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पुतिन को भारत में बाढ़ की तबाही के बारे में पता है, पर दिल्ली में बैठी भारत सरकार को नहीं

परसों रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बयान जारी करके भारत के कई राज्यों में आई बाढ़ पर अपनी चिंता प्रकट की है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो बात मास्को में बैठे रूसी राष्ट्रपति को पता है वो बात दिल्ली में बैठे हमारे देश के प्रधानमंत्री और सरकार को नहीं पता है। तभी तो न तो उनकी ओर से अब तक कोई बयान है, न ट्वीट, राहत पैकेज की तो बात ही क्या करें।

भारत में बाढ़ से 24 लाख बच्चे प्रभावित, यूनिसेफ की रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में हाल ही में आई बाढ़ के कारण लगभग 24 लाख बच्चे प्रभावित हुए हैं। अतः बाढ़ से उपजी चुनौतियों का सामना करने के लिए त्वरित सहायता, अतिरिक्त संसाधनों और नये उपाय करने की जरूरत है।

यूनिसेफ ने कहा कि हालांकि बाढ़ हर साल आती है लेकिन जुलाई के मध्य में इतने बड़े स्तर पर बाढ़ आना असामान्य बात है। वक्तव्य के अनुसार, भारत में बिहार, असम, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं जिनमें 24 लाख बच्चे शामिल हैं। दक्षिण एशिया के लिए यूनिसेफ की क्षेत्रीय निदेशक जीन गफ ने कहा, ऐसे मौसम द्वारा लाई गई तबाही से यह क्षेत्र भली भांति परिचित होने के बावजूद हाल ही में भारी मानसूनी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से बच्चों और उनके परिवारों की दुनिया उजड़ गई है।

असम में 30 जिले बाढ़ की चपेट में, लोग एनआरसी मुद्दे पर केंद्र सरकार पर कस रहे तंज

असम में बारिश और भूस्खलन से अब तक 123 लोगों की मौत हो चुकी है, 24 लाख लोग विस्थापित हैं, 33 में से 30 जिले बाढ़ प्रभावित हैं और 116 पशु मर चुके हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने बृहस्पतिवार को एक बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि बुधवार तक 26 जिलों में 26 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। ब्रह्मपुत्र नदी डिब्रूगढ़, धुबरी और गोलपाड़ा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

असम के सिर्फ पांच जिलों में बाढ़ के आँकड़े कुछ यूँ हैं- गोलपाड़ा में 5 लाख 58 हजार, बरपेटा में 3 लाख 52 हजार, मोरीगां में 3 लाख 14 हजार, धुबरी में 2 लाख 77 हजार और साउथ सालमारा में 1 लाख 80 हजार लोग प्रभावित।

वहीं दूसरी ओर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के एनआरसी हंटर से पीड़ित लोग सरकार पर एनआरसी को लेकर सोशल मीडिया पर तंज भी कस रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा है- “आसाम में बाढ़ से 107 लोगों की मौत हो गई है। कुछ दिन पहले रखा हुआ सामान भी नहीं बचा पाए  लेकिन 70 साल पहले रखा हुआ । कागज साहब को चाहिए तो चाहिए।”

एक दूसरे यूजर लिखते हैं- “ये असम है। अंगूठा टेक नेताओं को इनसे एनआरसी का काग़ज़ चाहिए।

असम में 33 में से 27 जनपद ऐसे ही डूबे हुए हैं, लेकिन ज़िद है नागरिकता का प्रमाण चाहिए तो चाहिए।

वैसे वो लोग भी सोच लें, जिनके यहां हर साल बाढ़ आती है कि काग़ज़ कैसे दिखाएंगे।”

बिहार में कोरोना संकट बीच बाढ़ से तबाही

बिहार के 10 जिलों के 55 प्रखंडों की 282  पंचायतों की 6,36000 आबादी बाढ़ से जूझ रही है। गोपालगंज, वाल्मीकनगर बराज से गंडक नदी में साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गोपालगंज-बेतिया महासेतु के आगे एप्रोच पथ ध्वस्त हो गया। माइनर ब्रिज के पास दोनों तरफ करीब बीस-बीस मीटर तक एप्रोच पथ पानी के तेज धार में बह गया, जिससे गोपालगंज-बेतिया पथ पर यातायात ठप हो गया है। 23 जुलाई की सुबह महासेतु के पास गंडक की धार को रोकने के लिए बनाया गया गाइड बांध भी 30 मीटर तक टूट गया।

दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के माधोपट्टी में कचहरी टोला के पास बागमती नदी का पछियारी तटबंध टूट गया है जिसके चलते पाठक टोला के कई घरों में बाढ़ का पानी चला गया है। गोपालगंज के मांझा के पुरैना में सारण मुख्य तटबंध टूटा गया है। बरौली के देवापुर में सारण मुख्य तटबंध भी टूटने की ख़बर है। बरौली के देवापुर में रिंग बांध और जादोपुर के राजवाही में गाइड बांध भी टूट गया है, जिसके चलते प्रखंड के पश्चिमी भाग की 50  हजार की आबादी का प्रखंड तथा जिला मुख्यालय से सीधा सड़क सम्बन्ध खत्म हो गया है।

मौसम विभाग ने मुजफ्फरपुर दरभंगा, पटना और सिवान में अलर्ट जारी किया है इन जिलों में अगले तीन घंटों में वर्षा और वज्रपात की आशंका है। गंडक नदी के निचले (जल ग्रहण क्षेत्र) इलाके में शुक्रवार और शनिवार को भारी बारिश की आशंका को देखते हुए सरकार ने अलर्ट जारी किया है। बूढ़ी गंडक, सिकरहना और गंगा में पानी बढ़ रहा है। गंडक व बागमती नदियों के तटबंधों में रिसाव की सूचना है, जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। वहीं, अधवारा नदी में उफान आने से गुरुवार को सीतामढ़ी-पुपरी पथ पर पानी चढ़ गया है।

