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पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रथमदृष्ट्या हत्या के मुकदमे के लिए पर्याप्त सामग्री: मद्रास हाईकोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने प्रकाश कदम बनाम रामप्रसाद विश्वनाथ गुप्ता, 2011 में व्यवस्था (रूलिंग) दिया था कि फर्ज़ी मुठभेड़ के दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा दी जानी चाहिए। इसे दुर्लभतम मामला माना जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पुलिसकर्मी ऐसे व्यक्ति हैं जिनका कर्तव्य क़ानून की सुरक्षा करना हैI हमारी राय में यदि अपराध सामान्य लोगों द्वारा किए जाते हैं तो साधारण दंड दिया जाना चाहिए लेकिन अगर पुलिसकर्मियों द्वारा अपराध किया जाता है तो बहुत कठोर दंड दिया जाना चाहिए क्योंकि वे वह काम कर रहे हैं जो पूरी तरह से उनके कर्तव्यों के विपरीत है। जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि इसलिए अगर निर्भया के अभियुक्तों को फाँसी दी गई थी तो तूतिकोरिन मामले में सभी पुलिसकर्मी कोर्ट द्वारा दोषी पाए जाने पर इसी सज़ा के हकदार हैं।

इस बीच, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा प्रतीत हो रहा है कि थाना तूतुकुड़ी के सथानकुलम पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोप के लिए पर्याप्त सामग्री है, जो जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की हिरासत में मौत के मामले में शामिल हैं (रजिस्ट्रार जनरल (न्यायिक), मद्रास उच्च न्यायालय मदुरै बेंच बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य)।

जस्टिस पीएन प्रकाश और बी पुगलेंधी की खंडपीठ ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की हिरासत में हुई मौतों की जांच रिपोर्ट की पृष्ठभूमि को देखते हुए उक्त निर्देश दिया, जिसमें कहा गया था कि संथाकुलम के पुलिस अधिकारी जांच में बाधा डालने का प्रयास कर रहे थे। तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कल न्यायालय द्वारा अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई है।

अपनी 29 जून की रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट ने अदालत को यह भी सूचित किया था कि हेड कांस्टेबल मामले के बारे में बोलने से डरती थी, और वह शुरू में अपने बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए अनिच्छुक थी। इस रिपोर्ट के अनुसार रेवती को यह भी बताया गया है कि जयराज और बेनिक्स को सुबह तक पीटा गया था और पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई लाठियों में खून के निशान होना तय है। उन्हें इतना ज्यादा मारा गया था कि डंडे और टेबल खून से सन गए थे। रेवती ने आग्रह किया कि इन चीजों को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाकी पुलिसकर्मियों ने अपने डंडे जमा करने में अनिच्छा दिखाई थी। डंडा मांगने पर एक पुलिसकर्मी दीवार फांदकर भाग गया, वहीं महाराजन नाम के दूसरे कॉन्स्टेबल ने पहले कहा कि उसका डंडा उसके गांव पर है, बाद में अपने बयान से पलटकर कहा कि उसका डंडा पुलिस क्वार्टर में है।

मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट ने यह विस्तृत रूप से बताया कि अन्य पुलिस अधिकारी असहयोग कर रहे थे या जब पूछताछ के दौरान लाठियां कहाँ हैं पूछा गया तो उन्होंने मजिस्ट्रेट को धमकाने का प्रयास किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस स्टेशन में उनसे पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मी मोबाइल फोन पर वीडियो बना रहे थे और कोर्ट के स्टाफ पर धौंस दे रहे थे। चूंकि स्थिति सुरक्षित नहीं लग रही थी, इसलिए कोर्ट की टीम जल्द ही वहां से वापस आ गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्स्टेबल महाजन ने कहा था कि ‘हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता’।

खंडपीठ ने कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट नंबर 1, कोविलपट्टी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मृतक के शरीर पर मृत्यु पूर्व के चोट के निशान पाए गए हैं और विशेष रूप से रेवती, हेड कांस्टेबल रेवती का बयान प्रथम दृष्ट्या इस बात के लिए पर्याप्त है कि अपराध संख्या 312/2020 के मामले की जांच में सक्रिय रूप से शामिल रहे संथाकुलम पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 302 आईपीसी के तहत मामले को दर्ज कर दिया जाए।

