Monday, October 25, 2021

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ऑक्सीजन की दिक्कत बरकरार, दो और अस्पताल पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट

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क्या विडंबना है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति करवाने के लिए राजधानी दिल्ली के अस्पतालों को दिल्ली हाई कोर्ट जाना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में कल दो और निजी अस्पताल ब्रैम हेल्थ केयर लिमिटेड और बत्रा अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर ऑक्सीजन के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के पास पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सुबह 3.30 बजे तत्काल सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध किया। सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली के नोडल अधिकारी को इन दोनों अस्पतालों के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए कहा है। इससे पहले 21 अप्रैल को मैक्स अस्पताल भी ऑक्सीजन के मुद्दे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट गया था।

बत्रा अस्पताल की ओर से हाई कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि अस्पताल के आईसीयू में 160 मरीज भर्ती हैं और बाकी वार्ड में हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कोविड आरक्षित सुविधा है और इसके लिए कम से कम 7000-8000 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वहीं ब्रैम हेल्थ केयर ने हाई कोर्ट से 125-150 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति के लिए निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

हाई कोर्ट ने अस्पतालों और नर्सिंग होम से मेडिकल ऑक्सीजन की ज़रूरत को पूरा करने के लिए पहले नोडल अधिकारी से संपर्क करने को कहा है। साथ ही हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सुझाव दिया है कि चूंकि बड़ी संख्या में लोग एक ही नंबर पर नोडल अधिकारी से संपर्क कर रहे हैं, जो पहले से ही सर्कुलेट है, कम से कम 3-4 और नंबरों को और सर्कुलेट करना चाहिए।

इस दौरान दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं और इसे कारगर बनाने में थोड़ा समय लगेगा, हमें इसके लिए केंद्र और रेलवे को समय देना चाहिए। सॉलीसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने हाई कोर्ट को मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक के बारे में बताया। SG ने हाई कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई में कोई हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया है। उन्होंने हाई कोर्ट को यह भी बताया कि हर राज्य ऑक्सीजन सप्लाई में कोई हस्तक्षेप नहीं करने के लिए सहमत थे।

मेहता ने हाई कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार एक कंट्रोल रूम है जो राज्यों और केंद्र के नोडल अधिकारी के साथ बातचीत करता है और इस कंट्रोल रूम में कुछ और अधिकारियों को शामिल करने का फैसला किया गया है। एसजी का सुझाव है कि याचिकाकर्ता को पहले दिल्ली के नोडल अधिकारी का पास चाहिए।

हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को पूरी आवंटन योजना की जांच करने और सुझाव देने और वो सुझाव बिना किसी देरी के केंद्र सरकार की कमेटी के समक्ष रखने को कहा है। कोर्ट का कहना है कि सशक्त समूह द्वारा इसकी जांच जल्द से जल्द की जाएगी।

हाई कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन का आवंटन केंद्र द्वारा किया जाता है। कोर्ट ने ध्यान दिया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार हुआ है, लेकिन राजधानी में प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की कमी है।

जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की बेंच ने कहा कि अगर नोडल अधिकारी से संपर्क करने के बाद भी जरूरत पूरी नहीं होती है, तो अस्पताल अदालत में जाने से पहले वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा और वकील सत्यकाम से संपर्क करेंगे।

वहीं उत्तर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लखनऊ के अस्पतालों में बेड भर गए हैं। अवध अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर ने बताया, “हमारे पास बेड और ऑक्सीजन की कमी है। अस्पताल इस समय ओवरलोड है,  हमें एक्स्ट्रा बेड भी लगाने पड़े हैं।”

उधर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है, “हमें अन्य राज्यों से ऑक्सीजन आने में रुकावट न हो, ग्रीन कॉरिडोर मिले। अगर भरा हुआ टैंकर एयरलिफ्ट नहीं हो सकता तो खाली टैंकर एयर फोर्स द्वारा एयरलिफ्ट किया जाए।

वहीं सेंट्रल रेलवे ने विशाखापत्तनम से 7 टैंकर लेकर निकली ऑक्सीजन एक्सप्रेस से तीन टैंकर कल नागपुर में उतारे गए। गाड़ी आज सुबह नासिक पहुंचेगी, बाकी के चार टैंकर वहां उतरेंगे। सेंट्रल रेलवे ने कहा है कि हमारी कोशिश है कि जहां ऑक्सीजन एक्सप्रेस की जरूरत है, हम वहां उसे चलाकर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करें।

वहीं उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा कोरोना के मरीज़ों के लिए ऑक्सीजन लंगर चला रहा है। गुरुद्वारे के प्रबंधक गुरप्रीत सिंह रम्मी ने बताया, “हम सड़क पर गाड़ी में ही मोबाइल ऑक्सीजन की सुविधा दे रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि मेरी गाजियाबाद के डीएम और वीके सिंह जी से अपील है कि आप हमें बैकअप के लिए 20-25 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराएं, 25 सिलेंडर से हम 1,000 लोगों की जिंदगी बचाएंगे।

वहीं केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऑक्सीजन-परिवहन वाहनों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने और उनके परिवहन के लिए विशेष गलियारों का प्रावधान करने के लिए पत्र लिखा है। वह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोगों से अस्पताल न जाने की अपील करते हुए कहा है कि देशवासियों से मेरा निवेदन है कि सब धैर्य बनाकर रखें। जिसे ज़रूरत है वे ही अस्पताल जाएं। 98-99% मरीजों को शायद अस्पताल जाने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती है। वे घर में ही ठीक हो सकते हैं और अधिकांश मरीज घर में भी ठीक हो रहे हैं। ज़रूरत पड़ने पर ही अस्पताल जाएं।”

वहीं नोएडा के सेक्टर-27 में एक प्राइवेट अस्पताल में एक 51 वर्षीय कोविड मरीज ने कल रात कूदकर आत्महत्या कर ली। नोएडा जोन के डीसीपी एस राजेश ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलने पर पूछताछ की गई। परिवार वालों ने बताया कि वे कोविड के कारण बहुत परेशान थे।

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