25.1 C
Delhi
Friday, September 17, 2021

Add News

पेगासस : 5 भारतीय सहित 17 पत्रकारों ने पेरिस में दर्ज़ करायी शिकायत

ज़रूर पढ़े

पेगासस जासूसी कांड में सात देशों के 17 पत्रकारों ने रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के साथ मिलकर इजारयली कंपनी एनएसओ ग्रुप के ख़िलाफ़ खिलाफ फ्रांस की राजधानी पेरिस में शिकायत दर्ज कराई है। इनमें भारत के भी 5 पत्रकार शामिल हैं। पेगासस जासूसी कांड में 7 देशों के 17 पत्रकारों ने पैरिस की अदालत में एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शिकायत करने वाले पत्रकारों ने कहा है कि उनकी सरकारों ने उनके या तो फोन हैक किए या फिर हैक करने की कोशिश की। शिकायत में पेगासस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी एनएसओ और उन सभी लोगों को आरोपी बनाने की बात की गई है जो जांच के दौरान इस मामले में शामिल पाए जाएंगे। इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब द्वारा किए गए फॉरेंसिक परीक्षण में तरनतारन के वकील जगदीप सिंह रंधावा के फोन में पेगासस की गतिविधि के प्रमाण मिले हैं। साथ ही लुधियाना के एक वकील जसपाल सिंह मंझपुर का नाम सर्विलांस के संभावित निशानों की लिस्ट में मिला है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर की शिकायत के साथ दो अन्य पत्रकार भी जुड़े हैं। इनमें से एक फ्रेंच-मोरक्कन नागरिकता वाला पत्रकार भी शामिल है। जिन 17 पत्रकारों ने मामला दर्ज कराया है उनमें दो अजरबैजान से, पांच मेक्सिको से, पांच भारत से, एक स्पेन से, दो हंगरी से और मोरक्को से और एक टोगो से है। सारे पत्रकार उन करीब 200 पत्रकारों में से हैं जिनके फोन पर जासूसी का गई या करने की कोशिश की गई।

संगठन की ओर से कहा गया है कि जांच में उन सभी लोगों की पहचान करनी चाहिए, जो इसमें शामिल थे, फिर चाहे वह कंपनी के कार्यकारी अधिकारी हो या संबंधित देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी। एक ऐसे स्कैंडल में जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता को खामियाजा भुगतना पड़े, किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए। इन सभी पत्रकारों ने कहा है कि उन्हें या तो आशंका है या फिर जानकारी है कि उनकी सरकारों ने उनके फोन की जासूसी सिर्फ इसलिए कराई क्योंकि वे जनहित में पत्रकारिता कर रहे थे।

भारत से द वायर के सह-संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन और एमके वेणु, वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिंह (जो वायर के लिए लिखते भी हैं), भारत में आरएसएफ के संवाददाता शुभ्रांशु चौधरी और 2018 में साहसिक पत्रकारिता के लिए आरएसएफ प्रेस फ्रीडम पुरस्कार जीतने वाली स्वाति चतुर्वेदी ने शिकायत दर्ज कराई है। द वायर ने खुलासा किया था कि पेगासस सर्विलांस की संभावित लक्ष्यों की लीक सूची में 40 से अधिक भारतीय पत्रकारों के फोन नंबर मौजूद थे। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई है कि सिद्धार्थ वरदराजन, एमके वेणु और सुशांत सिंह के फोन नंबर भी इस सूची में थे। स्वाती चतुर्वेदी का फोन नंबर भी इस सूची में था, जिससे उनके संभावित सर्विलांस का शिकार होने का पता चलता है।

आरएसएफ के प्रवक्ता पॉलीन एडेस-मेवेल ने कहा कि इन पत्रकारों द्वारा दायर की गई शिकायतें, जो हर महाद्वीप से हैं, एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर के साथ की गई निगरानी के पैमाने की पुष्टि करती हैं। जांच में शामिल सभी लोगों की पहचान होनी चाहिए, चाहे वह कंपनी के अधिकारी हों या संबंधित देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हों। प्रेस की स्वतंत्रता के लिए इस घोटाले की पर्तें खुलकर सामने आना चाहिए और जो भी लोग इसमें शामिल हैं उन्हें बेपरदा करना चाहिए। आरएसएफ के अनुसार कुछ पत्रकारों की विदेशी सरकारें भी जासूसी करा रही थीं। इनमें स्पेन के इग्नैसियो केम्बरेरो भी शामिल हैं, जो मोरक्को के निशाने पर थे और जिनकी लगभग-लगभग जासूसी की जा रही थी।

