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झुग्गी बस्ती दो दिन में खाली करने का आदेश, कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट

रेलवे ने दिल्ली की 48,000 झुग्गियों में दो दिन में खाली करने का नोटिस चिपकाया है। झुग्गी-बस्ती के लोगों को डराने के लिए इलाके में बुलडोजर जा रहे हैं। वहीं झुग्गी-बस्ती वालों ने भी एकजुट होकर सड़कों पर संघर्ष करने के लिए कमर कस ली है।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील सलमान खुर्शीद और अजय माकन के मार्गदर्शन में सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर करके 48  हजार झुग्गियों को तोड़ने से रोकने का आदेश देने की अपील की है।

दिल्ली कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, “48 हजार झुग्गियों पर जो सुप्रीमकोर्ट का आदेश आया है, केंद्र सरकार ने उस पर अमल करना शुरू कर दिया है। आज तुगलकाबाद, मानसरोवार पार्क, शाहदरा की झुग्गी बस्तियों में रेलवे द्वारा दो दिन के भीतर खाली करके चले जाने का नोटिस चिपकाया है।”

अनिल चौधरी आगे कहते हैं, “64 हजार मकान दिल्ली में ‘राजीव आवास योजना’ के तहत बनकर खड़े हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ़ सरकार बनाने के लिए झुग्गी बस्ती के मजदूरों, किसानों, गरीबों के पास वोट मांगने जाते रहे। उन्हें सपने दिखाते रहे, लेकिन उनकी वादाखिलाफी का जीता जागता उदाहरण ये 48 हजार झुग्गीवासियों का मामला है, जिस पर अभी तक उनकी तरफ से कोई ठोस नीति की घोषणा नहीं की गई है। वो लगातार मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। कांग्रेस झुग्गी बस्ती के लोगों के साथ है। हम उनकी लड़ाई कोर्ट से लकर सड़क तक लड़ेंगे और उन्हें अनका अधिकार दिलाकर रहेंगे।” 

कांग्रेस नेता परवेज़ अहमद कहते हैं, “माननीय शीला दीक्षित जी ने साल 2010 में दिल्ली शहरी आवास सुधार बोर्ड (DUSIB) बनाया था। डुसिब का काम ये था कि वो दिल्ली में रहने वाले तमाम झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए पॉलिसी और घर बनाएगी। शीला जी के वक़्त ही डुसिब, एनडीएमसी और डीडीए ने मिलकर घर बनाना शुरू किया था। शीला जी के वक़्त ही 64 हजार फ्लैट बनना शुरू हुए थे, लेकिन सरकार चली जाने के बाद वो एलॉट नहीं हो सके। तब से दिल्ली में केजरीवाल की सरकार है, लेकिन उन्होंने कुल पांच हजार फ्लैट एलॉट किए हैं। बाकी करीब 59 हजार फ्लैट तैयार हैं जो नरेला में, बवाना में, तुग़लकाबाद में, भलस्वा, जहांगीरपुरी, द्वारका में हैं। ये सरकार गरीबों को भवन एलॉट नहीं कर रही है। पिछले साढ़े छह साल के शासन में बनाना तो दूर ये गरीबों को बना बनाया फ्लैट तक आवंटित नहीं कर पाए और फालतू की राजनीति कर रहे हैं।”

