Monday, October 25, 2021

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पाक सुप्रीमकोर्ट ने सदी पुरानी हिंदू संत की समाधि को तोड़ने के दोषियों से 33 मिलियन रुपये वसूलने का दिया आदेश

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पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश एससी गुलजार अहमद ने ख़ैबर पख़्तून के करक में एक हिंदू संत की सदी पुरानी समाधि (मंदिर) को तोड़-फोड़ और आग लगाने वाले दोषियों से 33 मिलियन रुपये की लागत वसूलने का आदेश देकर एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला सुनाया है। गौरतलब है कि समाधि/मंदिर का पहले से ही सरकार द्वारा पुनर्वास और जीर्णोद्धार कराया जा चुका है।

पाकिस्तान के इंग्लिश अख़बार ‘डॉन’ के मुताबिक पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खैबर पख्तूनख्वा सरकार को करक जिले के तेरी गांव में एक हिंदू संत की एक सदी पुरानी समाधि (मंदिर) में तोड़फोड़ और आग लगाने में शामिल दोषियों से 33 मिलियन रुपये वसूलने का निर्देश जारी किया।

जब खैबर पख्तूनख्वा के महाधिवक्ता शुमैल बट ने पीठ को अवगत कराया कि 1920 के पहले बने उस मंदिर के पुनर्वास और जीर्णोद्धार पर 33 मिलियन रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। तब पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश गुलज़ार अहमद की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने हिंदू मंदिरों में बर्बरता की घटनाओं से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए प्रांतीय सरकार को निर्देश जारी किया।

आप को बता दें कि शीर्ष अदालत ने 30 सितंबर, 2021 की करक घटना का स्वतः संज्ञान लिया था, जब एक धार्मिक दल के कुछ स्थानीय बुजुर्गों के नेतृत्व में 1,000 से अधिक लोगों ने मंदिर पर हमला कर उसे तहस-नहस कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में पाकिस्तान हिंदू काउंसिल (पीएचसी) के प्रमुख डॉ रमेश कुमार वंकवानी ने आरोप लगाया कि पुनरुद्धार की लागत वसूलने के लिए पिछली अदालत के फैसलों पर जिला प्रशासन की पूरी चुप्पी के साथ उसे प्रोत्साहित किया गया, कारी फैजुल्ला के नेतृत्व में बदमाशों ने, जो कोहाट में एक आतंकवाद विरोधी अदालत द्वारा जमानत पर रिहा किए गए, समाधि की दीवार पर लिखे “मंदिर” शब्द पर आपत्ति जताई थी। संदिग्ध ने मांग की कि ‘मंदिर’ शब्द के बजाय दीवार पर ‘ तीर्थ स्थान’ (श्राइन) शब्द अंकित किया जाए। काराकी में सदियों पुराने हिंदू संत की दरगाह में तोड़फोड़ पर एजी ने तीन पेज की रिपोर्ट दाख़िल की थी।

पीएचसी की रिपोर्ट में कहा गया है, “यह वास्तव में समझ से परे है कि क्या मंदिर, आश्रम, गुरुद्वारा, कृष्ण द्वार, मढ़ी, दरबार, टिकानो, तीरथ या समाधि जैसे पवित्र स्थल प्रशासन के दयनीय दृष्टिकोण से उत्साहित इन बदमाशों द्वारा तय किए जाएंगे।”
ख़ैबर पख़्तून के महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को समझाया कि बर्बरता में शामिल आरोपी अभी भी मुक़दमे का सामना कर रहे हैं, सोचिये कि अगर कोई व्यक्ति जिससे पुनरुद्धार की लागत वसूल की गई हो, वह बाद में निर्दोष पाया गया तो क्या होगा।

अदालत में दायर अपनी तीन पन्नों की रिपोर्ट में, ख़ैबर पख़्तून की सरकार ने कहा है कि घटना के बाद दोषियों को बिना समय बर्बाद किए गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन उन्हें अदालतों ने जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट को आगे बताया गया कि 12 फरवरी, 2021 को कोहाट जेल अधीक्षक के माध्यम से सभी हिरासत में लिए गए संदिग्धों को लागत की वसूली के लिए नोटिस दिए गए थे।