आरएसएफ ने औपचारिक रूप से इन 17 पत्रकारों के मामलों को संयुक्त राष्ट्र के चार विशेष प्रतिवेदकों, राय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निजता के अधिकार, मानवाधिकार रक्षकों और आतंकवाद का मुकाबला करते हुए मानवाधिकारों की रक्षा करने वालों को संदर्भित किया है, उनसे स्पष्टीकरण मांगने के लिए कहा। सरकारों को इन पत्रकारों की जासूसी करने के लिए पेगासस का उपयोग करने का संदेह था।

आरएसएफ ने पेगासस जैसे स्पायवेयर के निर्यात, बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त अंतरराष्ट्रीय नियमन और इस तरह के सॉफ्टवेयर की बिक्री पर अंतरराष्ट्रीय रोक लगाने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से मामले की जांच और स्पायवेयर की बिक्री और इस्तेमाल पर हर संभव प्रकाश डालने के लिए एक व्यवस्था अपनाने को कहा है।

द वायर ने फ्रांस की गैर-लाभकारी फॉरबिडन स्टोरीज और अधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित द वॉशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन और ल मोंद जैसे 16 अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के साथ मिलकर ये रिपोर्ट्स प्रकाशित की। यह जांच दुनियाभर के 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबर पर केंद्रित थी, जिनकी इजरायल के एनएसओ समूह के पेगासस स्पायवेयर के जरिये सर्विलांस की जा रही थी। इसमें से कुछ नंबरों की एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फॉरेंसिक जांच की है, जिसमें ये साबित हुआ है कि उन पर पेगासस स्पायवेयर से हमला हुआ था।

साल 2019 में पंजाब के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील के फोन में पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी की गई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्योरिटी लैब द्वारा उनकी डिवाइस के फॉरेंसिक परीक्षण, जिसे द वायर से साझा किया गया है, में यह बात सामने आई है। तरनतारन के वकील जगदीप सिंह रंधावा ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद से मानवाधिकारों के हनन और जबरन गायब होने के मामलों पर काम करने वाले मानवाधिकार वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक समूह- खालरा मिशन संगठन के साथ काम करते हैं। उनका नंबर पेगासस प्रोजेक्ट द्वारा जांची गई हजारों नंबरों के लीक डेटाबेस में था।

द वायर पुष्टि कर सकता है कि एमनेस्टी द्वारा उनके आईफोन डेटा के जांच में उनके फोन में जुलाई 2019 में अधिकांश हिस्से और अगस्त 2019 में पांच दिनों के लिए पेगासस के होने का प्रमाण मिला है। हालांकि फॉरेंसिक विश्लेषण में मालूम नहीं चला कि रंधावा के फोन की हैकिंग का आदेश किसने दिया और इसे हैक करने के बाद क्या किया गया। पेगासस प्रोजेक्ट के तहत मिली जानकारी के अनुसार, रंधावा का फोन साल 2019 के मध्य में संभावित निशाने के तौर पर चुना गया था।

पेगासस प्रोजेक्ट के खुलासे प्रकाशित करने के बाद से किए गए परीक्षणों में रंधावा सहित तीन भारतीय फोन पर पेगासस से संबंधित गतिविधि के निशान पाए गए हैं, जिसके बाद भारत में ऐसे फोन की कुल 24-25 में से 13 हो गई है। अब तक भारत सरकार ने औपचारिक रूप से कभी इस बात से न ही इनकार किया है, न ही यह पुष्टि की है कि उसकी कोई भी एजेंसी पेगासस की ग्राहक है।

लुधियाना के एक अन्य प्रमुख मानवाधिकार वकील जसपाल सिंह मंझपुर, जिन्हें पंजाब में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामलों पर काम करने के लिए जाना जाता है, को 2018 के मध्य में निगरानी के संभावित निशाने के रूप में चुना गया था। द वायर द्वारा संपर्क किए जाने पर मंझपुर को संभावित जासूसी के बारे में सुनकर आश्चर्य नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि मैं केंद्र सरकार की दिलचस्पी वाला का व्यक्ति हूं, मैं हमेशा से रहा हूं।

मंझपुर ने बताया कि जुलाई 2018 में जब उनका नंबर सूची में दिखाई देता है, तब ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अधिकारियों ने उन्हें पूछताछ के लिए नई दिल्ली बुलाया था। उन्होंने दावा किया कि बैठक में उनकी सूत्रों के साथ हुई कुछ निजी बातचीत खुफिया अधिकारियों के पास उपलब्ध थी। तभी उन्हें शक हुआ था कि उनकी निगरानी की जा रही है। उस समय मुझे नहीं पता था कि वे इसे कैसे कर रहे हैं, लेकिन मैं बिल्कुल भी हैरान नहीं था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

पूर्व आईएएस हर्षमंदर के घर और दफ्तरों पर ईडी और आईटी रेड की एक्टिविस्टों ने की निंदा

नई दिल्ली। पूर्व आईएएस और मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर के घर और दफ्तरों पर पड़े ईडी और आईटी के...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.