मोदी के गुजरात में भी ऑक्सीजन की किल्लत, कई मरीजों की गई जान

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अहमदाबाद। सऊदी अरब का भेजा हुआ 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भले ही गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर उतर गया हो, लेकिन अहमदाबाद सहित अन्य गुजरात के सभी शहरों में ऑक्सीजन गैस पाने की लाइन में कोई कमी नहीं आई है। ऑक्सीजन रिफिलिंग करने वाली ललन एयर प्रोडक्ट कंपनी जो अहमदाबाद के कठवाड़ा गीडक में स्थित है, आम दिनों में 700 सिलेंडर रिफिल करती है। महामारी के चलते कंपनी तीन शिफ्ट में 2000 सिलेंडर रिफिल कर रही है। इसी प्रकार से अन्य कंपनियों ने अपना प्रोडक्शन बढ़ाया है। इन सबके बावजूद 8-8 घंटे लाइन में लगकर ऑक्सीजन रिफिल कराना पड़ रहा है। मोदी के गृह राज्य में न तो ऑक्सीजन की डिमांड पूरी हो पा रही है। न ही मौतों के आंकड़ों में कमी आ रही है।

शनिवार का दिन कोरोना की दूसरी लहर का सबसे घातक दिन रहा। अहमदाबाद नगर निगम के अनुसार शनिवार, रविवार, सोमवार को एक दिन में 5617, 5864 , 5679 क्रमशः  पॉजिटिव केस दर्ज किए गए। कोविड की पहली लहर में एक दिन में सबसे अधिक 354 केस दर्ज हुए थे। रविवार का आंकड़ा पहली लहर के सर्वाधिक केस की तुलना में 16 गुना था। निगम के अनुसार शनिवार को अहमदाबाद में 25 लोगों की मृत्यु कोरोना के चलते हुई। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई अस्थाई अस्पताल खोले जा रहे हैं। शनिवार को यूनिवर्सिटी कन्वेंशन हॉल में 900 बेड का धनवंतरी कोविड हॉस्पिटल खोला गया, जिसका निरीक्षण गृह मंत्री अमित शाह ने भी किया परंतु ऑक्सीजन की कमी के कारण हॉस्पिटल शुरू नहीं हो पाया।

हॉस्पिटल की ओएसडी अंजू शर्मा ने बताया, “गृह मंत्री के निरीक्षण के बाद कम से कम 100 बेड के साथ अस्पताल शुरू कर देना था, परन्तु मॉकड्रिल के दरमियान पाया गया कि ऑक्सीजन का प्रेशर कम है। जिस कारण अस्पताल शुरू नहीं हो पाया।

राज्य में ऑक्सीजन की किल्लत बढ़ती ही जा रही है। ऑक्सीजन सप्लाई और फिलिंग करने वाले प्लांटों ने कंपनी के गेट पर ‘ऑक्सीजन गैस का स्टॉक उपलब्ध नहीं है।’ का बोर्ड लगा दिया है। निधि हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सुनिल पोपट बताते हैं, “वर्तमान में 70 प्रतिशत मरीज़ ऑक्सीजन की ज़रूरत वाले हैं। ऑक्सीजन की आवश्यक सप्लाई न होने के कारण हॉस्पिटल का स्टॉफ 8-8 घंटे वटवा और चंगोदर जीआईडीसी में लाइन में खड़े होकर ऑक्सीजन ला रहे हैं।” ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने गांधी नगर में पीएम केयर फंड से 11 PSA ऑक्सीजन प्लांट शुरू करने की अनुमति दी है, जो जल्द ही शुरू हो जाएगा।

ऑक्सीजन की कमी से न केवल प्राइवेट अस्पताल जूझ रहे हैं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की कमी है। शुक्रवार को इंडिया टुडे के फोटो जर्नलिस्ट शैलेश रावल का यूएन मेहता हॉस्पिटल में ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण कोरोना से निधन हो गया।

अहमदाबाद के वटवा की 30 वर्षीय महिला को गुरुवार दोपहर सांस लेने में तकलीफ हुई तो उसके पति ने एम्बुलेंस के लिए 108 पर फोन किया। वटवा ज़ोन में एक भी एम्बुलेंस उपलब्ध न होने पर पति महिला को रिक्शे से श्रीजी हॉस्पिटल ले गया। अस्पताल में ऑक्सीजन न होने के कारण स्टाफ ने किसी बड़े अस्पताल ले जाने को कहा। पति रिक्शे में ही अपनी पत्नी को लेकर अहमदाबाद नगर निगम संचालित एलजी हॉस्पिटल पहुंचा, लेकिन अस्पताल ने यह कहते हुए दाखिल करने से मना कर दिया कि नियमानुसार एम्बुलेंस से आए मरीज़ को ही दाखिल किया जाएगा। वहां से पत्नी को लेकर सरदार पटेल अस्पताल और फिर वहां से सरकारी अस्पताल सिविल हॉस्पिटल ले गए।

एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में साढ़े चार घंटे बर्बाद हो गए। साढ़े चार घंटे बाद जब सिविल अस्पताल पहुंचे तो सामने 20000 लीटर ऑक्सीजन टैंक और तीन एम्बुलेंस खड़ी थीं, लेकिन तब तक मरीज़ ऑक्सीजन और एम्बुलेंस की कमी के चलते दम तोड़ चुका था। इसी प्रकार से गुरुवार को ही सिविल अस्पताल में एक रिक्शा चालक की पत्नी ने भी समय से ऑक्सीजन और योग्य इलाज न मिल पाने के कारण दम तोड़ दिया। रिक्शा चालक 12 घंटे अपनी पत्नी को पानी पिला-पिला कर जीवित रखे हुए था।

गुजरात सरकार ने प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। सरकारी प्रेस नोट के अनुसार मार्च महीने में अहमदाबाद सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन की खपत 13 टन प्रति दिन थी, जो अप्रैल में बढ़ कर 55 टन प्रति दिन हो गई। पिछले 15 दिन में 764 टन ऑक्सीजन की खपत हुई है। 12000 लीटर के तीन नए ऑक्सीजन टैंक इंस्टॉल किए गए हैं। जहां से कोविड स्पेशल 1200 बेड हॉस्पिटल, मंजुश्री हॉस्पिटल और सिविल हॉस्पिटल बिल्डिंग को सप्लाई जाती है। एक दिन में दो से तीन बार रिफिलिंग होती है।

सरकारी दावों के उलट अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों के प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन की दिक्कत अधिक है। पिछले महीने तक 7 QM ऑक्सीजन की जो फिलिंग 150 रुपये में होती थी, अब रिफिलिंग का भाव तीन गुना होकर 450 रुपये हो गया है। ये कीमत आने वाले दिनों और बढ़ सकती है। इस बढ़ोतरी को सूरत के कलेक्टर धवल पटेल सामान्य मानते हैं। धवल पटेल कहते हैं, “ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने और सप्लाई कम होने से कीमत बढ़ रही हैं।

गुजरात के सबसे बड़े सरकारी सिविल अस्पताल सहित कई बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली अजय इलेक्ट्रो मेडिकल कंपनी के मालिक गफ्फार अल्लाह बख्श शेख कहते हैं, “पिछले वर्ष जब कोविड लहर में अचानक ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ी थी, लेकिन कोविड की दूसरी लहर में पहली लहर की तुलना में ऑक्सीजन की डिमांड 500 गुना बढ़ गई। प्राइवेट अस्पताल कोविड मरीज़ को दो से तीन दिन भर्ती कर डिसचार्ज कर रहे हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि घर पर ऑक्सीजन लगाकर मरीज़ को रखो। ऑक्सीजन की सप्लाई अस्पतालों तक सीमित नहीं है। लोग कोविड मरीज़ का इलाज डॉक्टर की सलाह पर घर पर भी कर रहे हैं।” शेख बताते हैं कि वर्ष 2019-20 में उनकी कंपनी का टर्न ओवर 7-8 लाख के बीच था। वर्ष 2020 में केवल कोविड अस्पतालों को की गई ऑक्सीजन सप्लाई का टर्नओवर लगभग 14 करोड़ था। ऑक्सीजन की बढ़ती डिमांड को देखते हुए लगता है वर्ष 2021- 22 में संभवतः 45-50 करोड़ पहुंच जाएगा।

ऑक्सीजन के अलावा सिलेंडर की भी कमी है। जिस कारण लोग कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन के खाली सिलेंडरों में ऑक्सीजन की फिलिंग करवा रहे हैं, जिससे सिलेंडर ब्लास्ट होने का भी खतरा है। राज्य में ऑक्सीजन के प्रोडक्शन के लिए कच्चे माल की भी कमी है। फिर भी राज्य सरकार प्रेस नोट जारी कर सब कुछ ठीक है कहकर अपनी विफलता छिपाने की कोशिश कर रही है।

(गुजरात से कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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