कृषि कानूनों व किसान आंदोलन पर राजनीतिक पार्टियों का खेल

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संसद की स्टैंडिंग कमेटी के नियमित अध्यक्ष संदीप बंदोपाध्याय (टीएमसी सांसद) की अनुपस्थिति में कार्यकारी अध्यक्ष व भाजपा सांसद अजय मिश्र ने बड़ा खेल करते हुए आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020, को यथावत लागू करने की सरकार को संस्तुति कर दी है।

इंडियन एक्सप्रेस की 20 मार्च 2020 की ख़बर के अनुसार शुक्रवार को संसद में खाद्य, उपभोक्ता मामले व सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर गठित स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट सदन में पेश कर दी गयी है।

स्टैंडिंग कमेटी ने सरकार द्वारा लाये गये तीन कृषि कानूनों में से एक ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020’, को यथावत लागू करने की सरकार को संस्तुति की है। इस स्टैंडिंग कमेटी में 13 राजनीतिक  पार्टियों जिनमे कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी, शिव सेना, डीएमके, जदयू, नेशनल कान्फ्रेंस, पीएमके, समाजवादी पार्टी, वाईएसआरसीपी, आप, भाजपा से चुने हुये (लोक सभा के 23 व राज्य सभा के 10) सांसद हैं।

टीएमसी के सुदीप बंधोप्पाध्याय इस समिति के अध्यक्ष है। कृषि कानूनों पर इन सभी राजनितिक दलों के घोषित पक्ष है। कांग्रेस इन कानूनों की वापसी को जोर-शोर से किसानों का समर्थन करते हुये उठाती आ रही है। अन्य दलों ने भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुये अलग-अलग वक्तव्य दिये हैं।

बता दें कि समिति के सुझावों को कार्यकारी अध्यक्ष अजय मिश्रा (भाजपा सांसद) की अध्यक्षता में  स्वीकार किया गया है। जबकि समिति के अध्यक्ष सुदीप बंदोपाध्याय किन्हीं “अप्रत्याशित कारणों” से 18 मार्च को हुयी समिति की अंतिम बैठक में शामिल नहीं हुये।

समिति ने रिपोर्ट को प्रस्तुत करते हुए कहा है “आशा और उम्मीद है कि हाल ही में लाया गया ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020’ जो कि कृषि उत्पाद के मुद्दे को संबोधित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था,  कृषि क्षेत्र में विशाल अप्रयुक्त संसाधनों को अनलॉक करने के लिए उत्प्रेरक बन जाएगा। यह कृषी क्षेत्र मे उन्नत निवेश के लिए, कृषि विपणन में उचित और उत्पादक प्रतिस्पर्धा और किसानों की आय में वृद्धि के लिए एक  वातावरंण तैयार करेगा।” इसलिए समिति ने सरकार को “आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 को अक्षर और आत्मा में लागू करने और बिना किसी बाधा के लागू करने की सिफारिश की, ताकि इस देश में किसानों और कृषि क्षेत्र के अन्य हितधारकों को लाभ प्राप्त हो।”

आवश्यक वस्तु कानून-मूल्य वृद्धि के कारण व  प्रभाव पर रिपोर्ट में कहा गया है कि ”हालांकि देश ज्यादातर कृषि जिंसों में अधिशेष हो गया है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज, गोदामों, प्रसंस्करण और निर्यात में निवेश की कमी के कारण किसानों को बेहतर कीमत नहीं मिल पाई है, जैसा कि उद्यमियों ने कहा कि इसका कारण आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में नियामक तंत्र द्वारा हतोत्साहित किया जाना है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है, “जब बम्पर फसलें होती हैं तो किसानों को भारी नुकसान होता है, खासतौर पर खराब होने वाली वस्तुओं पर, जिनमें से अधिकांश को पर्याप्त प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ कम किया जा सकता है”।

12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसानों के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर तीन कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक के बाद ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम’ को लागू करने के लिए समिति की सिफारिश की गयी है। अन्य दो कानून ‘किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020’, और ‘मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020’ पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) पर कोई निर्णय केन्द्र की सरकार ने नहीं लिया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक अन्य समिति द्वारा सरकार द्वारा लाये गये नये कृषि कानूनों पर अगले कुछ दिनों में अपनी सिफारिशें देने की उम्मीद है। बता दें कि सरकार और आंदोलनकारी किसान यूनियनों के बीच कई दौर की बातचीत कानूनों पर बने गतिरोध को खत्म करने में नाकाम रही है।

स्थायी समिति ने भी सरकार से कहा है कि “सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर निरंतर निगरानी रखें। आगे यह देखते हुए कि आलू, प्याज और दाल जैसे खाद्य पदार्थ एक आम आदमी के दैनिक आहार का हिस्सा हैं, और उन लाखों लोगों को जिन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का लाभ नहीं मिलता है, कार्यान्वयन के बाद प्रतिकूल रूप से पीड़ित हो सकते हैं।

बहरहाल स्टैंडिंग कमेटी में 13 राजनीतिक पार्टियों जिनमे कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी, शिव सेना, डीएमके, जदयू , नेशनल कान्फ्रेंस, पीएमके, समाजवादी पार्टी, वाईएसआरसीपी, आप, भाजपा  से चुने हुये (लोक सभा के 23 व राज्य सभा के 10) सांसद  है। लेकिन अभी तक किसी भी पार्टी की ओर से इस पर बयान नहीं आया है।

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