बाढ़ से बचाव के लिए एक दर्जन जिलों में एनडीआरएफ की 21 तैनात की गई हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव रामचंद्रू डू के मुताबिक 147 सामुदायिक रसोई चलायी जा रही है। इसके अतिरिक्त दस राहत शिविरों में चार हजार लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है।

महानंदा नदी के जलस्तर में कई स्थानों पर वृद्धि दर्ज की गयी है। अब भी महानंदा नदी सभी स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंगा, बरंडी, कोसी व कारी कोसी नदी के जलस्तर में गुरुवार से उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है।

दो दिन पूर्व कोसी में आये उफान से नदी का डिस्चार्ज करीब साढ़े तीन लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था इसके चलते तटबंध के भीतर सैकड़ों गांव में बसे हजारों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। महानंदा नदी के जलस्तर में कई स्थानों पर वृद्धि दर्ज की गयी,  अब भी महानंदा नदी सभी स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी के करीब के कई इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया है जिससे कई क्षेत्रों का सड़क संपर्क टूट चुका है।

दरभंगा के असरहा गाँव की रहने वाली आठ महीने की गर्भवती महिला रुखसाना प्रवीण को पेट दर्द का अनुभव होने पर अस्पताल ले जाना पड़ा। उनके लिए, ग्रामीणों ने लकड़ी के तख्तों और रबर के टायरों का निर्माण किया और उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए गर्दन-गहरे पानी के दौरे किए।

कोसी नदी में आई बाढ़ के चलते कई लोग अभी भी नजदीकी गांवों में फंसे हैं, जिनकी जिंदगी मचान पर बैठकर गुजर रही है। रतवारा गांव में करीब 150 से अधिक लोग मचान पर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। जबकि सैकड़ों गांवों के लोग अपने घरों को छोड़कर कैंप में शरण लिए हुए हैं, इस कैंप को भी सरकार ने नहीं बल्कि एक संस्था ने बनाया है।

वहीं मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुर गांव के लोग बागमती नदी में आई बाढ़ के चलते अपने घरों को छोड़कर बांध पर आश्रय लिए हुए हैं जबकि गोपालगंज के सदर प्रखंड का कटघरवा गांव बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गया है। यहां के लोगों को गांव से निकालकर मुंगराहा के एक सरकारी स्कूल में बने बाढ़ राहत शिविर में रखा जा रहा है। लोगों के सामने इस वक़्त खाने का संकट भी खड़ा हो गया है। बाढ़ में फँसे लोग घोंघा खाकर जीवन जी रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका बीच जमीन पर विपक्ष, आसमान में सरकार 

पूर्वी उत्तर प्रदेश में राप्ती-रोहिन और सरयू नदियां उफान पर हैं। बुधवार को इन नदियों का जलस्तर तेजी से आस-पास के गांवों की तरफ फैलने लगा है। कुआनों और गोर्रा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। कुआनो नदी मुखलिसपुर में खतरे के निशान के काफी करीब पहुंच गई है।

गोरखपुर में पहले राप्ती-रोहिन और सरयू नदी खतरे का निशान पार कर बह रही है। राप्ती और सरयू तेजी से कटान भी कर रही हैं। इनका पानी तेजी से किनारे के गांवों में फैल रहा है। सरयू गोला और बड़हलगंज इलाके में कई गांवों के लिए खतरा बन गई है। राप्ती जंगल कौड़िया ब्लॉक में राजपुर दूबी गांव का अस्तित्व मिटा देने पर उतारू है। वहीं खोरा बार ब्लाक में नदी बंधे को काट रही है।

महोबा जिले के महिला जिला अस्पताल में पानी घुसने से हर चीज तैर रही है।

बरेली के कोविड-19 अस्पताल में बारिश से झरना फूट रहा है।

दिल्ली में कोरोना के चलते बाढ़ से निपटने की तैयारी नहीं कर पाए केजरीवाल

गांव मोहल्लों और नदी किनारे के इलाकों को छोड़िए देश की राजधानी दिल्ली जैसे सुविधासंपन्न महानगर में भी बाढ़ आई है। नाले उफनाई नदियों में बदलकर अगल बगल के मकानों को बहा ले जा रहे हैं तो वहीं कनॉट प्लेस जैसा पॉश एरिया स्वीमिंग पूल में तब्दील हो गया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी नाकामी को पूरी बेशर्मी से कोरोना क्राइसिस से ढँकते हुए दलील दे रहे हैं कि-“ इस साल सभी एजेंसियां, चाहे वो दिल्ली सरकार की हों या एमसीडी की, कोरोना नियंत्रण में लगी हुई थीं। कोरोना की वजह से उन्हें कई कठिनाइयाँ आयीं। ये वक्त एक दूसरे पर दोषारोपण का नहीं है। सबको मिल कर अपनी जिम्मेदारियां निभानी हैं। जहां-जहां पानी भरेगा, हम उसे तुरंत निकालने का प्रयास करेंगे।”

केरल और हिमाचल में भी बिगड़ रहे हालात

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में बाढ़ में कई मजदूरों के फँसने की सूचना हैं वहीं, केरल के कोच्चि में घरों में समंदर का पानी घुस रहा है। केरल में साल 2018 में बाढ़ ने जबर्दस्त तबाही मचाई थी।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on July 25, 2020 10:46 am

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