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सरकारी दमन के 100 दिन पूरे होने के मौके पर लोगों ने दिखायी कश्मीरियों के साथ एकजुटता

नई दिल्ली/लखनऊ। कश्मीरी अवाम के खिलाफ हुए सरकारी दमन के 100 दिन पूरे होने पर आज देश में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा कार्यक्रम हुआ जिसमें तमाम संगठनों के लोगों ने शिरकत की। इसके साथ ही लखनऊ के प्रेस क्लब में भी इसी तरह का एक बड़ा आयोजन किया गया।

समाजवादी समागम ने 26 नवंबर को जम्मू से श्रीनगर तक का पदयात्रा का कार्यक्रम रखा है। 7 दिनों के इस कार्यक्रम में उसमें शामिल लोग सूबे के लोगों से बात करेंगे और उनकी हालात का जायजा लेने की कोशिश करेंगे।

जंतर-मंतर पर बोलते हुए सीपीएम नेता सुभाषिनी अली ने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर कश्मीरी भी हमारे तरह के नागरिक हैं तो उनके साथ सौतेला व्यवहार क्यों हो रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में दमन का यह सिलसिला पांच अगस्त से नहीं बल्कि कई दशकों पुराना है जब चुनी हुई सरकारों से अधिकार छीन कर उसे सुरक्षा बलों के हवाले कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि इन 30 सालों में 80 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को आगे बढ़ करके जनता और वहां के नेताओं के साथ बातचीत करनी होगी। और आगे का रास्ता निकालना होगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद कश्मीर तबाह हो रहा है। कश्मीर के जिन नेताओं ने भारत के साथ रहने की वकालत की उन्हें जेल में डाल दिया गया है। पिछले चुनाव में 74 प्रतिशत कश्मीरियों ने वोट डाला था परंतु अब वे अपना भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में आपातकाल से बड़ा संकट है। देश को एनआरसी के नाम पर बांटा जा रहा है। लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों ने बता दिया कि जनता बदलाव चाहती है।

अध्यक्षीय भाषण में समजवादी समागम के प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि कश्मीर में भारत बिखर रहा है कश्मीर में भारत का लोकतंत्र बिखर रहा है। कश्मीर में भारतीय एकता दाव पर लगी हुई है इसलिए अब एक शुरुआत होने वाली है जो जम्मू में लोकतांत्रिक सभा की शुरूआत से होगी। ये शुरुआत कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जायेगी। देश के संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों को कश्मीरियों के सच की आवाज के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार कश्मीर के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह बर्बाद करने पर आमादा है।

सीपीआई के अतुल अंजान ने कहा कि हिटलर और मुसोलिनी के विचारों में विश्वास रखने वाली यूरोप की पार्टियों के सांसदों को मोदी सरकार कश्मीर भेजती है लेकिन अपने सांसदों को रोकती है यह सांसद का अपमान है, उन्होंने कहा कि इतिहास बतलाता है बन्दूक से किसी विचार को नहीं कुचला जा सकता|

समाजवादी समागम के प्रो राजकुमार जैन ने कहा कि जितने कश्मीरियों को केन्द्र सरकार ने जेल में डाला है कम से कम उतने कश्मीर समर्थकों को जेल जाकर कश्मीरियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करनी चाहिए।
नंदिता नारायण ने कहा कि कश्मीर के नागरिकों को विशेषकर बच्चों और महिलाओं को जो प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उस दर्द को समझना जरूरी है नहीं तो हम पाखंडी कहलाएंगे। उन्होंने बताया कि पिछले सौ दिनों में हजारों बेगुनाहों को जेल में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो भी मीडिया में दिखाया जा रहा है वह मोदी का झूठा प्रचार है। अमरेश ने कहा कि नेता जी सुभाषचन्द्र बोस ने कश्मीरियों का साथ दिया था हम भी कश्मीरियों के साथ खड़े हैं।

तपन जी ने कहा कि धारा 370 और 35 ए को लागू करने के ऐतिहासिक कारण थे। इन धाराओं को हटाना जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और अमित शाह दोनों जम्मू-कश्मीर के बारे में झूठे तथ्य लोगों के सामने पेश कर रहे हैं।
जयशंकर गुप्त ने कहा कि कुछ लोग सब्जी-भाजी की तरह जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदना चाहते हैं उसी मानसिकता से 370 और 35ए समाप्त किया गया है। सरकार अडानी-अंबानी को जमीनें सौंपना चाहती है। उन्होंने कहा कि सबसे दुखद यह है कि अभी तक प्रैस कौंसिल ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधिमंडल तथ्यों की जांच करने कश्मीर नहीं गया है।

कविता श्रीवास्तव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर सर्वोच्च न्यायालय का मौन आश्यर्चजनक है। संविधान के सभी मूल्यों के साथ जब तोड़-मरोड़ की जा रही है। तब सर्वोच्च न्यायालय को चुप नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने देश के विपक्षी राजनैतिक दलों से अपील की कि वो सड़कों पर निकलें।
विक्रम सिंह ने कहा कि 370 और 35 ए हटाने का फैसला केन्द्र सरकार का है, जनता का नहीं। जम्मू-कश्मीर की जनता को यह तय करने का अधिकार है कि वो क्या चाहती है।
आशा शर्मा ने कहा कि हम सरकार के साथ वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारा संघर्ष संविधान के विध्वंस के खिलाफ है।