खंडपीठ ने न्याय के हितों में निर्देश दिया है कि हेड कांस्टेबल रेवती के बयान को न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा दर्ज किया जा सकता है, जिसकी जांच संथाकुलम मजिस्ट्रेट या मजिस्ट्रेट कर रहे हैं। खंडपीठ ने तूतुकुड़ी कलेक्टर को हेड कांस्टेबल रेवती और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि इस बीच, जिला कलेक्टर, तूतीकोरिन, रेवती और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा तुरंत सुनिश्चित करेगा। उन्हें ड्यूटी से छुट्टी भी दी जा सकती है, क्योंकि हमें डर है कि वहाँ उन्हें डराने और न्यायिक मजिस्ट्रेट नं 1 कोविलपट्टीके समक्ष उनके दिए गए बयान से मुकरने के लिए बाध्य करने का प्रयास किया जाएगा।

धारा 176 सीआरपीसी के तहत जांच करने वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भी अदालत को सूचित किया कि संथाकुलम पुलिस जांच का फायदा उठा रही है और “सबूतों को गायब करने का प्रयास कर रही है। इसलिए, अदालत ने अनिल कुमार, वर्तमान में उप पुलिस अधीक्षक, सीबी-सीआईडी, तिरुनेलवेली,को जांच अधिकारी के रूप में किसी भी डीजीपी के किसी औपचारिक आदेश की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल पदभार संभालने का आदेश दिया है।

खंडपीठ ने कहा कि अगर हम अब कार्रवाई नहीं करते हैं, तो बहुत देर हो जाएगी, क्योंकि, राज्य सरकार की सीबीआई जांच सिफारिश जब केंद्र सरकार स्वीकार करेगी तब उसके बाद ही सीबीआई अपने मामले की जांच  कर  सकती है। सीबीआई के पास तूतीकोरिन या तिरुनेलवेली में कार्यालय नहीं है केवल मदुरै में है । सीबीआई अनिवार्य रूप से भ्रष्टाचार और श्वेतकालर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक संगठन है। वर्तमान लॉक डाउन की स्थिति में कोविड-19 महामारी के कारण, यह ज्ञात नहीं है कि कितने सीबीआई कर्मियों को जांच अधिकारी की सहायता के लिए उपलब्ध कराया जायेगा । जांच अधिकारी स्थानीय इलाके को जानने वाला होना चाहिए। दूसरी तरफ, सीबीआई के पास मदुरै बेंच में एक विशेष लोक अभियोजक भी नहीं है जो जमानत और अग्रिम जमानत के मामले में पैरवी कर सके। जल्द ही मुकदमा चलेगा। इस सबसे अपराध के वास्तविक अपराधियों के लाभ मिल सकता है ।

कोर्ट ने सभी प्रासंगिक केस फाइलों, हेड कॉन्स्टेबल रेवती द्वारा दिए गए मूल बयान और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट का को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को एक बार तैयार होने के बाद सीलबंद कवर में मूल जांच रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है। इस मामले पर 2 जुलाई को सुनवाई होगी ।

जस्टिस काटजू ने कहा है कि तूतीकोरिन, तमिलनाडु में जो हुआ वो निर्भया मामले से भी बदतर है जिसके लिए हाल ही में 4 लोगों को फाँसी दी गई थी। तूतीकोरिन ज़िले के संथाकुलम शहर में मोबाइल एक्सेसरी की दुकान चलाने वाले एक पिता और पुत्र, पी. जयराज और बेनिक्स, को कुछ पुलिसकर्मियों ने बंद के दौरान दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिर उन्हें थाने ले जाया गया और बेरहमी से मारपीट की गई। ज़ाहिर है कि एक रॉड या लाठी, उनके निजी अंगों में जबरन डाले गए (उनके मलाशय से इतना ख़ून बह रहा था कि तीन बार कपड़े बदलने की ज़रूरत पड़ी)। बाद में निर्भया मामले में, एक रॉड को पीड़ित के निजी अंगों में जबरन डाला गया था। ये अपराधी आम नागरिक थे, पुलिस वाले नहीं। यहां यह कुकर्म पुलिसकर्मियों द्वारा किया गया है जिनका कर्तव्य क़ानून को बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा करना है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 1, 2020 10:59 am

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