आधिकारिक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि घटना से एक हफ्ते पहले, तेरी शांति समिति और एक वकील, रोहित कुमार ने सहमति व्यक्त की थी कि हिंदू समुदाय एक साल पहले ख़रीदी गई ज़मीन के एक टुकड़े का उपयोग निवास, कार पार्क और आंगन आदि बनाने के लिए कर सकता है। लेकिन हड्डी रिपोर्ट के अनुसार समाधि क्षेत्र में मुस्लिम आबादी के किसी भी विस्तार के खिलाफ होने के कारण मंदिर के प्रार्थना क्षेत्र में विस्तार को लेकर विवाद था। समाधि और अतिरिक्त खरीदी गई भूमि के बीच एक अलग दीवार को पूर्ववत करना समाधि क्षेत्र के विस्तार के रूप में लिया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, लेकिन विवाद की जड़ धर्मस्थल के प्रार्थना क्षेत्र में विस्तार था क्योंकि मुस्लिम आबादी समाधि क्षेत्र में किसी भी विस्तार के खिलाफ थी।
समाधि और अतिरिक्त ख़रीदी गई भूमि के बीच एक अलग दीवार को पूर्ववत करना समाधि क्षेत्र के विस्तार के रूप में लिया जा सकता है।

ख़ैबर पख्तून सरकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसने अपने मूल स्थान पर समाधि का जीर्णोद्धार करवा दिया है, लेकिन राज्य के ख़र्च पर किसी अतिरिक्त स्थल पर किसी अतिरिक्त संरचना का निर्माण इसमें शामिल नहीं किया जा सका। इसमें कहा गया है कि एक बार हिंदू समुदाय द्वारा समाधि को क़ब्ज़ा में ले लिया गया था, वे स्थानीय शांति समिति के साथ अपने समझौते के अनुसार अतिरिक्त भूमि पर आवासीय क्वार्टर और अन्य सुविधाएं बढ़ा सकते थे।

हालांकि, हिंदू परिषद ने सवाल किया कि मुखर उपद्रवियों को मंदिर से संबंधित मामलों में निर्णय लेने या हस्तक्षेप करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। पीएचसी ने अपनी रिपोर्ट में मांग की है कि ख़ैबर पख़्तून मुख्यमंत्री द्वारा 1 जनवरी, 2021 को अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट के डॉ शोएब सुदले के नेतृत्व वाले आयोग के साथ अपनी बैठक के दौरान की गई सभी प्रतिबद्धताओं को बिना किसी देरी के लागू किया जाए।

परिषद ने शीर्ष अदालत से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि मंदिर में सिंध से आने वाले महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों सहित तीर्थयात्रियों के आराम से रहने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। सुनवाई के दौरान, बर्बरता में शामिल होने के आरोप का सामना कर रहे संदिग्धों में से एक, रहमत सलाम खट्टक ने पीठ को बताया कि घटना के बाद लगभग 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, यह कहते हुए कि वह निर्दोष था क्योंकि उसने मंदिर पर बर्बरता में कोई भूमिका नहीं निभाई थी। अदालत ने आगे की कार्यवाही एक महीने के लिए स्थगित कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान

बता दें कि 6 अगस्त को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हिंदू संत की समाधिस्थल पर तोड़फोड़ और आगजनी को अंजाम दिया गया था। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुलज़ार अहमद ने रहीम यार खान इलाके में मंदिर विध्वंस से जुड़े सेल्फ-नोटिस मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस के अधिकारियों को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय थाने के एसएचओ को बर्खास्त करने को कहा था। दरअसल सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गुलज़ार अहमद ने कहा कि पुलिस ने 8 वर्षीय लड़के को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, क्या एसएचओ को पता नहीं था कि जिस व्यक्ति को उन्होंने गिरफ्तार किया है वह बच्चा है? बच्चे को गिरफ्तार करने वाले एसएचओ (SHO)को बर्खास्त किया जाए।

कोर्ट ने पंजाब पुलिस से पूछा कि क्या 8 साल का बच्चा धर्मों के बारे में जानता है? गिरफ्तार बच्चे को एसएचओ द्वारा थाने से ही जमानत पर रिहा किया जा सकता था। कोर्ट ने आदेश दिया कि घटना में इस्तेमाल किया गया सभी सामान बरामद किया जाए और इसमें शामिल लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
इस पर पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि एसएचओ सस्पेंड होंगे। इस पर मुख्य न्यायाधीश गुलज़ार अहमद ने कहा था कि एक पुलिसकर्मी को सस्पेंड करने से कुछ नहीं होगा, निलंबन के बाद भी ये लोग कमाई करते हैं और बाकी सुविधा उठाते रहते हैं।

तब पंजाब पुलिस की ओर से कोर्ट को सूचना दी गई है कि बच्चे को जमानत पर रिहा कर दिया है और सुरक्षा भी मुहैया कराई है। पुलिस अधिकारी घटना के बाद पाकिस्तान हिंदू परिषद के नेता रमेश कुमार वंकवानी के संपर्क में थे।

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