प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव संदीप सिंह को शुक्रवार को अग्रिम जमानत दे दी । जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने कहा कि प्रियंका गाँधी ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुए संकट के दौरान प्रवासी भारतीयों को लाने के लिए बसों की पेशकश की थी और संदीप सिंह ने केवल इसकी सूचना आगे बढ़ायी थी । एकल पीठ ने जांच पूरी होने के बाद इस मामले में पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक संदीप की अग्रिम जमानत को अनुमति दी।

एकल पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी की स्थिति में सिंह को जमानत पर रिहा किया जाएगा । वह एक लाख रूपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानत राशियां जमा करेंगे । एकल पीठ ने सिंह को निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर किसी पुलिस अधिकारी द्वारा पूछताछ के लिए स्वयं को उपलब्ध करायेंगे,  आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई अभियोग, धमकी या वादा नहीं करेंगे, ताकि उन्हें ऐसे तथ्यों को अदालत या किसी अन्य अधिकारी को बताने से मना किया जा सके तथा आवेदक न्यायालय की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेंगे।

एकल पीठ ने कहा कि पत्र गाजियाबाद-नोएडा सीमाओं से प्रवासी मजदूरों को पेश करने के लिए 1000 बसों की पेशकश के संबंध में थे। ऐसा प्रतीत होता है कि 1000 बसों में से 150 वाहनों के कागजात क्रम में नहीं थे। इन 150 वाहनों में से, कुछ वाहन ऑटो / थ्री व्हीलर, एम्बुलेंस, ट्रक आदि थे, और कुछ वाहनों / बसों के परमिट और फिटनेस वैध नहीं थे।

वरिष्ठ वकील विवेक तनखा और नदीम मुर्तजा ने कहा कि आवेदक संदीप सिंह प्रियंका के निजी सचिव हैं । उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी को कुछ पत्र लिखे थे । पत्र प्रवासी कामगारों को गाजियाबाद—नोएडा सीमा से लाने के लिए 1000 बसों की पेशकश से संबंधित थे । अपर महाधिवक्ता वी के साही और सरकारी वकील ने हालांकि जमानत याचिका का विरोध किया । 

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता संदीप सिंह ने प्रियंका की ओर से पत्र लिखे थे और हर पत्र में उन्होंने कहा था कि वह प्रियंका की ओर से पत्र लिख रहे हैं । प्राथमिकी में प्रियंका आरोपी नहीं हैं । वस्तुत: प्रियंका के जरिए कांग्रेस पार्टी ने बसों की पेशकश की थी । सिंह केवल प्रियंका की ओर से पत्र लिख रहे थे । 

संदीप सिंह के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज है।याचिका में कहा गया था कि संदीप सिंह ने कोई आपराधिक कृत्य नहीं किया, राजनीतिक द्वेष के चलते दर्ज एफआईआर दर्ज की गई है।

लखनऊ में 19 मई को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था । प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ तथा अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में हजरतगंज कोतवाली में परिवहन अधिकारी आरपी त्रिवेदी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 420, 467 और 468 के तहत दर्ज किया गया है। यह मुकदमा उत्तर प्रदेश सरकार के उस आरोप के बाद दर्ज हुआ था जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस द्वारा प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक ले जाने के लिए दी गई 1000 बसों की सूची में शामिल कुछ वाहनों के नंबर दो पहिया, तिपहिया वाहनों तथा कारों के तौर पर दर्ज पाए गए थे। 

इन आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ ने कहा था कि सरकार जान बूझ कर बसों के नंबरों में हेरफेर करके गुमराह कर रही है। हमने बसों के नंबर ही दिए थे। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा था कि दो दिन पूर्व सभी बसें गोवर्धन से आगे डीग रोड पर राजस्थान सीमा से लौट गईं और अब हमारी बसें फतेहपुर सीकरी बॉर्डर पर तैयार खड़ी थी  लेकिन आगरा जिला प्रशासन बसों को यहां से गुजरने ही नहीं दिया। कांग्रेस ने शुरू से ही मजदूरों के लिए भेजी जाने वाली बसों को नोएडा और गाजियाबाद भेजने का प्रस्ताव रखा था।इसके लिए प्रदेश सरकार ने दो दिन तक तो अनुमति ही नहीं दी।बाद में अनुमति दी भी तो बसों को लखनऊ भेजने को कहा गया था , जो कि अमानवीय था।

(इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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