Friday, December 9, 2022

सवाल पूछना अंधविश्वास के खात्मे की पहली शर्त: गौहर रजा

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नई दिल्ली। गाजियाबाद के लोनी जैसे पिछड़े माने जाने इलाके में स्थित सोफिया स्कूल में आज 28 जुलाई को ‘अंधविश्वास के कारण पिछड़ते हम और हमारे लोग’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों बच्चों के साथ-साथ भारी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। कार्यक्रम जनज्वार फाउंडेशन, भगत सिंह अध्ययन केंद्र, युवा संवाद और जन एकता मंच द्वारा आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में बतौर वक्ता खासतौर पर स्कूली बच्चों से मुखातिब होते हुए मशहूर शायर और वैज्ञानिक गौहर रजा ने समाज में वैज्ञानिक तेवर को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बच्चों को डिमॉन्स्ट्रेशन के कुछ उदाहरण देकर कहा कि चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं होती, बल्कि हर चमत्कार के पीछे विज्ञान होता है। वैज्ञानिक चेतना के अभाव में अंधविश्वास ने समाज को जकड़ा हुआ है। हाथ की सफाई और विज्ञान को तथाकथित तांत्रिक-बाबा अपनी सिद्धि साबित कर समाज को अंधभक्त बना देते हैं और अंधविश्वास में जकड़ा समाज सवाल पूछना बंद कर देता है। जिस दिन हर इंसान सवाल पूछना शुरू कर देगा, हर सवाल का जवाब चाहेगा, उसी दिन से अंधविश्वास का खात्मा शुरू हो जायेगा। यानी हर बात का जवाब जरूर खोजना चाहिए। क्यों, क्या, कैसे सवाल हमारे दिमाग में हमेशा रहने चाहिए और उनके जवाब जानने की उत्सुकता भी। यह अंधविश्वास के खात्मे की तरफ एक बड़ी पहलकदमी होगी।

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वहीं पूर्व आईपीएस और सामाजिक कार्यकर्ता वीएन राय ने बच्चों के बीच छोटी कहानी के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वास को सामने रखा और बताया कि क्यों हमारे जीवन से अंधविश्वास का दूर होना बहुत जरूरी है। हम अंधविश्वासी बने रहेंगे तो किस तरह ताउम्र शोषण की चक्की में पिसते रहेंगे। अंधविश्वास को मिटाना समाज के विकास की पहली शर्त है। उन्होंने पुलिस प्रशासन के अंधविश्वास के बारे में भी अपनी बात रखी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एके अरुण ने स्वास्थ्य के अंधविश्वास पर अपनी बात रखी। बच्चों के साथ ‘अंधविश्वास मिटाना है, नया समाज बनाना है’ नारा लगाकर उन्होंने बताया कि चिकित्सा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे ज्यादा अंधविश्वास कायम है। जानकारी और वैज्ञानिक चेतना का अभाव इसका सबसे बड़ा कारण है। अनपढ़ तो छोड़िए पढ़े—लिखे लोग भी बीमार होने पर बजाय इलाज कराने के ओझा-सोखा के चक्कर काटते देखे जा सकते हैं। पिछड़े इलाकों में तो स्वास्थ्य का अंधविश्वास सबसे ज्यादा गहराया हुआ है। शरीर की बहुत प्राकृतिक चीजों खासकर महिलाओं के मामले में, को जिस तरह अंधविश्वास के नाम पर प्रसारित-प्रचारित किया जाता है और उसे भगवान से जोड़ा जाता है वह सबसे ज्यादा खतरनाक है।

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कार्यक्रम में बतौर वक्ता पर्यावरण विशेषज्ञ महेंद्र पांडेय, वैज्ञानिक सुरजीत जी, सामाजिक कार्यकर्ता और बच्चों के बीच काम कर रहे केपी सिंह ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन जनज्वार के अजय प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में आई सांस्कृतिक टीम के साथियों ने भी अपने जोशीले गानों से छात्रों और आयोजन में पधारे लोगों का उत्साहवर्धन और मनोरंजन किया।

‘अंधविश्वास के कारण पिछड़ते हम और हमारे लोग’ विषय पर सोफिया इंटर कॉलेज, विद्या वैली पब्लिक स्कूल, लोनी इंटर कॉलेज, एपीजे पब्लिक स्कूल, आदर्श नवजीवन इंटर कॉलेज, एसवी विद्या मंदिर और बीएस मेमोरियल इंटर कॉलेज स्कूलों के छात्रों के बीच निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित करवायी गयी थी, जिसमें 325 से भी ज्यादा स्कूली छात्रों ने हिस्सेदारी की। बेहतरीन निबंध लिखने वाले 20 बच्चों को इस दौरान मंचासीन वक्ताओं ने पुरस्कृत किया। इसके अलावा निबंध प्रतियोगिता में हिस्सेदारी करने वाले सभी बच्चों के बीच भी पुरस्कार वितरण किया गया।

हरियाणा के रोहतक से आये ब्रह्मप्रकाश कार्यक्रम में खास आकर्षण के केंद्र रहे। उन्होंने बाबाओं के चमत्कारों को लेकर किए गए डेमोंस्ट्रेशन से बच्चों को दिखाया कि जिसे असल में जादू—टोना कहा जाता है उसके पीछे किस तरह विज्ञान जिम्मेदार है। उन्होंने बच्चों के बीच कई डेमोस्ट्रेशन भी किये, जिन्हें बच्चों ने समझा।

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कार्यक्रम की तैयारियों और उसे सफल बनाने में जीत, नितिन, कुंदन, बबलू फ्रेड्रिक, दिनेश कुमार, कुलदीप, भरत चौधरी, अंकित गोयल, विनयामीन अली समेत तमाम साथियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इनके अलावा छात्र राहुल शर्मा, विवेक गुप्ता, उस्मान, ललिता और काजल ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।

कार्यक्रम में अंधविश्वास से लोगों को जागरुक करने के लिए पर्चे भी प्रकाशित किये गये, जो लोनी में हजारों युवाओं, छात्रों, महिलाओं-पुरुषों के बीच वितरित किये गये। इसके अलावा साथियों ने घर-घर जाकर भी संपर्क अभियान चलाया, ताकि लोग इस कार्यक्रम में शामिल हों। घर-घर जाकर किये गये संपर्क अभियान की सफलता ही रही कि कार्यक्रम में भारी संख्या में घरेलू महिलाएं, लड़कियां, बुजुर्गों, बच्चों ने हिस्सेदारी की।

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