Mon. Feb 24th, 2020

अबुझमाड़ के एक गांव में पुलिसिया तांडव! पैसा लूटा, स्कूल जलाए और बकरियां चोरी की; फिर नक्सली बताकर दो महिलाओं और एक पुरुष को किया गिरफ्तार

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बिखरे बर्तन और सामान।

बस्तर। बस्तर के अबुझमाड़ इलाके में पुलिस के जवानों द्वारा जमकर तांडव किए जाने की खबर आयी है। बताया जा रहा है कि पिछली चार फरवरी को डीआरजी यानी डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड के जवानों ने नक्सलियों की तलाशी के नाम पर वहां धावा बोल दिया। और इलाके के गांव मरकाबेड़ा में जमकर उत्पात की। जिसमें पैसे से लेकर बकरियों, सूअर और मुर्गों तक की लूट शामिल थी। लेकिन पुलिसकर्मियों की भूख यहीं नहीं शांत हुई। उन लोगों ने गांव में बने बच्चों के एक स्कूल में पहले तोड़- फोड़ की और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। और आखिर में दो महिलाओं समेत एक पुरुष को पकड़ लिया।

बता दें कि DRG (डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड) आत्मसमर्पित नक्सलियों का एक टुकड़ा है जिन्हें राज्य सरकार DRG के रूप में पेश करती है। 

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आप को बता दें कि इसी मामले को लेकर सीपीआई (माओवादी) रावघाट एरिया कमेटी के सचिव अर्जुन पद्दा ने एक प्रेस रिलीज जारी किया है। विज्ञप्ति में कह गया है कि उनके तीन साथियों मैनी परतापुर, सुनीता एवं हिरंगनार के रामसु वेडदा सिंह को 4 फरवरी 2020 को पुलिस ने पकड़ लिया। लेकिन पुलिस ने अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं दिखायी है। माओवादी नेता का कहना है कि स्कूल को DRG के जवानों ने आग के हवाले कर दिया। मैनी और सुनीता उसी स्कूल में बच्चों को पढ़ाते थे। इसके साथ ही उसमें बताया गया है कि उन स्कूलों को DRG के जवानों ने पहले तोड़ा और फिर जला दिया। 

दरअसल मरकाबेड़ा गांव चारों ओर से पहाड़ों से घिरा है लिहाजा शासकीय योजनाओं की पहुंच से अब तक दूर है। गांव में कोई स्कूल नहीं है लेकिन उसकी कमी नक्सलियों ने पूरी की। जब उन्होंने वहां एक स्कूल खोला। यही नहीं संगठन के सदस्य ही उस स्कूल में शिक्षक भी थे। नक्सलियों की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि जिन लोगों को डीआरजी के जवान उठा कर ले गए हैं उनके खिलाफ किसी तरह के मामले दर्ज नहीं थे।

गांव में अभी भी झोपड़ीनुमा बने इन स्कूलों को टूटे-फूटे और जली अवस्था में देखा जा सकता है। पूरा सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा था। नक्सली तो नक्सली DRG के जवानों ने आम ग्रामीणों को भी नहीं बख्सा। ग्रामीणों की मानें तो घटना के समय स्कूल में 15 लोग बैठे थे DRG ने उन सभी को उठा लिया। हालांकि आधे रास्ते ले जाने के बाद 12 लोगों को छोड़ दिया गया। शेष 2 महिलाओं और 1 पुरुष को वो अपने साथ लेते गए।ये तीनों भी उसी गांव के थे और उसी स्कूल में पढ़ाने का काम करते है। 

बरहाल इस घटना के बाद मरकाबेड़ा के ग्रामीण काफी घुस्से में हैं। उनके लिए एक तरह से जनता सरकार ही उनकी सरकार है। शासन ने उन्हें कुछ नहीं दिया है। एक स्कूल संचालित था सरकार के नुमाइंदों ने उसे भी तोड़ दिया। बता दें कि बस्तर में मीडिया में खबरें आती रहती है कि नक्सली स्कूलों का संचालन करते हैं या बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।  फिलहाल नक्सल प्रेस विज्ञप्ति में 2 महिलाओं और 1 पुरूष के पकड़े जाने का जिक्र है लेकिन 9 दिन बाद भी पुलिस ने उन्हें कहीं पेश नहीं किया है।

(बस्तर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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