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रांची की सड़कों पर गूंजा स्टेन स्वामी की रिहाई का नारा, 25 से ज्यादा संगठनों ने लिया ‘न्याय मार्च’ में हिस्सा

रांची। आज रांची में विभिन्न जन आन्दोलनों, जन संगठनों, वाम दलों और झारखंड के सत्तारूढ़ दल के प्रतिनिधियों द्वारा स्टेन स्वामी समेत सभी राजनैतिक बंदियों की रिहाई के लिए न्याय मार्च निकाला गया। मार्च ज़िला स्कूल से शुरू होकर राज भवन तक पहुंचा जहां वह धरने में तब्दील हो गया।

मार्च में आदिवासी वीमेंस नेटवर्क, आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच, AIPF, AISA, अखड़ा, CPI, CPI(ML), CSSF, कांग्रेस, मासस, जन मुक्ति संघर्ष वाहिनी, मानवीय एकता, झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड जनाधिकार महासभा, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, रोजी रोटी अधिकार अभियान, विस्थापन विरोधी जन विकास आन्दोलन, सिंहभूम आदिवासी समाज, सांझा कदम, NAPM, नेशनल डोमेस्टिक वर्कर्स मूवमेंट समेत तमाम संगठन शामिल थे।

आदिवासी अधिकार मंच के प्रफुल लिंडा ने स्टेन के प्रशासन द्वारा अमानवीय बर्ताव की कड़ी निंदा की। संजय पांडे (कांग्रेस के ज़िला सचिव) ने कहा कि स्टेन की गिरफ़्तारी केंद्र सरकार की झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों की लूट बढ़ाने की साज़िश का एक हिस्सा है। 

झारखंड की जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि पूरा देश स्टेन की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी गाँव-गाँव में लोग स्टेन की लैंड बैंक नीति के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को लोगों पर लग रहे झूठे आरोपों का संज्ञान लेना पड़ेगा।

बगोदर के विधायक व CPI(ML) नेता विनोद सिंह ने कहा कि ये सड़कें और राजभवन इस बात के गवाह हैं कि स्टेन बार-बार वंचितों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों व जन अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले अन्य लोगों पर झूठे आरोपों का सिलसिला मोदी सरकार के कार्यकाल में बहुत बढ़ गया है। भीमा कोरेगांव की तर्ज पर अब CAA-NRC का विरोध करने वाले राजनैतिक नेताओं व छात्रों पर दिल्ली में दंगे फैलाने के झूठे आरोप लग रहे हैं। उन्होंने सभी राष्ट्रीय विपक्षी दलों से अपील की कि वे स्टेन स्वामी की रिहाई के लिए एकजुट हों। CPI(ML) के भुनेश्वर केवट ने बोला कि जो भी संवैधानिक मूल्यों की बात करता है, वह मोदी सरकार का निशाना बन जाता है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ मांझी ने कहा कि स्टेन की रात के अंधेरे में गिरफ़्तारी बहुत निंदनीय है। उन्होंने पूछा कि जब स्टेन को उनके आवास पर पूछ ताछ की जा सकती है, तो उन्हें जेल में बंद करने की क्या ज़रूरत है?

कांग्रेस प्रवक्ता प्रभाकर तिर्की ने कहा कि UAPA कानून को तुरंत रद्द किया जाए, जिसके तहत किसी को भी “गैर-कानूनी” करतूतों के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने पूछा कि यह कौन तय करेगा कि कौन-कौन सी गतिविधि गैर-कानूनी है? उन्होंने जोड़ा कि NIA केंद्र सरकार की मन मर्जी के अनुसार काम कर रही है। राज्य आदिवासी सलाहाकार परिषद के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने कहा कि मोदी से पहले किसी भी राजनैतिक नेता ने स्टेन स्वामी के विरुद्ध झूठे आरोप नहीं लगाए थे। भाजपा सरकार पूरे देश में डर का माहौल पैदा कर रही है।

CPI के भुनेश्वर मेहता ने कहा कि भारत का संविधान और लोकतंत्र खतरे में है। NIA ने सीताराम येचुरी और योगेन्द्र यादव जैसे जनता के नेताओं को भी झूठे आरोपों से नहीं छोड़ा है।

अन्य वक्ताओं में आलोका कुजूर, नदीम खान, प्रभाकर तिर्की, प्रवीर पीटर, एलीना होरो, विनोद कुमार, सुशांतो मुखर्जी, पीटर मार्टिन, पी.एम. टोनी, दामोदर तूरी, कनक, नौरीन, सुगिया, पुनीता टोपनो शामिल थे।

सभी सत्तारूढ़ व वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका दल स्टेन स्वामी के साथ है और उनकी तुरंत रिहाई की मांग करता है।

धरने के अंत में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर उनसे अपील की कि वे केंद्र सरकार को उनकी मांगों के बारे में सूचित करें। जिसमें 1) स्टेन स्वामी समेत सभी राजनैतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने, 2) भीमा कोरेगांव मामले को बंद करने व दिल्ली के दंगों में सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध फ़र्ज़ी मामलों को तुरंत रद्द करने एवं 3) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 124क (राजद्रोह) एवं धारा 499 (मानहानि), विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) एवं राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को रद्द करने की मांग शामिल है।

(रांची से स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 17, 2020 4:02 pm

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