Thursday, June 1, 2023

जो सुविधाएं दान या कृपा से मिल रही हैं, वो अधिकार से प्राप्त होनी चाहिए

जब तक एक भी प्रवासी कामगार सड़क पर थका हारा, भूखा प्यासा, घिसटता हुआ अपने गांव घर जाता हुआ दिख रहा है, तब तक इस गंभीर पलायन जन्य त्रासदी में उनके हर मुद्दे और समस्या को सोशल मीडिया पर उठाइये और उनके हक में खड़े होइये। सरकार जो कर रही है उसे करने दीजिए। यह उसका दायित्व है। इसीलिए वह चुनी गयी है। उसका एक कारण सोशल मीडिया पर लगातार हो रहे इस समस्या का कवरेज और जन प्रतिक्रिया भी है । सरकार के कदमों की भी जांच पड़ताल होती रहनी चाहिए। इस समय गांव गांव घूम रहे ग्रामीण पत्रकार, उत्साही युवा बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। सोशल मीडिया अब सोशल मीडिया नहीं, बल्कि जन मीडिया बन चुका है। सरकार को भी इससे ज़मीनी जानकारी का लाभ उठाना चाहिए। सरकारें इससे सूचना, और तथ्य लेकर लाभ उठा भी रही हैं। 

लेकिन, फोटोशॉप, या सिर्फ सनसनी फैलाने वाली फोटो और खबरें जन मीडिया को भी वहीं पहुंचा देंगी जहां परंपरागत मीडिया विशेषकर कुछ टीवी चैनल जन संचार को पहुंचा चुके हैं। इस मिथ्यावाचन जो गोदी मीडिया का एक स्थायी भाव बन चुका है। मज़दूरों के अपार दुःख का यह त्रासद समय, जो 1947 के दुःख भरे विस्थापन के बराबर लोगों को उद्वेलित और आक्रोशित कर रहा है, की जिम्मेदारी जिस जिस पर हो उनको एक्सपोज़ किया जाना बहुत ज़रूरी है। हमारा समाज, हमारी परंपराएं असंवेदनशील नहीं है, क्योंकि अगर वे असंवेदनशील होतीं तो इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवी संस्थाए और लोग सड़कों पर राहत और दाना पानी इन मज़दूरों को उपलब्ध कराने नहीं उमड़ पड़ते। 

दान, एक अच्छी बात है। इसकी बहुत महिमा शास्त्रों में गायी गयी है। लेकिन महिमा जितनी दानदाताओं की, की गयी है उतनी दान प्राप्त करने वालों की नहीं गायी गयी है। लेकिन जो सुविधाएं गरीबों और वंचितों को दान या कृपा या किसी के एहसान के कारण मिल रही, इससे यह अधिक ज़रूरी है कि यह सब सुविधाएं उसे उसके अधिकार के रूप में मिलें। जनता का यह अधिकार है कि वह सम्मानपूर्वक जीवन जीये।

यह अधिकार कोरी वाचालता ही नहीं है, बल्कि यह अधिकार हमारा संविधान देता है और इस मौलिक अधिकार को सर्वशक्तिमान संसद भी नहीं छीन सकती है। अगर लोग निजी तौर पर राहत पहुंचा भी रहे हैं तो इससे सरकार का दायित्व कम नहीं हो जाता बल्कि इसे सरकार और तंत्र की नाकामी समझी जानी चाहिये। नाकामी इसलिए नहीं कि सरकार कुछ कर नहीं रही है, बल्कि इसलिए कि सरकार इतनी अक्षम है कि वह समय से समस्या का संज्ञान नहीं ले पायी ऐसे देश की तीन चौथाई आबादी सड़कों पर घिसट रही है। 

( विजय शंकर सिंह रिटायर्ड आईपीएस अफ़सर हैं और आजकल कानपुर में रहते हैं। )

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of

guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles

बच्चों के यौन संरक्षण का हथियार है पॉक्सो एक्ट, अब होगी फांसी की सजा

एलिया प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पॉक्सो एक्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने साक्षी बनाम यूनियन...