Thursday, October 28, 2021

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रांची: फादर स्टेन स्वामी की रिहाई के लिए लोगों ने किया अनशन

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रांची। जब से फादर स्टेन स्वामी को एनआईए की टीम उनके आवास से गिरफ्तार करके ले गई है, झारखंड सहित देश का बुद्धिजीवी तबका, मानवाधिकार के पक्षधर लोग, जनवाद पसंद सामाजिक कार्यकर्ताओं में केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ रोष फूट पड़ा है। झारखंड में रोज ब रोज स्टेन स्वामी को रिहा करने की मांग तेज होती जा रही है।

आज 12 अक्तूबर को रांची के कोकर में स्थित बिरसा मुंडा की समाधि पर राज्य के बुद्धिजीवी व सामाजिक कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक व राजनीतिक संगठनों द्वारा स्टेन स्वामी को रिहा करने की मांग को लेकर प्रातः दस बजे से शाम चार बजे तक अनशन किया गया।

इस अवसर पर अनशनकारियों ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी बिरसा मुण्डा की विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जल, जंगल, जमीन पर हमला बढ़ता जा रहा है और राज्य की स्वायत्तता के विरूद्ध केंद्र सरकार काम कर रही है। जिसके खिलाफ यह कार्यक्रम है। 

इस सिलसिले में प्रदर्शनकारियों ने निम्न मांगें की:

-राज्य की स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार केन्द्र सरकार को पत्र लिखे और स्टेन स्वामी को रिहा कराने के लिए त्वरित कार्रवाई करे।

-भीमा कोरेगांव के केस मे फर्जी तरीके से फंसाये गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं- वकीलों पर से मुकदमा वापस हो।

-यूएपीए रद्द कर, एनआईए एव सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग करना बंद करे सरकार।

-एनआईए के बारे में झारखंड सरकार सुस्पष्ट स्टैंड ले जैसा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ व केरल ने लिया है।

अनशनकारियों में आलोका कुजूर, भुनेश्वर केवट, कुमार विनोद, नदीम खान, सिराज दत्ता, इबरार अहमद, फ़ादर महेंद्र पीटर तिग्गा, रतन तिर्की, प्रभाकर तिर्की, दामोदर तुरी, एस. अली, अजीता, प्रभा लकड़ा, आईती तिर्की, शांति सेन, खुसनी सेन, नंदिता भट्टाचार्या, स्वाति नारायण, सुशांतो मुखर्जी, प्रवीर पीटर, पीटर मार्टिन, उमेश नजीर, श्याम, सूरज श्रीवास्तव, मिहुल, सोहैल, रिसित, एंटोनी पीएम, बुद्धन सिंह, सिंकू, नौरीन आदि शामिल थे।

जिन संगठनों ने कार्यक़म को सफल बनाने में भूमिका निभाई उसमें शामिल थे सीपीआई एमएल, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी, ओमेन महिला संगठन, इप्टा, आइसा, एपीआईडब्लूए, एआईसीसीटीयू, एआईपीएफ़, सांझा मंच, झारखंड छात्र संघ, कांग्रेस, एआईटीयूसी, राइट फॉर फूड कैंपेन, झारखंड जनाधिकार महासभा, झलक, संगम, सामाजिक सांस्कृतिक संस्था, इंड़िजेनस वीमेन इंडिया नेटवर्क, एनएपीएम आदि।

अनशन कार्यक्रम के दौरान लोगों ने प्रतिरोध कार्यक्रम जारी रखने का संकल्प लिया।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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