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‘पाकिस्तान’ बचाएगा यूपी में भाजपा की डूबती नैइया!

इस देश में दो तरह का कानून चल रहा है। इशरतजहां, पत्रकार एस.कप्पन, उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे राजनीतिक बंदियों की जमानत याचिकाएं अदालतों से बार-बार खारिज हो रही हैं लेकिन किसी रैली में ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’ का नारा लगाने वालों को कोर्ट से ही चंद घंटे में जमानत मिल जाती है। ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’ का नारा लगवाने वालों का मकसद आसानी से समझा जा सकता है लेकिन इशरतजहां, एस. कप्पन, उमर खालिद, शरजील इमाम के भाषण और एक्शन को समझने में इस देश की अदालतों को कई-कई साल लग रहे हैं।

आगरा की घटना सत्तारूढ़ दल के खतरनाक इरादों का संकेत है। आगरा की घटना का यूपी के चुनाव से सीधा संबंध है। यह घटना भी मालेगांव ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट जैसे घटनाक्रमों की साजिश की पुष्टि करती है। इस घटना के फौरन बाद भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट किया, जिसमें उसने लिखा- क्या अखिलेश भैया की समाजवादी पार्टी पाकिस्तान से चलाई जा रही है? 

क्या हुआ है आगरा में

आगरा में 15 जुलाई को महंगाई के खिलाफ समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन था। प्रदर्शन में अखिलेश यादव जिन्दाबाद के नारे लग रहे थे। उसी दौरान अचानक वहां  ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’  के नारे लगने लगे। प्रदर्शन में आए लोगों ने अपने आस पास नजर मारी और फौरन ही उन लोगों को पुलिस के हवाले कर दिया, जो ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’  के नारे लगा रहे थे। जिन लोगों ने प्रदर्शन के दौरान ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’ का नारा लगाने वालों को पकड़ा था, तब तक वे उनकी पहचान और धर्म नहीं जानते थे। लेकिन पुलिस ने जब उन लोगों को पकड़ा तो उनकी पहचान और राजनीतिक दल से उनके रिश्तों की दास्तान भी सामने आ गई। चूंकि नारा लगाने वालों का वीडियो भी वायरल हो चुका था, इसलिए पुलिस मामले को दबा नहीं पाई। लेकिन आगरा पुलिस ने एक चालाकी और भी की, उसने 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। यह अज्ञात पुलिस के लिए इस मामले को घुमाने और समुदाय विशेष को टारगेट करने में मदद कर सकते हैं।

आगरा पुलिस ने घटनास्थल से जिन्हें पकड़ा, उनकी पहचान पंकज सिंह, दीपक वाल्मीकि, मधुकर सिंह, चंद्र प्रकाश और आरिफ खान के रूप में हुई। इन पांचों पर धारा 144 तोड़ने, धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला नाई की मंडी थाने में दर्ज किया गया। लेकिन जब पुलिस ने इनसे नारा लगाने का कारण जानना चाहा तो सभी आरोपियों ने बताया कि वे भाजपा, भारतीय जनता युवा मोर्चा और आरएसएस से जुड़े हैं। इतनी जानकारी मिलने के बाद थाना प्रभारी ने अपने आला अफसरों को इनकी पार्टी विशेष से सम्बद्धता की जानकारी दी। पुलिस ने इनके आवाज का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया और जब आरोपियों को अदालत में पेश किया तो वहां से इन्हें जमानत मिल गई। पुलिस ने मामले को संदिग्ध बताते हुए कोर्ट को जानकारी दी कि इसकी अभी जांच हो रही है और आवाज का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस जांच के दौरान उन 25 अज्ञात को खोजकर निकाल भी सकती है और बहुत मुमकिन है कि वो लोग वो निकलें, जिन पर ऐसे नारे लगाने का शक पुख्ता साबित हो जाएगा। क्योंकि आम धारणा तो यही है कि भला पंकज सिंह, मधुकर सिंह, दीपक वाल्मीकि और चंद्र प्रकाश ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’ के नारे कैसे लगा सकते हैं।

एक तरफ आगरा में आरोपियों को फौरन जमानत मिल रही है तो दूसरी तरफ दिल्ली की मंडोली जेल में हाल ही में इशरतजहां पर जेल में बंद कुछ कैदियों से हमला कराया गया। यह हमला अचानक नहीं हुआ। इसकी भी साजिश हुई थी। इशरतजहां को शाहीनबाग आंदोलन के दौरान दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था। जेल में किसी भी तरह की घटना खासकर दूसरे कैदियों की घटना बिना जेल अधिकारियों की मर्जी के नहीं होती है। इशरतजहां एक राजनीतिक कैदी हैं लेकिन उन्हें जघन्य अपराधों में सजा काट रहे कैदियों के बीच ले जाया गया। उनके खिलाफ जेल में प्रचार किया गया। इस वजह से कुछ कैदियों ने इशरतजहां पर हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले का न तो संज्ञान लिया और न ही कोई केस दर्ज किया। इशरतजहां ने इस घटना की जानकारी खुद अदालत को दी है।

