Tuesday, October 4, 2022

भीमा कोरेगांव के 7 आरोपियों के जब्त किए गए मोबाइल की जांच करेगी पेगासस कमेटी

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स्पेशल कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की याचिका को अनुमति देने के बाद, भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में सात आरोपियों, रोना विल्सन, आनंद तेलतुन्बड़े, वर्नोन गोंजाल्विस, पी. वरवर राव, सुधा भारद्वाज, हनी बाबू और शोमा सेन के मोबाइल हैंडसेट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तकनीकी समिति (टीसी) को पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके जासूसी के आरोपों की जांच करने के लिए सौंपने के निर्देश दिए हैं। स्पेशल न्यायाधीश डीई कोठालीकर ने आरोपियों के मोबाइल हैंडसेट को तकनीकी समिति को सौंपने की अनुमति दी। रजिस्ट्रार द्वारा कल जांच अधिकारी को उपकरण देने की संभावना है जो इसे समिति को सौंपेंगे।

गौरतलब है कि अभी तक पेगासस स्पाइवेयर जासूसी कांड से कथित तौर पर प्रभावित केवल दो व्यक्तियों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित तकनीकी समिति को अपने फोन सौंपे हैं। इसके कारण समिति को समय सीमा बढ़ानी  पड़ी है, ताकि और भी लोग उसके पास पहुंचें। तकनीकी समिति ने अब यह समय सीमा आठ फरवरी कर दी है, ताकि वैसे और भी लोग समिति से संपर्क कर सकें, यदि उन्हें संदेह है कि उनके फोन में पेगासस स्पाइवेयर का हमला हुआ है। यह निर्णय पेगासस स्पाइवेयर मामले में न्यूयार्क टाइम्स में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के बीच लिया गया है।

एनआईए ने शनिवार को भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में सात आरोपियों के जब्त किए गए मोबाइल हैंडसेट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल की जांच के लिए गठित तकनीकी समिति को सौंपने के लिए स्पेशल एनआईए कोर्ट का रुख किया था। सात आरोपियों में रोना विल्सन, आनंद तेलतुबडे, वर्नोन गोंजाल्विस, पी. वरवर राव, सुधा भारद्वाज, हनी बाबू और शोमा सेन हैं। अक्टूबर 2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके राजनेताओं, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं आदि की निगरानी के आरोपों को देखने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने  सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया है। समिति ने कहा था कि अगर किसी को भी संदेह है कि उनके उपकरण हैक हुए थे, तो वे समिति को इसकी जानकारी लिखित में दे सकते हैं। आरोपी ने तब तकनीकी समिति को पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके जासूसी करने के अपने संदेह के बारे में लिखा था, जब एक यूएस-आधारित फोरेंसिक परामर्श फर्म ने पुष्टि की थी कि रोना विल्सन का आईफोन 8 जून, 2018 को मामले में गिरफ्तारी से पहले पेगासस स्पाइवेयर से संक्रमित था।

आरोपी ने कहा कि गिरफ्तारी के समय सभी 26 उपकरण जब्त कर लिए गए थे। उनके अनुरोधों पर ध्यान देते हुए तकनीकी समिति ने एनआईए को उपकरणों तक पहुंचने, कॉपी करने और उनका निरीक्षण करने के लिए लिखा। भारत में सोलह नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को, मुख्य रूप से रोना विल्सन और सह-आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग के कंप्यूटर से प्राप्त पत्रों के आधार पर कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, जिन पर प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश का आरोप है।

पुणे पुलिस ने शुरू में 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक पर जाति आधारित हिंसा की जांच की और हिंसा से माओवादी संबंधों का आरोप लगाते हुए अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया। बाद में एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।

आरोपियों ने दावा किया है कि उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैक किए गए थे और उनके खिलाफ सबूत लगाए गए। संयुक्त राज्य अमेरिका में एक डिजिटल फोरेंसिक परामर्श कंपनी आर्सेनल कंसल्टिंग ने कई रिपोर्टें (कम से कम 3) प्रस्तुत की हैं जो यह निष्कर्ष निकालती हैं कि आरोपी के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का हवाला दिया गया था। उनकी पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि विल्सन का कंप्यूटर नेटवायर (ऑनलाइन $ 10 के लिए उपलब्ध) नामक एक मैलवेयर से संक्रमित था, जिसे 6 जून, 2018 को उनकी गिरफ्तारी से दो साल पहले 13 जून, 2016 को एक ईमेल के माध्यम से लगाया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका इस संबंध में लंबित है। 18 जून 2021 की तीसरी रिपोर्ट के अनुसार, सह-आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग के कंप्यूटर को फोरेंसिक फर्मों में नामित एक ही साइबर हमलावर द्वारा पहली दो रिपोर्ट में 20 महीने से अधिक समय तक छेड़छाड़ की गई थी।

इस बीच पेगासस के संबंध में उच्चतम न्यायालय  के समक्ष मूल याचिकाएं दाखिल करने वालों में शामिल अधिवक्ता एम.एल. शर्मा के द्वारा इजरायली स्पायवेयर पेगासस के कथित इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है, जिसमें अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह पेगासस मामले में अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर का संज्ञान ले और 2017 में हुए भारत-इजरायल रक्षा सौदे की जांच का आदेश दे।

दरअसल न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर में दावा किया गया है कि भारत ने इजरायल के साथ 2017 में दो अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा सौदे के तहत पेगासस स्पायवेयर खरीदा था। समाचार पत्र के इस दावे के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार अवैध जासूसी में लिप्त है, जो देशद्रोह के समान है। नयी याचिका में कहा गया है कि सौदे को संसद की मंजूरी नहीं मिली थी, लिहाजा इसे रद्द करके धनराशि वसूल की जानी चाहिए।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)  

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