिए सरकार को कुल 80 एकड़ ज़मीन चाहिए। जबकि सरकार फिलहाल पूरे माझा बरहटा गांव को हटाना चाहती है। उसकी वजह ये है कि मूर्ति वहीं उसी गांव में बनेगी। मूर्ति बनाने के लिए ज़्यादा जगह चाहिए। और मूर्ति बनने में लगभग तीन-चार साल लग जाएंगे। मांझा बरहटा के तीन गांव पुरवा धरमू का पुरवा, नेउर का पुरवा, छोटी मुजानिया के लोगों को मूर्ति लगाने के लिए विशेषकर हटाया जा रहा है। तीनो पुरवों की कुल आबादी करीब 2000 है। विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति के लिए सरकार जबर्दस्ती ग्रामीणों की ज़मीन छीन रही है।

ग्रामीण कह रहे हैं कि “हमें मुआवजा नहीं चाहिए, हम अपनी ज़मीन नहीं देंगे। राम को 2.67 एकड़ ज़मीन सुप्रीम कोर्ट ने दिया है उसी में उनकी मूर्ति लगे। लेकिन नहीं अब राम को 2.67 एकड़ ज़मीन भी कम पड़ रही है। तो हम तो अपनी ज़मीन, अपना घर नहीं देंगे।”

एक पीड़ित महिला कहती है, “हम अपनी ज़मीन नहीं देंगे। अपने छोटे-छोटे बच्चे लेकर हम कहां जाएंगे। जब हम बेघर ही हो जाएंगे तो मूर्ति लगाकर क्या करोगे। जब हमारे पास घर जमीन नहीं रहेगी तो हम राम की मूर्ति लेकर क्या करेंगे। आखिर ऐसे विकास का क्या फायदा जो घरवालों को बेघर कर दे। किसानों को बिना खेती के कर दे।”

दूसरी महिला आक्रोश में कहती है, “योगी जी हम लोगों को खोद कर गाड़ दो और फिर हमारी ज़मीन ले लो, उस पर चाहे राम को बिठाओ चाहे खुद को।”

धरमू पुरवा का एक स्नातक छात्र कहता है, “राम को राम की जन्मभूमि दिलाने वाले हमें हमारी जन्मभूमि से उजाड़ रहे हैं। राम को मंदिर मिल गया है न वो वहां जाकर रहें हमारे गांव को उनके नाम पर क्यों छीना उजाड़ा जा रहा है।”

वहीं ग्रामीणों का आरोप है उन्हें अंधेरे में रखकर सरकार ने उनके घरों तक की नाप करवा ली। अधिकारी ग्रामीणों के घरों में घुस कर एक-एक कमरा नापकर गए हैं। लोग बता रहे हैं कि वो हाईकोर्ट तक गए हैं। लेकिन वहां से भी कोई उम्मीद की रोशनी आती अभी तक तो नहीं दिखी है।

बता दें कि मांझा बरहटा गांव सरयू किनारे पड़ता है और सरकार यहीं मूर्ति लगाने जा रही है। लोग साफ कह रहे हैं भइया आप राम को जहां चाहे वहां ले जाइये हम अपनी खेती की ज़मीन नहीं देंगे। बता दें कि योगी सरकार की अयोध्या में 251 मीटर ऊँची राम मूर्ति बनाने की योजना है। जो कि विश्व की सबसे ऊँची चीन स्थित गौतम बुद्ध की मूर्ति (208 मीटर) से भी बड़ी होगी। इस मूर्ति के निर्माण में लगेगा करीब साढ़े तीन साल का समय। वैसे राजनीति के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनवाए गए ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ से भी बड़ी राम मूर्ति बनवाकर योगी आदित्यानाथ मोदी से बड़ी लकीर खींचकर 2023 के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।  

ट्रस्ट ने अस्पताल, स्कूल बनवाने के नाम पर किसानों की ज़मीन हड़प ली

भोले भाले कम शिक्षित, अनपढ़ किसानों का कहना है कि धर्म के नाम पर लोग धोखाधड़ी करने लगें तो हमारे जैसे किसानों गरीबों का धर्म से भरोसा ही उठ जाए। वो बताते हैं कि कई दशक पहले महर्षि आश्रम ट्रस्ट के लोग आए थे। उन्होंने ज़मीन मिलने पर गांव में स्कूल, अस्पताल बनवाने की बात कही तो कुछ लोग आगे आए। मान लीजिए किसी के पास 10 बीघे ज़मीन है तो उसने उसमें से एक बीघे ज़मीन देने की पेशकश की।

उनसे अंगूठा लगवा लिया गया बाद में पता लगा ट्रस्ट ने उनकी 6 बीघे ज़मीन पर दान का दावा ठोक दिया। ये तो सरासर बेईमानी है। ऐसा कई लोगों के साथ हुआ है। इस तरह गांव की कुल 20-25 प्रतिशत ज़मीन महर्षि आश्रम ट्रस्ट के कब्ज़े में है और बाकी की 70-75 प्रतिशत ज़मीन किसानों के कब्ज़े में। अब सरकार राम और धर्म के नाम पर हमारी ज़मीन और हमारा घर छीन रही है। उन्होंने बेईमानी करके छीना सरकार बरजोरी करके डंडा दिखाकर छीन रही है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on October 17, 2020 2:56 pm

Share