दिल्ली की घटना में नाम छिपाए गए

यहां पर दिल्ली में जनवरी 2021 में हुई घटना का उल्लेख जरूरी है। 23 जनवरी 2021 को देर रात दिल्ली के खान मार्केट मेट्रो स्टेशन के पास पुलिस को पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगाने की सूचना मिली। पुलिस ने घटनास्थल से दो युवकों, तीन युवतियों और एक किशोर को पकड़ा। जब इनसे पूछताछ हुई तो इन लोगों ने बताया कि इन लोगों ने यूलू बाइक किराए पर ली थी। और उस बाइक से रेस लगा रहे थे। उन्होंने रेस लगाने के दौरान आपस में एक दूसरे के नाम दूसरे देशों के नाम पर रखे थे। इसमें एक नाम पाकिस्तान भी था। संयोग से पाकिस्तान नामक युवक रेस जीत गया, इसके बाद खुशी में उन्होंने पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगा दिया। यह घटना इतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितनी यह बात कि पकड़े गए लोग मुस्लिम नहीं थे। दिल्ली पुलिस ने मीडिया को जो जानकारी दी, उसमें उसने इन लोगों की पहचान तक नहीं बताई। ये सभी बड़े घरों के युवक-युवती थे। आगे मामला किस हाल में पहुंचा कोई नहीं जानता लेकिन राजधानी के प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने विस्तार से इसकी कवरेज नहीं की। हालांकि किसी देश का नारा लगाने पर अदालत कोई सजा नहीं सुनाती है न ही इसे अपराध माना जाता है। लेकिन जब बात पाकिस्तान की आए तो माहौल बदल जाता है। आगरा की घटना में पुलिस ने धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप की धारा भी लगाई है।

ध्रुवीकरण की चौतरफा साजिश

दिल्ली की घटना आई-गई हो गई लेकिन आगरा की घटना चंद महीने बाद होने वाले यूपी चुनाव के मद्देनजर खास है। दिल्ली की घटना पर चुप्पी साधने वाले अमित मालवीय आगरा की घटना पर उत्तेजित दिखे। आगरा की घटना में हिन्दू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की साजिश नजर आ रही है। यूपी और देश के कुछ हिस्सों में जानबूझकर ऐसी घटनाएं अंजाम दी जा रही हैं, जिससे इस ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिले। हाल ही में लखनऊ में जिस गरीब रिक्शे वाले को कथित आतंकवाद के आरोप में पकड़ा गया, उसकी तरह रिहाई मंच इशारा कर ही चुका है। मेवात में हिन्दू संगठनों द्वारा बेवजह आयोजित की जा रही महापंचायतें भी इसी साजिश का हिस्सा हैं। गुड़गांव के पास पटौदी इलाके में पिछले महीने हुई पंचायत के बाद अब 25 जुलाई को रामगढ़ में हिन्दू संगठनों ने फिर से महापंचायत बुलाई है।

इसका ऐलान भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने किया है। यह शख्स अपने विवादास्पद बयानों के लिए जाना जाता है। रामगढ़ वैसे तो राजस्थान में फैले मेवात क्षेत्र में आता है लेकिन यह गांव हरियाणा-राजस्थान की सीमा पर पड़ता है तो एक तरह से ये दोनों राज्यों के मेवात इलाके से जुड़ा है।  ज्ञानदेव आहूजा वही भाजपा नेता है जिसने कहा था कि जेएनयू में तीन हजार कॉन्डोम और एबॉर्शन के लिए इस्तेमाल होने वाले 500 इंजेक्शन रोजाना मिलते हैं। एक और बयान में उसने कहा था – गोकशी और गोतस्करी करने वाले मारे जाएंगे।

आगरा, लखनऊ, मेवात की घटनाओं के अलावा धर्मांतरण के आरोप, दो बच्चों की नीति, कांवड़ यात्रा को अनुमति आदि ताजा घटनाक्रम हैं, जिसके जरिए यूपी के चुनावी माहौल का तापमान लगातार बढ़ाया जा रहा है। जनता गंगा में तैरती लाशों का मंजर भूल चुकी है और वह ध्रुवीकरण के चक्रव्यूह में फंसती जा रही है।

(यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।) 

This post was last modified on July 17, 2021 6:03 pm

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