एनएफआईडब्लू की रुश्दा ने कहा कि कश्मीरी महिलाओं ने जो आपबीती सुनाई है वह बहुत दर्दनाक है। सैकड़ों युवा लापता हैं। हमें अंतरराष्ट्रीय मंचों तक इन मुद्दों को पहुंचाने की जरूरत है।
मैमूना ने कहा कि सर्दी के मौसम में कश्मीरियों को बिजली और पानी और रोजगार के साधन उपलब्ध न हों यह षडयंत्र केन्द्र सरकार द्वारा किया गया है। यह वैसा ही षडयंत्र है जैसा हिटलर द्वारा किया गया था।
लोकतांत्रिक जनता दल के महासचिव अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि समाजवादियों ने सदा दमन का विरोध किया है। आज भी समाजवादी कितनी ही पार्टियों में क्यों न बंटे हों वो कश्मीर को जेल खाने में बदले जाने के खिलाफ एक साथ खड़े हैं तथा लोकतंत्र की बहाली चाहते हैं।

बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम के त्रिदेशी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के संयोजक डॉ. सुनीलम ने कहा कि आज देश में सौ से अधिक स्थानों पर कश्मीर एकजुटता दिवस का आयोजन कश्मीरियों को यह बताने के लिए किया गया है कि भले ही केन्द्र सरकार कश्मीरियों के खिलाफ हो लेकिन देश के समाजवादी वामपंथी एवं प्रगतिशील जनसंगठन कश्मीर की जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम द्वारा 26 नवम्बर से 2 दिसम्बर के बीच जम्मू से श्रीनगर कश्मीर एकजुटता मार्च निकाली जा रही है।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अनहद के अबूजर ने किया| कार्यक्रम के बाद बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम के त्रिदेशीय महामंत्री, बांग्लादेश के सांसद मोयुद्दीन बादल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी।

कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के मकसद से इसी तरह का कार्यक्रम लखनऊ में भी आयोजित हुआ। महिला संगठन एडवा, एपवा, सांझी दुनिया,  महिला फेडेरेशन, एनपीएएम, हमसफ़र एवं सामाजिक संगठन रिहाई मंच, एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विचार गोष्ठी कर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए एडवा की मधु गर्ग ने कहा कि सरकार ने कश्मीरी जनता के साथ विश्वासघात किया है और उनके संवैधानिक व मानवाधिकारों का हनन किया है ।  गोष्ठी के आरंभ में कश्मीर में लोकतंत्र बहाली एवं कश्मीरी अवाम के जनजीवन को सामान्य सुनिश्चित करने की मांग पर एपवा की मीना सिंह द्वारा प्रस्ताव रखा गया।

एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुधा ने कहा कि आज कश्मीरी जो दर्द झेल रहे हैं, उनके बच्चे पैलेट गन का शिकार हो रहे हैं निर्दोषों को जेलों में ठूंसा जा रहा है। लेकिन वहां की खबरें जनता तक पहुंच ही नहीं रहीं हैं। सुधा ने कश्मीर के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भाजपा के मंसूबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अपने एजेंडे को पूरा करने में लगी है और वह एजेंडा हिंदू राष्ट्र का एजेंडा है। साझी दुनिया की डा. रुपरेखा वर्मा ने कहा कि कश्मीर से धारा 370व 35A हटने के बाद यह भ्रम फैलाया गया कि अब कश्मीर आतंकवाद से मुक्त होगा। बेहूदे बयान आने लगे कि अब कश्मीरी लड़कियों को बहू बना लेंगे जिससे इनकी गंदी मानसिकता सामने आ गई।

इनके लिए कश्मीर एक जमीन का टुकड़ा है वहां की आबादी से उन्हें कोई मतलब नहीं है। एनपीएएम के अरुंधती धुरु ने कहा कि की प्रदेश जैसे हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, उत्तराखंड जैसे अन्य कई राज्यों में भी संविधान ने विशेष प्रावधान किए हैं। किन्तु कश्मीर में क्योंकि मुस्लिम बाहुल्य आबादी है इसलिए हिंदुत्व के एजेंडे के तहत उसका दमन किया जा रहा है। रिहाई मंच के शोएब ने कश्मीर की गंगा जमुनी तहजीब की की मिसालें दीं। उन्होंने कहा कि राजशाही के खिलाफ जब कश्मीरी अवाम लड़ रही थी तब आरएसएस “प्रजा परिषद” के नाम से राजा का साथ दे रही थी।

उन्होंने कश्मीर के सवाल को जनता के बीच ले जाने का आह्वान किया। इप्टा के राकेश ने मुक्तिबोध की कविता सुना कर आज के हालात का बयान किया। पत्रकार नसीरुद्दीन ने कहा कि आज हमारे देश के इतिहास को झूठ बोलकर बदलने की साज़िश की जा रही है। अंत में धारा 370 व 35A को बहाल करने की मांग, जम्मू-कश्मीर को पुनः राज्य का दर्जा देने की मांग, फौज की विशेष पावर AFPSA क़ो समाप्त करने की मांग पर व कश्मीरी जनता के साथ एकजुटता के संकल्प के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। आज के कार्यक्रम में सीमा कटियार, कांति मिश्रा, राजीव यादव उपस्थित थे।

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