आप प्रवक्ता राघव चड्ढा पिछले दो दिनों में दो बार प्रेस कान्फ्रेंस कर चुके हैं। प्रेस कान्फ्रेंस में नोटिस फाड़ते हुए राघव चड्ढा ने बताया कि अरविंद केजरीवाल अभी ज़िंदा हैं। राघव चड्ढा ने कहा, “तुगलकाबाद की झुग्गियों में नोटिस लगा है कि 11 सितंबर 2020 को आपका घर उजाड़ दिया जाएगा। इसी तरह दूसरी जगहों पर 14 सितंबर को झुग्गी उजाड़ने की बात कही गई है। केंद्र की बीजेपी का यह नोटिस मानवता, संविधान और सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार के खिलाफ है। जब तक अरविंद केजरीवाल जिंदा हैं, तब तक एक भी झुग्गी में रहने वाले परिवार को बेघर नहीं होने देंगे।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा, “मैं आज यह नोटिस फाड़ता हूं और कहता हूं कि हम किसी का घर उजड़ने नहीं देंगे। बीजेपी को चेतावनी देता हूं कि हमारे परिवार की ओर आंख उठाकर भी मत देखना, वरना ईंट से ईंट बजा देंगे। जिनके घर उजाड़ना चाहते हैं वे सब इसी देश के नागरिक हैं, हमारी भारत माता के बच्चे हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल रणनीति बना रहे हैं कि कि बीजेपी की इस साजिश को कैसे रोका जाए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा और सड़क पर भी लड़ाई लड़ी जाएगी। किसी के परिवार से छत छीन लेना, यह न होने दिया जाएगा और न बर्दाश्त किया जाएगा। मैं झुग्गी वालों को आश्वस्त करता हूं कि जब तक हम हैं, जब तक अरविंद केजरीवाल हैं तब तक ऐसा नहीं होगा। कानून कहता है, किसी का भी पुनर्वास किए बिना बेघर नहीं कर सकते।”

वहीं हलफनामा डालकर सुप्रीमकोर्ट से दिल्ली की 48 हजार झुग्गियों को हटाने का आदेश पारित करवाने वाली भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने केजरीवाल सरकार को पत्र लिखकर कहा है, “दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रेल पटरियों के आस-पास रेल सेफ्टी जोनों में से 48,000 झुग्गियों को हटाया जाना है। इस नाते यहां रहने वालों को दिल्ली सरकार के पास उपलब्ध और खाली पड़े राजीव आवास योजना के फ्लैट देने की जरूरत है।”

साथ ही उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री आवास योजना दिली में न लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा है, “झुग्गी वालों के पुनर्वास में मददगार हो सकती थी, लेकिन, दिल्ली सरकार ने केंद्र की इस योजना को लागू नहीं होने दिया, जिससे इस योजना का लाभ झुग्गी वालों को नहीं मिल सकता।”

अच्छा होता कि भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता उन राज्यों का आंकड़ा भी ले आते, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना लागू है और वहां उनकी केंद्र सरकार ने कितने गरीबों को आवास दिए हैं।

तीन महीने के अंदर रेलवे ट्रैक के पास से वेस्ट मटीरियल हटाएं: सुप्रीम कोर्ट
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीमकोर्ट ने फरवरी 2020 में ईपीसीए, दिल्ली सरकार और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को आदेश देते हुए कहा था कि वह रेलवे ट्रैक के आसपास के प्लास्टिक बैग, गारबेज और अन्य वेस्ट मटीरियल को हटाने के बारे में समग्र प्लान पेश करें। इसके बाद ईपीसीए ने रिपोर्ट पेश की थी। इस दौरान रेलवे के दिल्ली डिवीजन के एडिशनल डिवीजनल मैनेजर ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था कि दिल्ली में 140 किलोमीटर ट्रैक के आसपास 48000 झुग्गियों का अतिक्रमण है।

हलफ़नामे में बताया गया कि इन झुग्गियों को हटाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाई गई, लेकिन राजनीतिक दख़लअंदाजी के चलते कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई। इस पर 2 सितंबर को जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने आदेश पारित कर कहा है कि रेलवे ट्रैक के पास के तमाम अतिक्रमण हटाए जाएं और कोई भी राजनीतिक दखलअंदाजी या दबाव नहीं चलेगा। दिल्ली सरकार, रेलवे विभाग और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से कहा है कि वह तीन महीने के भीतर रेलवे ट्रैक के पास के तमाम वेस्ट मटीरियल हटाएं और भविष्य में कोई भी कॉन्ट्रेक्टर वहां वेस्ट को डंप न करे। आदेश देते हुए जज अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा कि इस काम में 70 फीसदी भुगतान रेलवे और 30 फीसदी का भुगतान दिल्ली सरकार करेगी। म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, रेलवे और सरकारी एजेंसियों द्वारा मैन पावर मुहैया कराया जाएगा और उसके लिए वह भुगतान नहीं लेंगे। सभी ऑथॉरिटी से कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने को कहा गया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on September 12, 2020 12:05 pm

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