Saturday, January 22, 2022

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एजेंडे पर मथुरा-काशी यानि पश्चिमांचल से लेकर पूर्वांचल तक बीजेपी को नफरत का सहारा

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दिसंबर के दूसरे सप्ताह में प्रधानमंत्री व भाजपा के चुनावी चेहरे नरेंद्र मोदी काशी कॉरीडोर का उद्घाटन करेंगे। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अभी से उसके विज्ञापन में जी जान से जुटी हुई है। यानि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में काशी हिंदुत्व का मुद्दा बनाया जायेगा।

वहीं दूसरी ओर मथुरा में माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कवायद शुरू हो गई है। वहां स्थित मस्जिद को हटाने और भव्य कृष्ण मंदिर बनाने के आरएसएस के एजेंडे को चुनावी मुद्दा बनाने का माहौल बनाया जा रहा है। यानि पश्चमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से खिसके जाट वोट बैंक की भरपाई के लिये भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के अपने आजमाये हुये हथियार का इस्तेमाल करने जा रही है।

यूपी चुनाव में भाजपा के नफ़रती सांप्रदायिक एजेंडे का नेतृत्व केशव प्रसाद मौर्या कर रहे हैं। वो लगातार सांप्रदायिक विभाजन और घृणा की भाषा बोल रहे हैं। केशव प्रसाद मोर्य के बयान से साफ जाहिर होता है कि बीजेपी एक बार फिर अयोध्या-मथुरा-काशी के एजेंडे के सहारे चुनावी नैया पार लगाना चाहती है।

आरएसएस-भाजपा द्वारा ये दुष्प्रचार किया जाता है कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद जिस ज़मीन के ऊपर बनाई गई है, उसके नीचे ही कृष्ण जन्मभूमि है। मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर यहां मस्जिद का निर्माण कराया था। इसी तरह काशी के विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर भी विवाद खड़ा करती आ रही है।

गौरतलब है कि भाजपा विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या-मथुरा-काशी को लेकर देश भर में पिछले दो दशक से दुष्प्रचार चला रखा है, जिसमें अयोध्या मुद्दा सबसे ऊपर रहा था। 6 दिंसबर 1992 को बाबरी मस्जिद को भाजपा, आरएसएस, विहिप, बजरंग दल के हमलावरों ने ध्वस्त कर दिया था। उस समय भाजपा-विहिप का एक नारा था- ‘बाबरी मस्जिद झांकी है, काशी- मथुरा बाक़ी है।

आरएसएस, बजरंग दल, विहिप प्रचारक से भाजपा नेता बने केशव प्रसाद मौर्य को सामने चुनाव देख नफ़रत बढाने वाला व विभाजनकारी नारा याद हो आया है। वहीं फासीवादी कार्पोरेट मीडिया भी आरएसएस भाजपा के सांप्रदायिक विभाजन के एजेंडे को बढ़ाने में लगी हुयी है।

कल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ने बातचीत के दौरान योगी से पूछा कि, ‘क्या मथुरा में जन्मभूमि का जो स्थान है, वहां से वो मस्जिद हटाना आपके एजेंडे में शामिल है?’इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘मथुरा में तो भगवान श्री कृष्ण की ही पूजा होती है। अयोध्या में भगवान श्री राम की पूजा होती है, काशी में बाबा विश्वनाथ जी की पूजा होती है। बरसाना में राधा रानी की पूजा होती है। मुझे लगता है कि ये सब राजनैतिक एजेंडा से बहुत ऊपर हैं।’

टाइम्स नाऊ नवभारत ने सोशल मीडिया भाजपा साइबर सेल की मुहिम का हवाला देकर पूछा कि सोशल मीडिया पर मैसेजेज चल रहे हैं कि इस बार योगी जी आएंगे तो मथुरा से वो मस्जिद हट जाएगी। इस पर सीएम योगी कहते हैं, ‘मैं मथुरा जाता रहता हूं……हाल ही में मथुरा गया था, लेकिन मैंने पहले भी कहा कि आस्था का सम्मान प्रथमिकता है। मथुरा में किसी से भी पूछेंगे कि मथुरा में किसकी पूजा होती है तो सामने वाला कहेगा कि भगवान श्री कृष्ण की पूजा होती है’।

वहीं नफ़रत के नये नायक केशव प्रसाद मौर्या ने गुरुवार को एक न्यूज चैनल पर उत्तर प्रदेश के तमाम विपक्षी दलों को भाजपा के सांप्रदायिक नफ़रत के पिच पर खेलने के लिये मजबूर तरते हुये कहा कि “विपक्ष के जो भी राजनीतिक दल हैं, वे मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। मैं स्पष्ट तौर पर कहना चाहता हूं कि मथुरा में श्री कृष्ण की जन्मभूमि पर मंदिर बने यह श्री कृष्ण के हर भक्त की इच्छा है और आकांक्षा है। मैंने भी उसी भाव को प्रकट किया है। लेकिन मैं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उन विपक्षी नेताओं से पूछना चाहता हूं। वे बताएं कि वे श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भगवान श्री कृष्ण का भव्य मंदिर बनने का वह विरोध करते हैं या समर्थन।”

इस बीच कल इलाहाबाद में भाजपा की ओर से आयोजित मंडलीय व्यापारी सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि, ”2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कितने लुंगी छाप गुंडे घूमते थे। जालीदार टोपी लगाए हुए राइफल रिवॉल्वर और बंदूक लिए हुए व्यापारियों को डराने और धमकाने का काम कौन करता था। आपकी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करना और क़ब्ज़ा करने के बाद शिक़ायत मत करने जाना ऐसी धमकी कौन देता था। यह सारा कुछ याद रखाना मेरा यही कहना है। ”

केशव मौर्या ने बिना नाम लिए प्रत्यक्ष तौर पर अपना निशाना बाहुबली और सपा के टिकट से सांसद रहे अतीक अहमद की ओर साध रहे थे। लेकिन केशव मौर्या ने जानबूझकर विजय मिश्रा, रघुराज प्रताप सिंह, अमरमणि त्रिपाठी, हरिशंकर तिवारी जैसे बाहुबलियों का नाम नाम नहीं लिया क्योंकि ये सब हिंदू धर्म के तथाकथित वाहक ब्राह्मण, ठाकुर बिरादरी से आते हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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