पंजाब निकाय चुनाव में दो तिहाई सीटों पर उम्मीदवार तक नहीं ढूंढ पाई है भाजपा

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पंजाब में 14 फ़रवरी को निकाय चुनाव होने हैं। यहां आठ नगर निगमों की 2,302 सीटों पर होने वाले निकाय चुनाव और 109 नगर पंचायतों में मतदान होने वाला है, लेकिन कृषि कानून के मुद्दे को लेकर पंजाब में माहौल पूरी तरह से गर्म है। पंजाब में भाजपा के स्थानीय नेताओं को किसानों के गुस्से का सामना भी करना पड़ रहा है। भाजपा निकाय चुनाव में दो तिहाई सीटों पर उम्मीदवार तक नहीं ढूंढ पाई है। माना जा रहा है कि किसान कानूनों के मुद्दे पर यहां भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कृषि कानून को लेकर ही भाजपा और अकाली दल का 25 साल पुराना गठबंधन भी टूट चुका है। दिल्ली बॉर्डर पर पिछले दो महीनों से अधिक समय से चल रहे आंदोलन को लेकर पंजाब में भाजपा को भयंकर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा के कुछ नेताओं का कहना है कि उन्हें प्रचार करने के दौरान लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई नेताओं ने अपनी गाड़ियों से भाजपा का झंडा भी उतार दिया है। यहां तक कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के बाद पंजाब में भाजपा के द्वारा आयोजित किए गए तिरंगा यात्रा को भी टाल दिया गया।

जनसत्ता की एक रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा निकाय चुनाव में दो तिहाई सीटों पर उम्मीदवार तक नहीं ढूंढ पाई है, जबकि करीब 20 से ज्यादा नेताओं ने सिर्फ जनवरी में ही पार्टी छोड़ दी है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं में भाजपा के बड़े सिख चेहरे मलविंदर सिंह कंग का नाम भी शामिल है। 

भाजपा के बड़े नेताओं को अक्तूबर के महीने से ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं कई नेताओं का सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया गया है। भाजपा के बड़े सिख चेहरे हरजीत ग्रेवाल द्वारा किसानों को अर्बन नक्सल कहे जाने से भी लोग काफी नाराज चल रहे हैं। कई लोगों ने तो उनको निकाय चुनाव लड़ने तक की चुनौती दे रखी है। 

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